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बोडोलैंड की मांग के लेकर फिर शुरू हुआ बोडो आंदोलन
ब्यूरो, अमर उजाला/ गुवाहाटी
Updated Tue, 25 Oct 2016 05:27 AM IST
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विभिन्न बोडो संगठनों ने अलग बोडोलैंड राज्य की मांग में सोमवार को असम के उदालगुड़ी में रेल रोको आंदोलन की अपील की। इसकी वजह से ट्रेन सेवाएं अस्त-व्यस्त हो गईं। इससे देश के बाकी हिस्सों से उत्तरी असम का रेल संपर्क कटा रहा। अखिल बोडो छात्र संघ (आब्सू), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) और पीपुल्स ज्वाइंट एक्शन कमिटी फार बोडोलैंड समेत विभिन्न संगठनों ने अलग राज्य की मांग में नए सिरे से आंदोलन का फैसला किया है।
रेल रोको आंदोलन के दौरान 20 हजार से ज्यादा लोग मौके पर पहुंच गए। वे ‘नो बोडोलैंड नो रेस्ट’ के नारे लगा रहे थे। उनका कहना था कि बोडो तबके के लोगों के साथ कोई भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर आब्सू अध्यक्ष प्रमोद बोडो ने केंद्र सरकार की कथित भेदभावपूर्ण नीति के लिए उसकी खिंचाई करते हुए कहा कि बोडो लोगों के खिलाफ कोई राजनीतिक साजिश अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र व अब राज्य की सत्ता में आने के बावजूद भाजपा के अच्छे दिन का नारा महज कागजी साबित हो रहा है। बोडो संगठनों का कहना है कि भाजपा से उम्मीद थी कि वह हमारी पांच दशक पुरानी मांग पर ध्यान देगी। लेकिन दूसरों की तरह वह भी राजनीतिक साजिश में जुटी है। ऐसे में हमारे सामने नए सिरे से आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
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रेल रोको आंदोलन के दौरान 20 हजार से ज्यादा लोग मौके पर पहुंच गए। वे ‘नो बोडोलैंड नो रेस्ट’ के नारे लगा रहे थे। उनका कहना था कि बोडो तबके के लोगों के साथ कोई भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर आब्सू अध्यक्ष प्रमोद बोडो ने केंद्र सरकार की कथित भेदभावपूर्ण नीति के लिए उसकी खिंचाई करते हुए कहा कि बोडो लोगों के खिलाफ कोई राजनीतिक साजिश अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि केंद्र व अब राज्य की सत्ता में आने के बावजूद भाजपा के अच्छे दिन का नारा महज कागजी साबित हो रहा है। बोडो संगठनों का कहना है कि भाजपा से उम्मीद थी कि वह हमारी पांच दशक पुरानी मांग पर ध्यान देगी। लेकिन दूसरों की तरह वह भी राजनीतिक साजिश में जुटी है। ऐसे में हमारे सामने नए सिरे से आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
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