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Ram Mandir: 22 जनवरी को छुट्टी के खिलाफ दायर याचिका हाईकोर्ट से खारिज, केरल कोर्ट के फैसले का दिया उदाहरण

Sun, 21 Jan 2024 01:58 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 21 Jan 2024 01:58 PM IST
सार

याचिका कानून के चार छात्रों ने लगाई थी। उनका कहना था कि राज्य सरकार द्वारा छुट्टी का एलान मनमाना है और सरकार को ऐसे छुट्टी का एलान करने का अधिकार नहीं है।

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bombay high court starts hearing on petition filled against holiday in maharashtra on 22 january ram mandir
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार द्वारा राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दिन यानी 22 जनवरी को सार्वजनिक छुट्टी का एलान करने के खिलाफ दायर याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। पीठ ने कहा कि विभिन्न धर्मों वाले देश में सार्वजनिक छुट्टी के इस फैसले से बल्कि धर्म निरपेक्षता का प्रसार होगा। पीठ ने कहा सरकार द्वारा विशेष मौकों पर सार्वजनिक छुट्टी करने के पहले भी कई उदाहरण हैं।  हाईकोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के एक फैसले का उदाहरण देते हुए कहा कि जब केरल में रमजान के दौरान छात्रों को छुट्टी देने के खिलाफ याचिका दायर हुई थी तो केरल हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था। केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं और रमजान के दौरान उन्हें छूट देने से संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 की आत्मा का उल्लंघन नहीं होता है। 
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क्या था याचिका में
यह याचिका कानून के चार छात्रों ने लगाई थी। उनका कहना है कि राज्य सरकार द्वारा छुट्टी का एलान मनमाना है और सरकार को ऐसे छुट्टी का एलान करने का अधिकार नहीं है। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की विशेष पीठ ने याचिका पर सुनवाई की थी। यह याचिका एमएलएनयू मुंबई, जीएलसी और NIRMA लॉ स्कूल के छात्रों ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि धार्मिक कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक छुट्टी का एलान करना संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का उल्लंघन है। याचिका के अनुसार, सरकार किसी धर्म विशेष को समर्थन या प्रोत्साहन नहीं दे सकती। 
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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसलों में धर्म निरपेक्षता को संविधान का मूल सिद्धांत माना है। सार्वजनिक छुट्टी का नोटिफिकेशन जारी करना संविधान मत के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं ने ये भी आरोप लगाया कि सार्वजनिक छुट्टी का नोटिफिकेशन 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक रूप से फायदा लेने के लिए जारी किया गया है।  
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