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भाजपा बताए चुनाव में खर्च के लिए 27 हजार करोड़ रुपए कहां से लाई: कांग्रेस
Sat, 08 Jun 2019 02:25 AM IST
योगेश साहू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश साहू
Updated Sat, 08 Jun 2019 02:25 AM IST
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कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी
- फोटो : ANI
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कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर धन बल से लोकसभा चुनाव जीतने का आरोप लगाया है। शुक्रवार को पार्टी के नई दिल्ली स्थिति मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भाजपा पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हाल में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 27 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। भाजपा को बताना चाहिए कि यह पैसा उसके पास कहां से आया।
सिर्फ इतना ही नहीं सिंघवी ने तेलंगाना में 12 कांग्रेस विधायकों के तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में शामिल होने को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने इसकी निंदा करते हुए कहा कि पिछले एक साल से राज्य में 'सीधी खरीद' की राजनीतिक नीति अपनाई जा रही है, ये दुर्भाग्यपूर्ण है।
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कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के अनुसार लोकसभा चुनाव में करीब 60 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, जिनमें से भाजपा का खर्च 45 फीसदी रहा है और बाकी 55 प्रतिशत अन्य सभी दलों ने खर्च किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावी बॉन्ड योजना अपने फायदे के लिए शुरू की। चुनाव में अनाप-शनाप खर्च से बचने के लिए राष्ट्रीय चुनाव निधि का गठन किया जाना चाहिए। इसमें जमा निधि का वितरण चुनाव के समय मान्यता प्राप्त दलों को किया जाना चाहिए। यह योजना चुनाव में अनावश्यक पैसा खर्च करने से बचने के लिए सबसे पारदर्शी कदम साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए 27 हजार करोड़ रुपए लुटाए और 437 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। इस आंकड़े के अनुसार हिसाब लगाने से साफ है कि भाजपा ने लोकसभा की एक सीट पर करीब 62 करोड़ रुपए खर्च किए।
सिंघवी ने कहा कि भाजपा का चुनावी खर्च मोदी सरकार द्वारा नमामि गंगे परियोजना पर पांच साल में खर्च हुए 24 हजार करोड़ रुपए से से ज्यादा है। पार्टी ने जितना पैसा इस चुनाव में खर्च किया वह देश के शिक्षा बजट के 30 प्रतिशत, रक्षा बजट का 10 प्रतिशत, स्वास्थ्य बजट का 43 प्रतिशत और महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना मनरेगा के बजट का 45 फीसदी के बराबर है। इस तरह से 1998 के बाद से अब तक हुए लोकसभा चुनावों में इस बार चुनाव खर्च छह गुना ज्यादा हुआ है।
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BJP should explain the source of the humongous Rs 27,000 crores spent by it in the recently concluded Lok Sabha elections, asks @DrAMSinghvi, RS MP pic.twitter.com/KjqR13x4E4
— Congress (@INCIndia) June 7, 2019
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सिर्फ इतना ही नहीं सिंघवी ने तेलंगाना में 12 कांग्रेस विधायकों के तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में शामिल होने को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने इसकी निंदा करते हुए कहा कि पिछले एक साल से राज्य में 'सीधी खरीद' की राजनीतिक नीति अपनाई जा रही है, ये दुर्भाग्यपूर्ण है।
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AM Singhvi on 12 Congress MLAs gave Telangana Assembly Speaker a representation to merge with TRS: A political policy has been followed in Telangana since past one yr-direct purchase. It's an unfortunate context but if there's such commercialization,it's the negative aspect of it pic.twitter.com/yvuojLGAXO
— ANI (@ANI) June 7, 2019
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के अनुसार लोकसभा चुनाव में करीब 60 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, जिनमें से भाजपा का खर्च 45 फीसदी रहा है और बाकी 55 प्रतिशत अन्य सभी दलों ने खर्च किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावी बॉन्ड योजना अपने फायदे के लिए शुरू की। चुनाव में अनाप-शनाप खर्च से बचने के लिए राष्ट्रीय चुनाव निधि का गठन किया जाना चाहिए। इसमें जमा निधि का वितरण चुनाव के समय मान्यता प्राप्त दलों को किया जाना चाहिए। यह योजना चुनाव में अनावश्यक पैसा खर्च करने से बचने के लिए सबसे पारदर्शी कदम साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए 27 हजार करोड़ रुपए लुटाए और 437 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। इस आंकड़े के अनुसार हिसाब लगाने से साफ है कि भाजपा ने लोकसभा की एक सीट पर करीब 62 करोड़ रुपए खर्च किए।
सिंघवी ने कहा कि भाजपा का चुनावी खर्च मोदी सरकार द्वारा नमामि गंगे परियोजना पर पांच साल में खर्च हुए 24 हजार करोड़ रुपए से से ज्यादा है। पार्टी ने जितना पैसा इस चुनाव में खर्च किया वह देश के शिक्षा बजट के 30 प्रतिशत, रक्षा बजट का 10 प्रतिशत, स्वास्थ्य बजट का 43 प्रतिशत और महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना मनरेगा के बजट का 45 फीसदी के बराबर है। इस तरह से 1998 के बाद से अब तक हुए लोकसभा चुनावों में इस बार चुनाव खर्च छह गुना ज्यादा हुआ है।