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Maharashtra: चुनाव से पहले 'महायुति' में तकरार? शरद गुट का दावा- गठबंधन से अजित पवार को बाहर कर रही भाजपा
Wed, 17 Jul 2024 09:39 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 17 Jul 2024 09:39 PM IST
सार
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की तरफ से तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। इस कड़ी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने दावा किया है कि भाजपा महायुति गठबंधन से अजित पवार को बाहर कर रही है।
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चुनाव से पहले 'महायुति' में तकरार?
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां सभी पार्टियों की तरफ से किए जा रहे हैं। वहीं इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने बुधवार को आरएसएस से जुड़े मराठी साप्ताहिक में छपी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ 'महायुति' गठबंधन को छोड़ने के लिए उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को संदेश भेज रही है।
लोकसभा चुनावों में भाजपा का खराब प्रदर्शन
दरअसल साप्ताहिक 'विवेक' की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 में एनसीपी के साथ गठबंधन के बाद जनता की भावनाएं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ हो गई हैं, जिसके कारण हाल ही में महाराष्ट्र में हुए लोकसभा चुनावों में भगवा पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा। वहीं इस मामले में पत्रकारों से बात करते हुए एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने कहा कि लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद भाजपा महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनको लगता है कि अजीत पवार के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ गठबंधन उसकी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाएगा।
'जनता ने एनसीपी (सपा) के पक्ष में किया मतदान'
एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता ने दावा किया कि, वास्तविकता यह है कि महाराष्ट्र के लोगों ने बड़े पैमाने पर एनसीपी (सपा) के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि भाजपा भी पूरे मामले में सावधानी से काम कर रही है, क्योंकि वह चुनाव जीतना चाहती है। लेकिन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ उसका गठबंधन उन्हें चुनाव हारने पर मजबूर कर देगा, जैसे कि लोकसभा चुनाव में हुआ था। साप्ताहिक (विवेक) में छपा लेख उन तरीकों में से एक है, जिससे भाजपा अजित पवार से खुद को दूर करने की कोशिश कर रही है और शायद किसी न किसी तरह से उन्हें (महायुति) छोड़ने के लिए कह रहे हैं।
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'राज्य ने महायुति गठबंधन को नहीं किया स्वीकार'
एनसीपी (सपा) प्रवक्ता ने कहा कि आरएसएस से जुड़े प्रकाशन ने कुछ सप्ताह पहले भी इसी तरह की सामग्री वाला एक और लेख लिखा था। क्रैस्टो ने तर्क दिया कि महाराष्ट्र के मतदाताओं ने भाजपा के एनसीपी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन को स्वीकार नहीं किया है।
लोकसभा चुनाव में दोनों गठबंधनों का प्रदर्शन
महाराष्ट्र में भाजपा की सीटों की संख्या 2019 में 23 से घटकर हाल के लोकसभा चुनावों में सिर्फ नौ रह गई। वहीं उसकी सहयोगी शिवसेना ने सात सीटें हासिल की और डिप्टी सीएम अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल हुई। इसके विपरीत विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए), जिसमें शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस शामिल हैं, ने शानदार प्रदर्शन किया और 48 में से 30 सीटें जीतीं।
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लोकसभा चुनावों में भाजपा का खराब प्रदर्शन
दरअसल साप्ताहिक 'विवेक' की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 में एनसीपी के साथ गठबंधन के बाद जनता की भावनाएं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ हो गई हैं, जिसके कारण हाल ही में महाराष्ट्र में हुए लोकसभा चुनावों में भगवा पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा। वहीं इस मामले में पत्रकारों से बात करते हुए एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने कहा कि लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद भाजपा महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनको लगता है कि अजीत पवार के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ गठबंधन उसकी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाएगा।
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'जनता ने एनसीपी (सपा) के पक्ष में किया मतदान'
एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता ने दावा किया कि, वास्तविकता यह है कि महाराष्ट्र के लोगों ने बड़े पैमाने पर एनसीपी (सपा) के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि भाजपा भी पूरे मामले में सावधानी से काम कर रही है, क्योंकि वह चुनाव जीतना चाहती है। लेकिन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ उसका गठबंधन उन्हें चुनाव हारने पर मजबूर कर देगा, जैसे कि लोकसभा चुनाव में हुआ था। साप्ताहिक (विवेक) में छपा लेख उन तरीकों में से एक है, जिससे भाजपा अजित पवार से खुद को दूर करने की कोशिश कर रही है और शायद किसी न किसी तरह से उन्हें (महायुति) छोड़ने के लिए कह रहे हैं।
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'राज्य ने महायुति गठबंधन को नहीं किया स्वीकार'
एनसीपी (सपा) प्रवक्ता ने कहा कि आरएसएस से जुड़े प्रकाशन ने कुछ सप्ताह पहले भी इसी तरह की सामग्री वाला एक और लेख लिखा था। क्रैस्टो ने तर्क दिया कि महाराष्ट्र के मतदाताओं ने भाजपा के एनसीपी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन को स्वीकार नहीं किया है।
लोकसभा चुनाव में दोनों गठबंधनों का प्रदर्शन
महाराष्ट्र में भाजपा की सीटों की संख्या 2019 में 23 से घटकर हाल के लोकसभा चुनावों में सिर्फ नौ रह गई। वहीं उसकी सहयोगी शिवसेना ने सात सीटें हासिल की और डिप्टी सीएम अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल हुई। इसके विपरीत विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए), जिसमें शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस शामिल हैं, ने शानदार प्रदर्शन किया और 48 में से 30 सीटें जीतीं।