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Bombay HC: ‘क्या लोगों को दफनाने के लिए मगंल ग्रह पर जाना चाहिए’, अदालत की टिप्पणी; जानें क्या है पूरा मामला

Mon, 10 Jun 2024 11:48 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 10 Jun 2024 11:48 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या लोगों को दफनाने के लिए मंगल ग्रह पर जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवंबर से अब तक बीएमसी कब्रिस्तान के लिए एक भूखंड नहीं ढूंढ पाई है। 

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Bombay High Court Comments Should we go to Mars to bury people court
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

 

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि एक मृत व्यक्ति का सम्मानजनक अंतिम संस्कार अन्य मौलिक अधिकारों की तरह ही महत्वपूर्ण है। सोमवार को अदालत ने पूर्वी मुंबई उपनगरों के लिए अतिरिक्त कब्रिस्तान की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या लोगों को दफनाने के लिए मंगल ग्रह पर जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवंबर से अब तक बीएमसी कब्रिस्तान के लिए एक भूखंड नहीं ढूंढ पाई है। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 21 जून को तय की है।

'अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते'
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने दो साल से अधिक समय से अतिरिक्त कब्रिस्तान उपलब्ध कराने में नाकाम रहने पर बीएमसी को फटकार लगाई। पीठ ने कहा कि नागरिक अधिकारी इस संबंध में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। अदालत ने कहा कि एक मृत व्यक्ति का सम्मानपूर्ण अंतिम संस्कार अन्य मौलिक अधिकारों की तरह ही महत्वपूर्ण है। 

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तीन स्थान कब्रिस्तान के लिए प्रस्तावित
याचिकाकर्ताओं का नाम- शमशेर अहमद, अबरार चौधरी और अब्दुल रहमान शाह है। याचिका में दावा किया गया है कि कब्रिस्तान के लिए तीन प्रस्तावित स्थान हैं - एक देवनार में मौजूदा मैदान के बगल में, दूसरा रफीक नगर (पूर्व में डंपिंग ग्राउंड) के पीछे, और तीसरा गोवंडी के अनिक गांव से लगभग आठ किमी दूर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) रिफाइनरी से सटा हुआ है। मामले में बीएमसी ने अदालत को बताया था कि देवनार मैदान और रफीक नगर क्षेत्र कब्रिस्तान के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

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