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Bombay High Court: जासूसी के आरोप में पकड़े गए ब्रह्मोस के पूर्व इंजीनियर को दी जमानत, लंबी कैद का दिया हवाला

Fri, 14 Apr 2023 04:43 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नागपुर।
पीटीआई, नागपुर। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 14 Apr 2023 04:43 PM IST
सार

न्यायमूर्ति अनिल किलोर की एकल पीठ ने तीन अप्रैल को उसे जमानत देते हुए यह टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया में यह बताने के लिए कोई सामग्री नहीं है कि अभियुक्त निशांत अग्रवाल द्वारा कथित कृत्य जानबूझकर किया गया था।

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Bombay HC grants bail to ex-BrahMos engineer held on spying charges cites long incarceration and trial delay
बॉम्बे हाईकोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के एक पूर्व इंजीनियर को जमानत दे दी। पूर्व इंजीनियर को 2018 में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी लगभग पांच साल से जेल में है और मामले की सुनवाई जल्द पूरी होने की संभावना नहीं है।

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न्यायमूर्ति अनिल किलोर की एकल पीठ ने तीन अप्रैल को आरोपी निशांत अग्रवाल को जमानत देते हुए यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चलता हो कि आरोपी ने कथित कृत्य जानबूझकर किया था। हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने अग्रवाल द्वारा जमानत की मांग वाली याचिका को इस आधार पर स्वीकार कर लिया कि मुकदमे में कोई प्रगति नहीं हुई है और आरोपी चार साल और छह महीने से जेल में है। पीठ ने आरोपी को 25,000 रुपये का निजी मुचलका भरने और मुकदमे के अंत तक सप्ताह में तीन बार नागपुर पुलिस स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया।
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नागपुर में कंपनी के मिसाइल केंद्र के तकनीकी अनुसंधान अनुभाग में कार्यरत अग्रवाल को अक्तूबर 2018 में मिलिट्री इंटेलिजेंस और उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र के आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) के एक संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया था। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व इंजीनियर पर भारतीय दंड संहिता और कड़े आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी अग्रवाल ने चार साल तक ब्रह्मोस एयरोस्पेस में काम किया था और उस पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) को संवेदनशील तकनीकी जानकारी लीक करने का आरोप है।
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ब्रह्मोस एयरोस्पेस, भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के मिलिट्री इंडस्ट्रियल कंसोर्टियम (NPO Mashinostroyenia) का एक संयुक्त उद्यम है। अग्रवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एसवी मनोहर और अधिवक्ता देवेन चौहान ने जमानत की सुनवाई के दौरान दलील दी थी कि ओएसए के प्रावधान उनके मुवक्किल के खिलाफ लागू नहीं होते हैं।

अदालत ने अपने जमानत आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला अवैध जासूसी गतिविधि में फंसाने के लिए अधिकारियों को लुभाने वाली हनी ट्रैप और साइबर गतिविधियों से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह अभियोजन पक्ष का मामला नहीं है कि अगर मूल रूप से उत्तराखंड के रुड़की के रहने वाले अग्रवाल को जमानत पर रिहा किया गया, तो राज्य की सुरक्षा को खतरा होगा। पीठ ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि पिछले नौ महीनों में मामले में केवल छह गवाहों की जांच की गई, जबकि 11 अन्य की गवाही होनी बाकी है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि ट्रायल जल्द समाप्त नहीं होगा।


न्यायमूर्ति किलोर ने कहा, मेरी राय है कि चूंकि आवेदक (अग्रवाल) काफी समय से जेल में है और निकट भविष्य में मुकदमा शुरू होने की कोई संभावना नहीं है, इस आधार पर आवेदक जमानत पाने का हकदार है। 

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