बंगाल की सीख: राज्यों में चेहरा घोषित कर भाजपा लड़ेगी चुनाव! पीएम मोदी का चेहरा बचाकर रखने की रणनीति

Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 30 Jul 2021 07:19 PM IST

सार

भाजपा को लग रहा है कि अगर दूसरे चुनावी राज्यों में भी बंगाल की तरह परिणाम आए, तो इससे प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान होगा। इससे 2024 आम चुनाव में पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। लिहाजा अब वह प्रधानमंत्री की छवि को बचाकर हर चुनाव में उतरेगी...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुखौटा पहने कार्यकर्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुखौटा पहने कार्यकर्ता - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में जब से सत्ता संभाली है, वे भाजपा की चुनावी राजनीति के केंद्र में रहे हैं। तब से लोकसभा का चुनाव रहा हो या किसी राज्य की विधानसभा का चुनाव, भाजपा ने अपना पूरा चुनावी अभियान प्रधानमंत्री को केंद्र में रखकर ही आगे बढ़ाया। इसका उसे कई जगहों पर लाभ हुआ, तो कहीं इसका कोई असर नहीं हुआ। लेकिन खबर है कि भाजपा अब इस फॉर्मूले से अलग हटकर चुनावी राज्यों में मुख्यमंत्री के चेहरे घोषित कर मैदान में उतरेगी। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को चेहरा घोषित किया जा चुका है तो उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चुनाव लड़े जाने की संभावना है। इसी प्रकार पंजाब में एक दलित चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर पार्टी चुनावी मैदान में उतर सकती है।
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माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को ममता बनर्जी के हाथों मिली करारी हार ने पार्टी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार के लिए बाध्य कर दिया है। जहां बंगाल चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही लड़ा गया, लेकिन इसके बाद भी भाजपा सौ के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। इससे प्रधानमंत्री की जिताऊ नेता वाली छवि को गहरा धक्का लगा।


ध्यान रहे कि इसी प्रकार इसके पहले दिल्ली, बिहार और कर्नाटक में भी भाजपा ने प्रधानमंत्री के चेहरे को आगे रखकर ही अपना प्रचार अभियान आगे बढ़ाया था, लेकिन इन सभी राज्यों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा।

भाजपा को लग रहा है कि अगर इसी प्रकार कुछ और राज्यों में प्रधानमंत्री मोदी को आगे रखकर पूरा चुनावी अभियान चलाया गया, और पार्टी को इन राज्यों में हार का सामना करना पड़ा, तो इससे प्रधानमंत्री की जिताऊ वाली छवि को गहरा धक्का लग सकता है। इससे ममता बनर्जी की तरह और भी छत्रप प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए नजर आ सकते हैं। इससे पार्टी को 2024 में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही कारण है कि भाजपा अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख बचाकर चलना चाहती है।

सीएम बने चेहरा, इसलिए नए चेहरे की जरूरत नहीं

भाजपा नेता अभिजात मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि 2017 में भाजपा ने चेहरा घोषित कर उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। लेकिन इस बार भाजपा के पास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसा मजबूत चेहरा है। राज्य में कड़ा प्रशासन देकर, आतंकवाद पर लगाम लगाकर और जनता के कार्य कर वे एक ब्रांड बन चुके हैं। लिहाजा पार्टी ने उनके नेतृत्व में चुनाव में उतरने का फैसला किया है।

प्रधानमंत्री के नाम पर लड़ा, लेकिन हारे

भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्वस्त जिताऊ चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट करती रही है, लेकिन असलियत यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर उसे कहीं पर जीत तो कहीं हार मिली है। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 और 2020 में भाजपा ने अपना पूरा चुनावी अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर ही लड़ा, लेकिन दोनों ही बार उसे अरविंद केजरीवाल के हाथों यहां करारी हार का सामना करना पड़ा।

इसी प्रकार बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में भी नरेंद्र मोदी की जिताऊ छवि कोई करिश्मा नहीं दिखा सकी थी, जबकि उस समय वे अपनी लोकप्रियता के शिखर पर थे। चुनाव में भाजपा को जेडीयू और आरजेडी महागठबंधन के सामने करारी हार का सामना करना पड़ा था। (हालांकि, बाद में जेडीयू ने भाजपा के साथ हाथ मिला लिया और भाजपा सहयोगी दल की भूमिका में सरकार में आ गई।)

वर्तमान मुख्यमंत्री के चेहरे भी नहीं रहे जिताऊ

इस बार पांच चुनावी राज्यों में से पंजाब को छोड़कर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा की सरकारें हैं। संभावना है कि भाजपा इन राज्यों में वर्तमान मुख्यमंत्री के चहरों पर चुनाव लड़ सकती है। लेकिन भाजपा की यह रणनीति उसे कभी लाभ तो कभी नुकसान पहुंचाती रही है।

भाजपा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अपने तत्कालीन समय में सत्तारूढ़ मुख्यमंत्रियों के चेहरों पर ही चुनावी मैदान में उतरी थी, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा। शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह और वसुंधराराजे सिंधिया जैसे चेहरे उसे चुनावी जीत नहीं दिला सके। (हालांकि बाद में उलटफेर के सहारे भाजपा ने मध्यप्रदेश में दोबारा सत्ता हथिया ली।) हालांकि, इसके पहले वे भाजपा के मजबूत जिताऊ चेहरे रह चुके थे।

जिन राज्यों में चुनाव पूर्व भाजपा की सरकारें नहीं थीं, वहां पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ही पूरा चुनावी अभियान आगे बढ़ाया। कई जगहों पर उसे इसका लाभ भी हुआ। उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की छवि के कारण ही भाजपा को 300 से ज्यादा सीटें मिली थीं। असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में जहां भाजपा का बड़ा जनाधार नहीं था, भाजपा को इसका लाभ मिला और इन राज्यों में उसकी सरकार बन गई।

हरियाणा और उत्तराखंड का चुनाव प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ही लड़ा गया और भाजपा को यहां इसका लाभ मिला। लेकिन कर्नाटक और झारखंड में पार्टी का यह दांव उलटा पड़ा। हिमाचल प्रदेश में प्रेम कुमार धूमल को चेहरा घोषित कर भाजपा ने चुनाव लड़ा, जहां पार्टी तो जीत गई, लेकिन खुद धूमल अपना चुनाव हार गए।
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