फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   book reveals that before Kalam there was deliberation on making Vajpayee President and Advani PM

अटल संस्मरण: कलाम से पहले वाजपेयी को राष्ट्रपति और आडवाणी को पीएम बनाने पर हुआ था मंथन, पुस्तक में बड़ा खुलासा

Thu, 18 Dec 2025 05:13 AM IST
लव गौर अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: लव गौर Updated Thu, 18 Dec 2025 05:13 AM IST
सार

अटल संस्मरण: पूर्व पीएम के मीडिया सलाहकार अशोक टंडन की पुस्तक में बड़ा खुलासा हुआ है। किताब में बताया गया है कि कलाम से पहले वाजपेयी को राष्ट्रपति और आडवाणी को पीएम बनाने पर मंथन हुआ था। हालांकि वाजपेयी ने प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा था कि इससे गलत मिसाल कायम होगी।

विज्ञापन
book reveals that before Kalam there was deliberation on making Vajpayee President and Advani PM
पूर्व पीएम के मीडिया सलाहकार अशोक टंडन की पुस्तक में खुलासा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी 2002 में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से पहले अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति बनाना चाहती थी और लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री। तब वाजपेयी ने भाजपा के उस प्रस्ताव को विनम्रतापूर्वक यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि बहुमत के आधार पर उन्हें राष्ट्रपति बनाए जाने से एक गलत मिसाल कायम होगी।
विज्ञापन


दिवंगत प्रधानमंत्री वाजपेयी के मीडिया सलाहकार अशोक टंडन ने अपनी पुस्तक अटल संस्मरण में इस बात का खुलासा किया है। टंडन ने अपनी पुस्तक में दावा किया है कि वाजपेयी ने पार्टी के उस प्रस्ताव को साफ अस्वीकार कर दिया था, जिसमें उन्हें राष्ट्रपति भवन भेजने और आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाए जाने की बात कही गई थी। आडवाणी तब अटल के बाद पार्टी में दूसरे नंबर के नेता थे।
विज्ञापन


टंडन के मुताबिक वाजपेयी इसके लिए तैयार नहीं थे। उनका मानना था कि किसी भी लोकप्रिय प्रधानमंत्री के लिए बहुमत के आधार पर राष्ट्रपति बनना भारतीय संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छा उदाहरण नहीं होगा। इससे एक गलत मिसाल कायम होगी और वे इस तरह के कदम का समर्थन करने वाले अंतिम व्यक्ति होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


अटल-आडवाणी में कुछ मुद्दों पर मतभेद फिर भी मधुर रिश्ते
टंडन ने पुस्तक में अटल-आडवाणी का जिक्र करते हुए लिखा है, कुछ नीतिगत मतभेदों के बावजूद दोनों के रिश्ते में कभी कड़वाहट नहीं आई। आडवाणी हमेशा वाजपेयी को अपना नेता और प्रेरणा स्रोत मानते थे। वहीं, वाजपेयी आडवाणी को अपना दृढ़ साथी। अटल और आडवाणी की साझेदारी भारतीय राजनीति में सहयोग और संतुलन का प्रतीक रही। टंडन के अनुसार, दोनों नेताओं ने न केवल भाजपा का निर्माण किया, बल्कि पार्टी और सरकार दोनों को नई दिशा दी।


ये भी पढ़ें: Diplomacy: एक साल में छह देशों की यात्रा, पीएम मोदी के नेतृत्व में अफ्रीका के साथ विकास व कूटनीति का नया युग

सोनिया ने संसद हमले के बाद वाजपेयी से पूछी थी खैरियत
अटल संस्मरण में इस बात का भी जिक्र है कि 13 दिसंबर, 2001 को संसद पर हुए आतंकी हमले का भी जिक्र किया है। तब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहीं सोनिया गांधी ने वाजपेयी से फोन पर बात की थी। हमले के वक्त वाजपेयी अपने आवास पर थे और सहयोगियों के साथ टीवी पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई देख रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed