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बॉम्बे हाईकोर्ट: घर-घर जाकर टीकाकरण पर केंद्र और बीएमसी का रुख निराशाजनक और संवेदनहीन
Fri, 21 May 2021 02:32 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, मुंबई।
एजेंसी, मुंबई।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 21 May 2021 02:32 AM IST
सार
कोर्ट ने घर-घर जाकर टीकाकरण करने की नीति पर केंद्र सरकार से पुनर्विचार करने के लिए कहा
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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि घर-घर जाकर टीकाकरण करने की नीति पर केंद्र सरकार का रुख निराश करने वाला और संवेदनहीन है। बीएमसी भी उसी की राह पर है। दोनों का ध्यान वृद्धों और लाचारों की ओर नहीं है, जो टीका लगवाने के लिए टीकाकरण केंद्र पर नहीं जा सकते।
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मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायाधीश जीएस कुलकर्णी की पीठ ने कोरोना के टीकाकरण की प्रक्रिया के निर्धारण के लिए बने विशेषज्ञ दल के प्रमुख से कहा कि वह घर-घर जाकर टीकाकरण करने के मामले में केंद्र सरकार को सुझाव दें। इससे केंद्र सरकार उस पर निर्णय ले सकेगी। यह कार्य दो जून को होने वाली मामले की सुनवाई से पूर्व किया जाए।
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अभियान पर सकारात्मक फैसला हो तो आदेश का न करें इंतजार
विशेषज्ञ दल अगर अभियान को शुरू करने के लिए सकारात्मक फैसला लेता है तो फिर कोर्ट के आदेश की प्रतीक्षा किए बगैर अभियान शुरू किया जाए। अभी इस तरह के अभियान के खिलाफ विशेषज्ञ दल का तर्क है कि इससे बड़ी मात्रा में वैक्सीन की बर्बादी होगी। साथ ही, जिस व्यक्ति को वैक्सीन दी जाएगी, उस पर उसका तात्कालिक नकारात्मक असर देखने के लिए इंतजाम नहीं हो पाएगा।
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अभी वैक्सीन दिए जाने के बाद टीकाकरण केंद्र पर ही आधा घंटे तक व्यक्ति को बैठाकर उसका असर देखा जाता है। पीठ ने कहा कि जब ब्रिटेन में घर-घर जाकर टीकाकरण हो सकता है तो भारत में क्यों नहीं?
इससे पहले बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में केंद्र सरकार के दिशानिर्देश के बगैर घर-घर जाकर टीकाकरण करने पर अपने हाथ खड़े कर दिए थे जिस पर कोर्ट ने नाखुशी जाहिर की।