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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- दावा छोड़ने के बाद भी पत्नी को गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार

Fri, 28 Dec 2018 12:21 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Gaurav Pandey Updated Fri, 28 Dec 2018 12:21 AM IST
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Bombay High Court said that wife has aright to ask for alimony even after leaving the claim

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के गुजारा भत्ता दावा छोड़ने पर सहमति जताने के बाद भी सीआरपीसी के तहत उसका यह अधिकार सुरक्षित रहता है। जस्टिस एमएस सोनक ने कहा कि पत्नी को गुजारा भत्ते का अधिकार दिलाने वाली सीआरपीसी की धारा-125 जनहित में लागू की गई थी।

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याचिका के मुताबिक, महाराष्ट्र के सांगली के पति-पत्नी ने 2012 में लोक अदालत में शादी खत्म करने की संयुक्त अर्जी दी थी। साथ ही दोनों ने गुजारा भत्ता का अधिकार छोड़ने पर लिखित सहमति दी थी। एक साल बाद पत्नी ने हिंदू विवाह कानून और सीआरपीसी के तहत पति से मासिक गुजारा भत्ता की मांग की। साथ ही दावा किया कि उससे सहमति पत्र पर धोखे से हस्ताक्षर कराए गए थे। 
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निचली व सत्र अदालत के पत्नी के पक्ष में फैसला देने के बाद पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने दलील दी कि पत्नी ने स्वेच्छा से गुजारा भत्ता का अधिकार छोड़ा था। जस्टिस सोनक ने कहा कि सीआरपीसी के तहत गुजारा भत्ता की व्यवस्था सार्वजनिक हित की योजना है, जिसे निजी सहमति पर वरीयता नहीं दी जा सकती। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि निजी सहमति के नियम अगर जनहित की योजना के विरुद्ध हैं तो उन्हें अवैध माना जाएगा।

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