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पालघर लिंचिंग: सीबीआई जांच की मांग पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दो हफ्ते में जवाब मांगा
Fri, 01 May 2020 05:43 AM IST
Rajeev Rai
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Rajeev Rai
Updated Fri, 01 May 2020 05:43 AM IST
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Bombay Highcourt
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महाराष्ट्र के पालघर जिले में दो संतों की मॉब लिंचिंग के मामले की सीबीआई जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और मुआवजे की मांग वाली याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया है।
जस्टिस उज्ज्वल भुयान की एक सदस्यीय पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की याचिका पर नोटिस जारी कर राज्य सरकार और सीबीआई से दो हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका में इस मामले की जांच को सीआईडी से सीबीआई को सौंपने या फिर कोर्ट की निगरानी में जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने के निर्देश जारी करने की मांग की गई है। इसके अलावा पूरे मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में तय समय पर पूरी करने और मारे गए ड्राइवर के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने के निर्देशों की मांग की गई।
याचिका में कहा गया कि स्थानीय पुलिस पर कानून तोड़ने और हिंसा में साथ देने के गंभीर आरोप लगे हैं। ऐसे में यह न्याय के हित में है कि पूरे मामले की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। याचिका में यह भी मांग की गई कि राज्य सरकार को हिंसा में लिप्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दाखिल करने और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं। इस तरह की वारदात से समाज में गलत संदेश जाता है इसलिए यह कानून के हित में होगा कि इस मामले में सुनवाई समय से पूरी हो।
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जस्टिस उज्ज्वल भुयान की एक सदस्यीय पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की याचिका पर नोटिस जारी कर राज्य सरकार और सीबीआई से दो हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका में इस मामले की जांच को सीआईडी से सीबीआई को सौंपने या फिर कोर्ट की निगरानी में जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने के निर्देश जारी करने की मांग की गई है। इसके अलावा पूरे मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में तय समय पर पूरी करने और मारे गए ड्राइवर के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने के निर्देशों की मांग की गई।
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याचिका में कहा गया कि स्थानीय पुलिस पर कानून तोड़ने और हिंसा में साथ देने के गंभीर आरोप लगे हैं। ऐसे में यह न्याय के हित में है कि पूरे मामले की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। याचिका में यह भी मांग की गई कि राज्य सरकार को हिंसा में लिप्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दाखिल करने और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं। इस तरह की वारदात से समाज में गलत संदेश जाता है इसलिए यह कानून के हित में होगा कि इस मामले में सुनवाई समय से पूरी हो।
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