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बॉम्बे हाईकोर्ट का महाराष्ट्र सरकार को निर्देश: बीमार पिता को लिवर दान करने की किशोरी की याचिका पर आज फैसला करे सरकार
Wed, 04 May 2022 06:32 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 04 May 2022 06:32 AM IST
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि अपने लिवर (यकृत) के एक हिस्से को अपने अस्वस्थ पिता के लिए देने की मंजूरी मांग रही 16 साल की लड़की की याचिका पर 4 मई तक फैसला करें, क्योंकि उसके पिता की हालत गंभीर है।
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जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस माधव जामदार की खंडपीठ सोमवार को लड़की द्वारा उसकी मां के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। नाबालिग लड़की ने राज्य सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि उसे अपने अस्वस्थ पिता के लिए यकृत दान करने की अनुमति दी जाए।
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याचिका के अनुसार, लड़की के पिता को यकृत प्रतिरोपण की जरूरत है। उन्हें ‘लिवर सिरोसिस डिकंपनसेटिड’ बीमारी है। याचिका में कहा गया कि सभी करीबी रिश्तेदार अंगदान कर सकते थे, लेकिन लड़की के अलावा बाकी सभी चिकित्सकीय लिहाज से अंगदान के पात्र नहीं हैं।
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याचिकाकर्ता के वकील तपन थात्ते ने अदालत से कहा कि याची नाबालिग है, इसलिए वह अंग प्रतिरोपण अधिनियम के तहत स्थापित राज्य सरकार के उचित प्राधिकार की मंजूरी के बिना अपने यकृत का हिस्सा दान नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि 25 अप्रैल को इस संबंध में आवेदन किया गया था, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। सरकारी वकील पीपी काकाडे ने अदालत से कहा कि राज्य सरकार का संबंधित प्राधिकार आवेदन पर विचार करेगा।