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विदेश जाने वाले कालेधन पर लगेगी रोक
राजीव कुमार/ नई दिल्ली
Updated Sat, 31 Dec 2016 03:50 AM IST
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नोटबंदी के बाद से आयात के नाम पर चीन व अन्य देशों में हवाला के जरिए जाने वाले काले धन पर रोक लग गई है। गत 8 नवंबर को 1,000-500 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने के बाद आयातक किसी वस्तु को मंगाने पर अब उसकी पूरी कीमत का बिल ले रहे हैं। सरकार के सामने पूरी कीमत दिखाने की वजह से सरकार को आयात के बदले मिलने वाले शुल्क में भी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि आयातकों द्वारा आयात शुल्क अधिक चुकाने से वे घरेलू बाजार में उस वस्तु को अधिक कीमत पर बेच रहे हैं।
पहले चीन से कैसे आता था माल
चीन से सामान मंगाकर उसे घरेलू बाजार में बेचने वाले कारोबारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि नोटबंदी से पहले वे किसी आयातित वस्तु की सिर्फ 20-30 फीसदी कीमत ही सफेद तरीके से चुकाते थे और इतनी ही राशि का वे बिल लेते थे। बाकी की 70-80 फीसदी राशि वे हवाला के जरिए माल भेजने वाले चीनी कारोबारी को देते थे। अगर वह 100 रुपये का सामान लेते थे तो चीन से माल भेजने वाला कारोबारी उस माल के साथ मात्र 20 रुपये का बिल लगाता था।
भारत सरकार के समक्ष उस माल की कीमत मात्र 20 रुपये होती थी और उस 20 रुपये के हिसाब से ही आयातक को शुल्क देना पड़ता था। आयातक बाकी के 80 रुपये अपने काले धन में से भारत में किसी हवाला कारोबारी को दे देता था और वह हवाला कारोबारी अपने संपर्कों से चीन में बैठे माल भेजने वाले कारोबारी तक पहुंचा देता था।
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हवाला कारोबारी लेता था 2-3 फीसदी का शुल्क
चीन के कारोबारी तक धन पहुंचाने के बदले में हवाला कारोबारी भारतीय आयातक से अधिकतम 2-3 फीसदी का शुल्क लेता था। चीन से माल आयात करने वाले कारोबारियों ने बताया कि 8 नवंबर के बाद से इस प्रकार से आयात का काम लगभग ठप हो गया है।
अब ले रहे हैं पूरा बिल
कारोबारियों ने बताया कि अब वे जो भी सामान चीन से मंगा रहे हैं उसका पूरा बिल सरकार के सामने दिखा रहे हैं। हालांकि अब भी हवाला के माध्यम से माल मंगाने का काम किया जा रहा है। लेकिन अब हवाला कारोबारी इसके बदले 20 फीसदी का शुल्क ले रहा है।
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पहले चीन से कैसे आता था माल
चीन से सामान मंगाकर उसे घरेलू बाजार में बेचने वाले कारोबारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि नोटबंदी से पहले वे किसी आयातित वस्तु की सिर्फ 20-30 फीसदी कीमत ही सफेद तरीके से चुकाते थे और इतनी ही राशि का वे बिल लेते थे। बाकी की 70-80 फीसदी राशि वे हवाला के जरिए माल भेजने वाले चीनी कारोबारी को देते थे। अगर वह 100 रुपये का सामान लेते थे तो चीन से माल भेजने वाला कारोबारी उस माल के साथ मात्र 20 रुपये का बिल लगाता था।
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भारत सरकार के समक्ष उस माल की कीमत मात्र 20 रुपये होती थी और उस 20 रुपये के हिसाब से ही आयातक को शुल्क देना पड़ता था। आयातक बाकी के 80 रुपये अपने काले धन में से भारत में किसी हवाला कारोबारी को दे देता था और वह हवाला कारोबारी अपने संपर्कों से चीन में बैठे माल भेजने वाले कारोबारी तक पहुंचा देता था।
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हवाला कारोबारी लेता था 2-3 फीसदी का शुल्क
चीन के कारोबारी तक धन पहुंचाने के बदले में हवाला कारोबारी भारतीय आयातक से अधिकतम 2-3 फीसदी का शुल्क लेता था। चीन से माल आयात करने वाले कारोबारियों ने बताया कि 8 नवंबर के बाद से इस प्रकार से आयात का काम लगभग ठप हो गया है।
अब ले रहे हैं पूरा बिल
कारोबारियों ने बताया कि अब वे जो भी सामान चीन से मंगा रहे हैं उसका पूरा बिल सरकार के सामने दिखा रहे हैं। हालांकि अब भी हवाला के माध्यम से माल मंगाने का काम किया जा रहा है। लेकिन अब हवाला कारोबारी इसके बदले 20 फीसदी का शुल्क ले रहा है।