कर्नाटक: इन 20 लिंगायत विधायकों से भाजपा को है उम्मीद, लगाएंगे येदियुरप्पा की नैया पार?
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार शनिवार शाम को 4 बजे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को सदन में अपना बहुमत साबित करना है। यदि वह ऐसा नहीं कर पाए तो कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन को सरकार बनाने का मौका मिल जाएगा और येदियुरप्पा को पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। भाजपा इस तरह की परिस्थिति से बचना चाहती है इसलिए अब उसकी नजरें 20 लिंगायत विधायकों पर हैं। जिनमें कांग्रेस के पास 18 तो जेडीएस के पास 2 लिंगायत विधायक हैं। शनिवार को होने वाले शक्ति परीक्षण में भाजपा को उम्मीद है कि यह विधायक भाजपा के पक्ष में वोट कर सकते हैं।
भाजपा को लगता है कि अपने राजनीतिक भविष्य और समुदाय की नाराजगी से बचने के लिए विधायक येदियुरप्पा का समर्थन कर सकते हैं। भाजपा के अंदरुनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी कुछ लिंगायतों को लुभाने की कोशिश कर रही है। सूत्र का दावा है कि समुदाय के अंदर कांग्रेस की उन्हें बांटने वाली नीतियों के खिलाफ गहरा असंतोष है।
भाजपा के एक विधायक ने कहा, 'लिंगायत विधायक कांग्रेस से उनके समाज को बांटने की वजह से नाराज हैं। अब वह ज्यादा नाराज इसलिए हैं क्योंकि पार्टी जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती है। इसे एंटी-लिंगायत के तौर पर देखा जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात लिंगायत विधायक इस बात के लिए खुद को दोषी नहीं ठहराना चाहते कि उन्होंने एक ऐसे लिंगायत सीएम का समर्थन नहीं किया जिसे समुदाय अपना नेता मानता है।'
विधायक ने आगे कहा सीएम के तौर पर शपथ लेने के बाद येदियुरप्पा ने सभी विधायकों से अपील की थी कि वह अपने विवेक के अनुसार बहुमत सिद्ध करने के दौरान वोट दें। इसका मकसद विपक्षी कैंप के लिंगायत विधायकों को लुभाना था।