BJP State President: भाजपा के 12 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष ABVP की पृष्ठभूमि से, अब यूपी पर टिकीं सबकी निगाहें
BJP State President: चित्रकूट में 29 से 31 जुलाई तक तीन दिन चलने वाले प्रशिक्षण वर्ग शिविर में राष्ट्रीय अध्यक्ष, संगठन मंत्री और सीएम योगी के साथ मंत्रियों को भी बुलाया गया है। सूत्रों का दावा है कि यूपी के नए अध्यक्ष की घोषणा प्रशिक्षण वर्ग शिविर में हो सकती है...
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उत्तराखंड प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष में बदलाव हो चुका है। कयास अब उत्तर प्रदेश संगठन में बदलाव के लगने लगे हैं। देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की कमान किसी ऐसे चेहरे को दी जा सकती है, जो भाजपा का तो ही, लेकिन उसमें अक्स अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का भी दिखाई देता हो। बीते सालों से भाजपा में संगठन स्तर पर संघ के छात्र संगठन एबीपीवी का वर्चस्व और प्रभाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। करीब 12 राज्यों में संगठन की कमान उन नेताओं को सौंपी गई है, जो पहले एबीपीवी में काम कर चुके हैं। पार्टी भविष्य के लिए तैयार हो रही है और आगे की सोच रखते हुए युवा चेहरों को मौका दे रही है। भाजपा पर बारिकी से नजर रखने वाले कह रहे हैं कि पार्टी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की पृष्ठभूमि एबीपीवी से होना युवा होती भाजपा और छात्र संगठन के बढ़ते मौके की एक प्रमुख वजह हो सकती है।
अभी 12 राज्यों के कमान एबीपीवी के पृष्ठभूमि वाले नेताओं के पास
भाजपा के 12 राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों की पृष्ठभूमि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की रही है। इनमें दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता, मध्यप्रदेश प्रदेश अध्यक्ष वी.डी.शर्मा, महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल, कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कातिल, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़, राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, तेलंगाना के प्रदेश अध्यक्ष बंडी संजय कुमार, पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी कुमार शर्मा, बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुकांत मजूमदार और चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष अरुण सूद शामिल हैं। वहीं शनिवार को भाजपा ने उत्तराखंड के पूर्व विधायक महेंद्र भट्ट को प्रदेश की कमान सौंपी है। भट्ट भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में प्रदेश सह मंत्री रह चुके हैं।
अमर उजाला से चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर कहते हैं कि संगठन की दृष्टि से जो व्यक्ति पार्टी को योग्य लगता है, पार्टी उसे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देती है। लेकिन इन दिनों यह जरूर देखने को मिल रहा है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि से जुड़े नेताओं को पार्टी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा रही है। आज जितने भी एबीवीपी के नेता रहे हैं वह आज भाजपा में बड़े पदों पर नजर आ रहे हैं। कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष आज एबीपीवी के बैकग्राउंड से ही हैं। यह स्वभाविक है कि जो नेता प्रदेश अध्यक्ष बन रहे या जो भाजपा में आते हैं उनका बैकग्राउंड छात्र संगठन का रहता है। लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि जो एबीवीपी का होगा उसे ही प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाए। भाजपा तमाम प्रकार के फीडबैक जिसमें केंद्रीय नेतृत्व का आकलन, संघ की राय और स्थानीय संगठन के संदेश को ध्यान में रखकर पार्टी योग्य व्यक्ति का चयन प्रदेश अध्यक्ष के लिए करती है। इसमें वह एबीपीवी की पृष्ठभूमि से आता हो या नहीं यह बिल्कुल मायने नहीं रखता। जो भी नेता प्रदेश अध्यक्ष बनेगा वह या तो विधायक, सांसद या संगठन के किसी अहम जिम्मेदारी पर होता है। इसके बाद उसे यह अहम जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
31 जुलाई के बाद यूपी को मिल सकता है नया प्रदेश अध्यक्ष
चित्रकूट में 29 से 31 जुलाई तक तीन दिन चलने वाले प्रशिक्षण वर्ग शिविर में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन मंत्री बी.एल संतोष और सीएम योगी के साथ ही मंत्रियों को भी बुलाया गया है। मतलब साफ है कि सरकार और संगठन दोनों एक मंच पर रहेंगे। यूपी भाजपा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि नेतृत्व ने यूपी का नया अध्यक्ष चुन लिया है। प्रशिक्षण वर्ग शिविर में इसकी घोषणा हो सकती है। वर्तमान अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का तीन साल कार्यकाल पूरा हो गया है। यूपी विधानसभा 2022 में भाजपा की धमाकेदार जीत का इनाम प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को कैबिनेट मंत्री के रूप में मिल चुका है। पार्टी के एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के तहत अब सूबे में प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी बदलाव होना है।
2024 में लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी इस बार संगठन की कमान किसी ब्राह्मण चेहरे को सौंप सकती है। यूपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए ब्राह्मण नेताओं में पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, कन्नौज के सांसद एवं प्रदेश महामंत्री सुब्रत पाठक, हरीश द्विवेदी, दिनेश उपाध्याय, गोविंद नारायण शुक्ला और ब्रज बहादुर शर्मा प्रमुख दावेदार हैं। इस बीच चर्चा है कि दलित चेहरे को लेकर विचार किया जा सकता है। पार्टी के सूत्र बताते हैं इस बार जिस तरीके से बसपा को जाटव वोट बैंक भाजपा में पड़ा है। उसे बनाए रखने के लिए किसी दलित चेहरे को यूपी की कमान सौंपी जा सकती है। सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया, केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर, सांसद विनोद सोनकर शामिल हैं। ओबीसी से तीन केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, भूपेंद्र चौधरी और संजीव बालियान दौड़ में हैं।