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तनाव: चीनी विमानों ने लद्दाख के पास सीमा से 10KM दूर भरी उड़ान, भारत की पैनी नजर

Tue, 02 Jun 2020 05:06 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Tue, 02 Jun 2020 05:06 AM IST
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Border dispute Tension: now Chinese planes fly just 10 km from the border near Ladakh, India eyeing
सांकेतिक तस्वीर

सीमा पर जारी तनाव के बीच चीन के लड़ाकू विमानों के वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास पूर्वी लद्दाख से 30-35 किलोमीटर दूर उड़ान भरने को लेकर भारत चौंकन्ना हो गया है। चीनी विमानों ने यह उड़ान अपने सैन्य अड्डे होतान और गारगुंसा से 100-150 किलोमीटर दूर भरी।

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सूत्रों के मुताबिक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सीमावर्ती ठिकानों पर 10 से 12 लड़ाकू विमान मौजूद हैं। वह भारतीय सीमा के करीब उड़ान गतिविधियां करती रहती है। उन्होंने कहा कि हम जे-11 और जे-7 लड़ाकू विमानों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
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सूत्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक चीनी विमान भारतीय क्षेत्र से महज 10 किलोमीटर दूर थे। उल्लेखनीय है कि मई के पहले हफ्ते में जब भारतीय और चीनी हेलीकॉप्टर एक दूसरे के काफी करीब आ गए थे, तब भारत ने सुखोई-30 विमान को भेज दिया था।
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भारत के रडार पर है होतान
पाकिस्तान ने जब से चीन की वायुसेना के साथ युद्धाभ्यास किया है, तभी से चीन के होतान सैन्य ठिकाने पर भारत की नजर है। सूत्रों ने कहा कि पिछले साल भी जब पाकिस्तान के कब्जे वाले लद्दाख के पश्चिमी भाग स्कार्दू सैन्य ठिकाने से होतान के लिए पाकिस्तान के छह जेएफ-17 विमान ने उड़ान भरी तो भारत ने निगरानी बढ़ा दी थी।

ड्रैगन बोला, भारत-चीन की सीमा पर हालात स्थिर
चीन ने फिर कहा है कि भारत के साथ सीमा पर हालात स्थिर और नियंत्रण योग्य हैं। दोनों देश निर्विघ्न बातचीत के चैनल और आपसी परामर्श से मसले का हल निकाल लेंगे। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीनी सेना में लगातार टकराव के बीच चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजियान ने यह प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

झाओ ने कहा कि हम सरहद पर अपनी संप्रभुता, सुरक्षा के साथ-साथ स्थिरता को कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि हम चीन के साथ दशकों पुराने सीमा विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा रहे हैं।

दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर एक तंत्र विकसित किया है और उसके जरिये मसले का हल निकाला जा रहा है। इससे पहले भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश को ठुकरा चुका है।

भारत-चीन द्विपक्षीय वार्ता से सुलझाएं मुद्दा: ऑस्ट्रेलिया

भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख में तनातनी बनी हुई है। इस बीच ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त बैरी ओ फ्रेल ने चीन के गतिरोध पर कहा, भारत और चीन को द्विपक्षीय वार्ता के जरिये मुद्दे को सुलझाना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया या किसी अन्य देश को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत संबंधों पर एक जैसी मानसिकता वाले दो लोकतांत्रिक देशों का मिलकर काम करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार दक्षिण चीन सागर में बढ़ती चीन की मुखरता से चिंतित है और साथ ही चीन ने अपने नागरिकों के व्यापक विरोध के बावजूद हांगकांग में एक सुरक्षा कानून लागू करने की योजना बनाई है।

फ्रेल ने चार जून को पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मॉरिसन के बीच होने वाली वीडियो कांफ्रेंसिंग पर कहा कि इस द्विपक्षीय वार्ता का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना होगा।

चीन की घुसपैठ पर मोदी सरकार मौन क्यों : कांग्रेस

कांग्रेस ने चीनी सेना की भारतीय सीमा में घुसपैठ पर मोदी सरकार से पूछा है कि वह इस पर मौन क्यों बैठी है। उसने कहा कि सरकार ने हालात पर देश की जनता के साथ विवरण साझा क्यों नहीं किया। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि भारत की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। चीनी सेना भारतीय सीमा में घुसपैठ समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी हुई है।

उन्होंने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि चीनी सेना ने गलवान वैली और पैंगोंग झील इलाके में अतिक्रमण का दुस्साहस किया है। सुरजेवाला ने कहा है कि हालांकि सरकार ने इस संकट को कूटनीतिक तौर पर सुलझाने के संबंध में बयान दिया है, लेकिन सरकार को भारत-चीन सीमा पर पूर्व की स्थिति बहाल करने के बारे में देश के नागरिकों एवं सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहिए।

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