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BJP: क्या बीजेपी कार्यकर्ताओं के मन की बात सुन रहे मोदी-शाह, नीतीश कुमार पर दिख रहा मतभेद

Sun, 28 Jan 2024 01:24 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 28 Jan 2024 01:24 PM IST
सार

आज जब नीतीश कुमार एक बार फिर भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने जा रहे हैं, भाजपा के शीर्ष नेता खुश हैं। वे इसे अपनी जीत के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन पार्टी के आम कार्यकर्ता हतप्रभ हैं। उन्हें लग रहा है कि यह निर्णय सही नहीं है। अब एक बार फिर उनकी मेहनत के बूते नीतीश कुमार सत्ता के शिखर पर विराजमान रहेंगे और उनकी अपनी कोई पहचान नहीं होगी।

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BJP workers demands JDU RJD Nitish Kumar Narendra Modi Amit Shah NDA Alliance news and updates
अमित शाह और नीतीश कुमार (फाइल फोटो) - फोटो : social media

विस्तार

2022 में जब अचानक नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़ लालू यादव के साथ सरकार बनाने का निर्णय किया था, भाजपा के शीर्ष नेता सन्न रह गए थे। उन्हें इस घटना पर जवाब नहीं सूझ रहा था। 2024 के लोकसभा चुनाव पर नीतीश के उस निर्णय का असर भांपते हुए उनके चेहरे तमतमाये हुए थे। लेकिन केंद्रीय नेताओं से ठीक उलट भाजपा का आम कार्यकर्ता इस घटना से बेहद खुश था। बिहार से लेकर दिल्ली तक, भाजपा के तमाम कार्यकर्ताओं का यह मानना था कि अब पार्टी को बिहार में अपने बूते खड़ा होने का अवसर मिलेगा। पार्टी कार्यकर्ता मान रहे थे कि चाहे इसके कारण पार्टी को एक-दो चुनाव में हार का ही सामना करना पड़े, लेकिन राज्य में उनकी अपनी पहचान होगी, अपना आत्मसम्मान होगा। इन कार्यकर्ताओं का विश्वास था कि चाहे उन्हें फौरी तौर पर नीतीश के फैसले के कारण नुकसान उठाना पड़े, लेकिन जल्द ही वे अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में आ जाएंगे। 
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भाजपा कार्यकर्ताओं के इस मनोभाव को पार्टी के शीर्ष नेता भी समझ रहे थे। यही कारण था कि अमित शाह ने यह एलान कर दिया कि नीतीश कुमार के लिए अब पार्टी के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने दावा किया कि युवा अब नीतीश-लालू युग के आगे देखना चाहता है। वे जगह-जगह रैली-सभाएं कर पार्टी की नींव मजबूत करने लगे जिससे चुनाव में पार्टी को अकेले दम पर बहुमत दिलाया जा सके।
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कार्यकर्ता पूछ रहे सवाल
आज जब नीतीश कुमार एक बार फिर भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने जा रहे हैं, भाजपा के शीर्ष नेता खुश हैं। वे इसे अपनी जीत के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन पार्टी के आम कार्यकर्ता हतप्रभ हैं। उन्हें लग रहा है कि यह निर्णय सही नहीं है। अब एक बार फिर उनकी मेहनत के बूते नीतीश कुमार सत्ता के शिखर पर विराजमान रहेंगे और उनकी अपनी कोई पहचान नहीं होगी। उन्हें लगता है कि पार्टी को मजबूत करने का एक अवसर हाथ से गंवा दिया गया है।  
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अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार, बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने आम कार्यकर्ताओं के मन की यह बात पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दिया है। पहले दिल्ली में अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ हुई अपनी मुलाकात में, और बाद में पटना में पार्टी विधायक दल की बैठक के दौरान भी पार्टी नेतृत्व को यह बता दिया गया है। पार्टी कार्यकर्ता केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय को स्वीकार करेंगे, लेकिन उन्होंने अपनी नाराजगी केंद्र के नेताओं तक पहुंचा दी है।     

'बड़ा संदेश देना उद्देश्य'
क्या भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुन रहा है? अमर उजाला के इस प्रश्न पर भाजपा के एक केंद्रीय पदाधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सदैव आम कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर ही पार्टी की रणनीति बनाते हैं। सचाई यह है कि 400 सीटों के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पार्टी किसी भी राज्य में सीटों को कम करने का जोखिम नहीं उठा रही है। 


नीतीश कुमार के अलग रहने से भाजपा लगभग 30 सीटों पर जीत सकती थी, लेकिन इसे 39-40 सीटों तक पहुंचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ रखना ही बेहतर समझा गया। उन्होंने कहा कि पार्टी के आम कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बिहार में पार्टी को मजबूत करने की हर संभव कोशिश की जाएगी। 
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