फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bombay High Court said Married Woman Being Asked To Do Household Work does Not Mean Treated Like Maid Servant

Bombay High Court: विवाहिता को घर के काम के लिए कहना क्रूरता नहीं, पति और सास-ससुर पर दर्ज प्राथमिकी खारिज

Fri, 28 Oct 2022 05:55 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, मुंबई।
एजेंसी, मुंबई। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 28 Oct 2022 05:55 AM IST
सार

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला ने केवल यह कहा था कि उसे परेशान किया गया था, लेकिन उसने अपनी शिकायत में कोई निर्दिष्ट उत्पीड़न का जिक्र नहीं किया। पीठ ने कहा कि अगर उसे घर का काम करने की कोई इच्छा नहीं थी, तो उसे शादी से पहले ही बता देना चाहिए था, ताकि दूल्हा खुद शादी के बारे में फिर से सोच सके। 

विज्ञापन
Bombay High Court said Married Woman Being Asked To Do Household Work does Not Mean Treated Like Maid Servant
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने कहा कि अगर किसी विवाहित महिला को परिवार के लिए घर का काम करने के लिए कहा जाता है, तो इसे नौकरानी के जैसा कार्य नहीं समझा जाएगा और यह क्रूरता भी नहीं होगी। एक महिला द्वारा अपने अलग हुए पति व उसके माता-पिता के खिलाफ घरेलू हिंसा व क्रूरता के लिए दर्ज मामले को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने यह बात कही।

विज्ञापन


जस्टिस विभा कंकनवाड़ी व जस्टिस राजेश पाटिल की खंडपीठ ने 21 अक्तूबर को उस व्यक्ति और उसके माता-पिता के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज कर दिया। महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि शादी के बाद एक महीने तक उसके साथ अच्छा व्यवहार किया गया, लेकिन उसके बाद वे उसके साथ नौकरानी जैसा व्यवहार करने लगे।
विज्ञापन


उसने यह भी दावा किया कि उसके पति और उसके माता-पिता ने शादी के एक महीने बाद चार पहिया वाहन खरीदने के लिए चार लाख रुपये की मांग करना शुरू कर दिया। महिला ने अपनी शिकायत में कहा कि इस मांग को लेकर उसके पति ने उसका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


शिकायत में निर्दिष्ट उत्पीड़न का नहीं जिक्र
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला ने केवल यह कहा था कि उसे परेशान किया गया था, लेकिन उसने अपनी शिकायत में कोई निर्दिष्ट उत्पीड़न का जिक्र नहीं किया। पीठ ने कहा, अगर उसे घर का काम करने की कोई इच्छा नहीं थी, तो उसे शादी से पहले ही बता देना चाहिए था, ताकि दूल्हा खुद शादी के बारे में फिर से सोच सके। 

  • अगर शादी के बाद इस तरह की समस्या आ रही है, तो इसे पहले ही सुलझा लिया जाना चाहिए था। केवल मानसिक और शारीरिक रूप से उत्पीड़न शब्दों का उपयोग भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के लिए पर्याप्त नहीं है, जब तक कि इस तरह के कृत्यों का वर्णन नहीं किया गया हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed