Manipur: भाजपा के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा का मणिपुर दौरा; दो कुकी विधायकों से मिले, एक पर हुआ था हमला
Manipur: भाजपा नेता संबित पात्रा ने मणिपुर के चुराचांदपुर में दो कुकी विधायकों से मुलाकात की। संगठनों ने उन्हें शांति की मांग करने वाला ज्ञापन सौंपा। यह दौरा उस वक्त हुआ है, जब 21 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य में लोकतांत्रिक सरकार बहाल करने की मांग की है।
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी संबित पात्रा ने सोमवार को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में दो कुकी विधायकों से मुलाकात की। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी।
पात्रा इंफाल हवाई अड्डे पर उतरे और उसके बाद हेलिकॉप्टर से चुराचांदपुर पहुंचे। वहां उन्होंने थनलोन सीट से भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्टे से मुलाकात की, जो 4 मई 2023 को इंफाल में एक भीड़ के हमले से बच गए थे। इसके अलावा उन्होंने चुराचांदपुर विधायक एल.एम.खाऊटे और जोमी छात्र संघ (जेडएसएफ) के नेताओं से भी मुलाकात की। जेडएसएफ के नेताओं ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।
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भाजपा नेता ने कुकी जो परिषद (केजेडसी) और जोमी परिषद (जेडसी) के नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक की। जब मीडिया ने उनके दौरे का मकसद पूछा तो उन्होंने कहा कि वह आधिकारिक दौरे पर नहीं हैं।
21 विधायकों ने पीएम मोदी को भेजे पत्र
पात्रा का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब मणिपुर के 21 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अलग-अलग पत्र भेजे हैं। पत्र में उन्होंने मांग कि राज्य में जनता की सरकार बनाई जाए, ताकि शांति और सामान्य स्थित लौट सके।
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इन विधायकों ने किया हस्ताक्षर
इन पत्रों पर हस्ताक्षर करने वालों में 12 भाजपा, 3 राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, 3 नागा पीपुल्स फ्रंट और 2 निर्दलीय विधायकों ने हस्ताक्षर किए हैं। ये पत्र 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय भेजे गए थे। विधायकों ने लिखा, हम मानते हैं कि मणिपुर में लोकप्रिय सरकार बनाकर ही शांति बहाल करना एकमात्र उपाय है। सूत्रों के मुताबिक, पात्रा चुराचांदपुर से लौटकर इंफाल में भाजपा विधायकों से मिलेंगे। उन्होंने इससे पहले फरवरी में मणिपुर का दौरा किया था।
मणिपुर में 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जब मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया। राज्य विधानसभा को भंग कर दिया गया है, जबकि उसका कार्यकाल 2027 तक है। मई 2023 से मणिपुर में मेतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा हो रही है, जिसमें अब तक 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों लोग बेघर हो चुके हैं।
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