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Omicron Alert: ओमिक्रॉन संकट के बीच शुरू होगी बूस्टर डोज, वैक्सीन की 68 करोड़ खुराक के साथ ये है सरकार की तैयारी

Mon, 27 Dec 2021 06:16 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Mon, 27 Dec 2021 06:16 PM IST
सार

बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक साथ 14 करोड़ खुराक की अतिरिक्त जरूरत होगी। इसमें से बच्चों को केवल कोवैक्सीन दी जाएगी, जबकि बुजुर्गों को कोविशील्ड, कोवैक्सीन, स्पूतनिक वी या जायकोव-डी दी जा सकती है।

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Booster dose will start in the midst of Omicron Alert this is the governments preparation with 68 crore doses of Corona vaccine
कोरोना वैक्सीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ओमिक्रॉन संकट के बीच भारत में देश में 15 साल या इससे अधिक उम्र बच्चों के टीकाकरण की शुरुआत होने जा रही है। सरकार ने टीकाकरण की तैयारियां शुरु कर दी हैं। हालांकि, अभी भी लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या हमारे पास इस टीकाकरण महाअभियान को रफ्तार देने के लिए पर्याप्त वैक्सीन है या नहीं। एक सामान्य गणना से सामने आया कि भारत में कोविड-19 टीकों की 68 करोड़ से अधिक खुराक है जिसमें से मुख्य रूप से कोविशील्ड की डोज शामिल है। 

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इसमें 26 दिसंबर तक राज्यों के पास बिना उपयोग हुई 17.9 करोड़ खुराक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के पुणे संयंत्र में 50 करोड़ खुराक का भंडार भी शामिल है। 3 जनवरी से 15 वर्ष या इससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए टीकाकरण के लिए सरकार ने कहा है। आज देश में करीब 12 से 18 वर्ष के लगभग 12 करोड़ बच्चे हैं जबकि 18 वर्ष से कम उम्र के कुल 40 करोड़ बच्चे हैं। ऐसे में नए टीकों के उत्पादन की जरुरत कंपनियों को नहीं होगी।
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बच्चों और बुजुर्गों के लिए 14 करोड़ खुराक की अतिरिक्त मांग
देश में जहां तक बुजुर्गों को सुरक्षा के तौर पर वैक्सीन दिए जाने की बात है तो इसमें अन्य बीमारियों से ग्रस्त 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग लोग भी पात्र हैं। भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुसार, देश में 60 साल के ज्यादा के बुजुर्गों की संख्या 2021 में 13.8 करोड़ है। अगर हम इस आबादी के 50 प्रतिशत पर भी विचार करते हैं जिन्हें गंभीर रूप से कुछ बीमारी है तो इनमें से एक-तिहाई कोविड-19 टीके के पात्र हैं और यह संख्या मोटे तौर पर 7 करोड़ या इससे अधिक हो जाती है।
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बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक साथ 14 करोड़ खुराक की अतिरिक्त जरूरत होगी। इसमें से बच्चों को केवल कोवैक्सीन (जायकोव-डी नहीं) दी जाएगी, जबकि बुजुर्गों को कोविशील्ड, कोवैक्सीन, स्पूतनिक वी या जायकोव-डी दी जा सकती है। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दूसरी खुराक और बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त खुराक के बीच का अंतर कम से 9 महीने होने की संभावना है। इसलिए मांग धीरे-धीरे बढ़ेगी क्योंकि तब अधिक लोग पात्र होंगे।

एक माह में तैयार 8 करोड़ खुराक
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारत बायोटेक जनवरी से एक महीने में 8 करोड़ खुराक के एक बैच की शुरुआत कर रहा है जो मार्च-अप्रैल तक बाजार में उपलब्ध होगा। मार्च-अप्रैल तक बाजार में इसकी आपूर्ति होनी शुरू हो जाएगी। क्योंकि कोवैक्सीन को बनाने में 90 दिन या इससे थोड़े अधिक दिन लगते हैं और फिर संयंत्र में गुणवत्ता की जांच होती है जिसके बाद सरकारी प्रयोगशालाओं द्वारा प्रमाणन के बाद टीके बाजार में जारी किए जाते हैं।

इसके अलावा जायडस कैडिला के डीएनए प्लाज्मिड टीका, जायकोव-डी को अभी लॉन्च किया जाना है जिससे टीके की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। जायडस कैडिला फरवरी-मार्च से 1 करोड़ मासिक खुराक की आपूर्ति कर सकेगी। इस बीच सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बड़ी संख्या में कोविशील्ड की डोज बनाने से बचती हुई दिखाई दे रही है। 

दरअसल, कंपनी ने अपने टीके की कम मांग के चलते उत्पादन में आधी कटौती की है। कंपनी के पास 50 करोड़ खुराक का स्टॉक है जिसमें से 50 प्रतिशत थोक स्वरूप में है जिसे एक या दो महीने में तैयार फॉर्म्यूलेशन में बदला जा सकता है। कंपनी के पास अपनी साइट पर 60-70 करोड़ खुराक स्टोर करने की क्षमता है और इसी वजह से यह एक महीने में केवल 12 से 12.5 करोड़ खुराक बना रही है जबकि पहले यह 25 करोड़ खुराक मासिक आधार पर बना रही थी। कंपनी को जब तक सरकार की तरफ से कोई सूचना नहीं मिलती है तब तक वह उत्पादन बढ़ाने पर कोई विचार नहीं कर रही है।  


जल्द आएंगे नए टीके भी
इसके अलावा जल्द ही बाजार में अधिक टीके आने की उम्मीद है जिसमें कोवोवैक्स (एसआईआई), कोर्बेवैक्स (बायोलॉजिकल ई), इंट्रा-नैजल टीका बीबीवी 154 (भारत बायोटेक) शामिल है। बायोलॉजिकल ई में सालाना कोर्बेवैक्स की एक अरब खुराक बनाने की क्षमता है लेकिन टीके को अभी मंजूरी नहीं मिली है। जॉनसन एंड जॉनसन टीके के लिए हर साल 60 करोड़ खुराक बनाने की क्षमता है जिसके लिए बायोलॉजिकल ई ने विनिर्माण का अनुबंध किया है। हालांकि जेऐंडजे क्षतिपूर्ति से संबंधित कानूनी मुद्दों पर भारत सरकार के साथ विचार-विमर्श में लगा है। भारत बायोटेक का लक्ष्य बीबीवी 154 की 8 करोड़ खुराक प्रतिमाह या 1 अरब वार्षिक खुराक बनाने का है जो कि अब क्लीनिकल परीक्षण में शामिल है।

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