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Bofors case: सुप्रीम कोर्ट में बोफोर्स केस की जल्द सुनवाई की मांग, हाईकोर्ट ने खारिज कर दिए थे आरोप
Sat, 25 Dec 2021 04:47 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 25 Dec 2021 04:47 PM IST
सार
शीर्ष अदालत ने 2 नवंबर, 2018 को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका खारिज कर दी थी। इसके साथ ही कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील में सभी आधारों को उठा सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
64 करोड़ रुपये की रिश्वत से जुड़ा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बोफोर्स मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दायर कर दिल्ली हाईकोर्ट के 2005 के फैसले के खिलाफ दायर याचिका की जल्दी सुनवाई की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने हिंदुजा बंधुओं समेत सारे आरोप खारिज कर दिए थे।
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वकील अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने 2 नवंबर, 2018 को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका खारिज कर दी थी। इसके साथ ही कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील में सभी आधारों को उठा सकती है। अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 2005 में ही शीर्ष कोर्ट में अपील दायर कर दी थी। बोफोर्स घोटाला उजागर हुए 30 साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है।
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अग्रवाल द्वारा दायर अर्जी में कहा गया है कि न्याय हित में यह जरूरी है कि मामले की जल्द से जल्द सुनवाई हो। रक्षा क्षेत्र में घोटालों की इसलिए पुनरावृत्ति हुई है, क्योंकि बोफोर्स केस के आरोपियों को दंडित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2018 में शीर्ष कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने के बाद तीन साल बीत गए हैं, लेकिन मामले को सुनवाई के लिए अब तक सूचीबद्ध नहीं किया गया।
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2 नवंबर 2018 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की वह अर्जी खारिज कर दी थी, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के 31 मई 2005 के आदेश को चुनौती देने में 13 साल की देरी के लिए माफ करने का आग्रह किया गया था। शीर्ष कोर्ट ने अपने 2005 के आदेश में कहा था कि हम इस विशेष अनुमति याचिका में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने में 4,522 दिनों की अत्यधिक देरी के आधार से सहमत नहीं हैं।
हाईकोर्ट ने हिंदुजा बंधुओं व बोफोर्स कंपनी पर आरोप खारिज किए थे
हाईकोर्ट ने 2005 के अपने आदेश में तीनों हिंदुजा बंधुओं- एसपी हिंदुजा, जीपी हिंदुजा व पीपी हिंदुजा बंधुओं और बोफोर्स कंपनी के खिलाफ सारे आरोप खारिज कर दिए थे।
राजीव गांधी को दोषमुक्त कर बोफोर्स के खिलाफ केस का आदेश दिया था
दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 के उक्त फैसले से पहले 4 फरवरी, 2004 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को मामले में दोषमुक्त कर दिया था। इसके साथ ही बोफोर्स कंपनी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 465 के तहत जालसाजी का आरोप तय करने का निर्देश दिया था।
1437 करोड़ में खरीदी थी बोफोर्स तोपें
स्वीडिश हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स से भारतीय सेना के लिए 400 होवित्जर तोपों की खरीदी की गई थी। इसके लिए सरकार व बोफोर्स कंपनी ने 24 मार्च 1986 को 1,437 करोड़ रुपये का सौदा किया था। इसके बाद 16 अप्रैल 1987 को स्वीडिश रेडियो ने इस सौदे में भारतीय नेताओं व रक्षा अधिकारियों को रिश्वत दिए जाने का दावा किया था। बवाल मचने पर 22 जनवरी को 1990 को सीबीआई ने बोफोर्स के तत्कालीन प्रमुख मार्टिन अर्डोब, बिचौलिये विन चड्ढा व हिंदुजा बंधुओं के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।