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राज्यसभा में रविवार को जमकर हुआ हंगामा, भाजपा बोली- कांग्रेस के लिए किसान महज वोट बैंक

Mon, 21 Sep 2020 02:26 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 21 Sep 2020 02:26 AM IST
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BJP said in Rajya Sabha on agriculture bills that farmers are just vote bank for Congress
राज्यसभा - फोटो : ANI

राज्यसभा में रविवार को पारित कृषि से संबंधित विधेयकों पर भारी हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर जुबानी जंग हुई। कांग्रेस ने इन विधेयकों को जहां डेथ वारंट करार दिया तो वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा ने कहा कि कांग्रेस के लिए किसान महज वोट बैंक है।

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भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव ने 2010 में मनमोहन सिंह सरकार में गठित कृषि समिति का कार्य समूह की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें स्पष्ट तौर पर मंडी के एकाधिकार पर चिंता जताई गई। जब रिपोर्ट आपकी है तो राजनीति क्यों कर रहे हैं? आप अपने पीएम के साथ नहीं हैं और किसान के बेटे को डिजिटल बिक्री जैसी सुविधा से रोकना चाहते हैं। विपक्ष को अपनी पुरानी सोच बदलनी होगी।
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साथ ही कहा कृषि क्षेत्र में विकास हुआ है तो किसान की आमदनी क्यों न बढ़े। 2024 के कार्यकाल के दौरान सरकार आठ बार एमएसपी घोषित करेगी और सदन में आकर बताएंगे कि कैसे भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि जब आपकी सरकार थी तो साल दर साल ग्रामीण क्षेत्रों की आय क्यों कम हुई? आप इस बिल का क्यों विरोध कर रहे हैं?
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वहीं, कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने विधेयकों को किसानों की आत्मा पर प्रहार करार दिया है। बाजवा ने कहा, बिल को समर्थन देने का मतलब किसानों के डेथ वारंट पर दस्तखत करने जैसा होगा। इसलिए उनकी पार्टी इस बिल का विरोध करती है।

उन्होंने कहा, आप जैसा दावा कर रहे हैं, किसान उस लाभ को नहीं लेना चाहते हैं तो  फिर आप जबर्दस्ती उन्हें चारा देने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? हम किसानों के इस डेथ वारंट पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।

विरोध में बयान

पीएम विपक्ष को भ्रमित कर रहे: तृणमूल
ये सरकार 2013 में भी किसान विरोधी जमीन अधिग्रहण बिल लेकर आई थी जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि दोनों विधेयक सेलेक्ट कमेटी को भेजे जाने चाहिए ताकि संसदीय स्क्रीनिंग हो सके।  किसानों के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की जो योजनाएं बनी हैं वे केंद्र की योजनाओं से बेहतर है। पीएम विपक्ष पर भ्रमित करने का आरोप लगा रहे है। -डेरेक ओ ब्रायन, टीएमसी सांसद

आखिर क्या मजबूरी है सरकार की: सपा
सरकार की आखिर क्या मजबूरी है जो सांविधानिक ढंग से विधेयक पर चर्चा और विचार नहीं करना चाहती है। कोरोना के नाम पर ले आए जबकि विधेयकों में जो कुछ भी है किसान विरोधी है। इतने महत्वपूर्ण बिल पर न तो विपक्ष, न किसानों के संगठनों से बात कोई राय ली गई। भाजपा समर्थित भारतीय मजदूर संघ से भी नहीं पूछा गया।-प्रोफेसर रामगोपाल यादव, सपा

रोहू की जगह शार्क ला रहे हैं: राजद
मानता हूं कि मंडियों में खरीद-फरोख्त में कुछ गड़बड़ी होती है, लेकिन छोटी मछली रोहू की जगह आप शार्क को ला रहे हैं। सदस्यों को दलों के दायरे से उठकर विधेयक का विरोध करना चाहिए। सोचें कि क्या करने जा रहे हैं। -मनोज झा, राजद सांसद

किसानों से विश्वासघात
किसानों से विश्ववासघात किया गया है। ये काला कानून है क्योंकि इस सरकार ने तो किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा भी बताना बंद कर दिया है। ये विधेयक राज्यों के अधिकार खत्म करने वाला है। एफडीआई का विरोध करने वाली भाजपा अब कृषि क्षेत्र को कारपोरेट क्षेत्र को देने जा रही है।-संजय सिंह, आप

पीएम माफी मांगें: कांग्रेस
ये किसानों को बर्बाद करने वाला बिल है। सरकार जब कैबिनेट के अपने सहयोगी मंत्री को नहीं समझा पा रही और इस्तीफा दे दिया ऐसे में सदन और देश को कैसे समझाएंगे। किसानों को भ्रमित करने की बात कहकर पीएम किसानों का अपमान कर रहे हैं। पीएम को माफी मांगनी चाहिए। -शक्ति सिंह गोहिल, कांग्रेस

अकाली दल किसानों पर जुल्मों के साथ: गुजराल
अकाली दल किसानों पर हो रहे जुल्मों के साथ है। इन विधेयकों की मदद से बडे़-बडे़ बिजनेस घरानों और कारपोरेट को लाभ पहुंचाया जा रहा है। सरकार किसानों की आवाज नहीं सुन रही है विधेयक को सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाए। पंजाब-हरियाणा में अभी चिंगारी है, इसे आग में न बदलने दें। ये इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा।-नरेश गुजराल, शिरोमणि अकाली दल

प्रवर समिति को भेजें विधेयक
पंजाब ने पहले 1947 फिर1984 में दुख सहा है। 1965 की जंग में भी सिखों ने अहम भूमिका निभाई। विधेयकों को सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। ये किसानों के लिए सिरदर्द है।- सरदार सुखदेव सिंह ढींढसा, शिरोमणि अकाली दल

समर्थन के पक्ष में बयान

विधेयकों से किसानों को बिचौलियों से राहत: भाजपा
कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में इन दोनों विधेयकों का जिक्र किया था पहले उसे पढ़ ले। किसानों को लेकर राजनीति होती रही है। इस विधेयक से किसानों को बिचौलियों से राहत मिलेगी और अपनी फसल कहीं भी अच्छी कीमत बेच सकेगा। कांग्रेस मंडी और एमएसपी समाप्त करने को लेकर भ्रमित कर रही है।-सुरेंद्र नागर, भाजपा

वाईएसआर बोली, कांग्रेस कर रही बिचौलियों का समर्थन
वाईएसआर कांग्रेस ने विधेयक का समर्थन किया। सांसद विजय साई रेड्डी ने कहा कि इन विधेयकों की मदद से किसानों को लाभ मिलेगा और बिचौलियों से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिचौलियों का समर्थन कर रही है ।

ऐसा कहते ही कांग्रेस सांसदों ने आपत्ति जताई और दोनों ओर से तू तू मैं मैं शुरू हो गई। आनंद शर्मा ने रेड्डी के माफी मांगने की मांग की तो गुलाम नबी आजाद ने भी नाराजगी जताई। चेयर पर मौजूद डा. एल. हनुमंथप्पा के हस्तक्षेप और टिप्पणी कार्यवाही से निकालने के आश्वासन पर मामला शांत हुआ।

आज किसानों को न्याय देने का दिन: आरपीआई
बिल का स्वागत है। आज का दिन किसानों को न्याय देने का दिन है। -रामदास आठवले, केंद्रीय मंत्री और आरपीआई प्रमुख

जदयू विधेयकों के समर्थन में, किसानों की आय बढ़ेगी
जदयू विधेयकों का समर्थन करती है। बिहार 2006 में एपीएमसी अधिनियम से हटने वाला पहला राज्य था। तब से कृषि उत्पादन और खरीद एमएसपी के साथ बढ़ी है। इससे किसानों की आय बढे़गी। -रामचंद्र प्रसाद सिंह, जदयू

संसद के बाहर बयान

केजरीवाल बोले, सब मिलकर विधेयकों को हराएं
आज पूरे देश के किसानों की नजर राज्य सभा पर है। राज्य सभा में भाजपा अल्पमत में है। मेरी सभी गैर भाजपा पार्टियों से अपील है कि सब मिलकर इन तीनों बिलों को हरायें, यही देश का किसान चाहता है। -अरविंद केजरीवाल, सीएम

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