आप की शिक्षा योजना पर भाजपा का हमला, कहा- डीयू में प्रवेश लायक नंबर तक नहीं ला पा रहे छात्र
- भाजपा समर्थित शोध संगठन पीपीआरसी का दावा- बेहतर परिणाम दिखाने के लिए छात्रों को नौवीं और ग्यारहवीं में रोक रही दिल्ली सरकार
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आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के शिक्षा मॉडल को अपने सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया है। शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे भारत ही नहीं, विश्व के अनेक विकसित राष्ट्रों के शिक्षा मॉडल के टक्कर का बताया है। यही कारण है कि जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जब दिल्ली के शिक्षा मॉडल पर सवाल उठाया, तो उन्होंने उन्हें दिल्ली के स्कूलों में आने की चुनौती दे डाली।
मनीष सिसोदिया के इस हमले पर भाजपा ने कहा है कि आम आदमी पार्टी का शिक्षा मॉडल पूरी तरह से फेल साबित हुआ है क्योंकि इसमें पढ़े छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रवेश लायक तक नहीं बन पाते। भाजपा का आरोप है कि दिल्ली सरकार नौवीं और ग्यारहवीं के उन बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट नहीं करती, जिसे वह दसवीं और बारहवीं में पास होने के काबिल नहीं समझती। पार्टी ने इसे छात्रों के शिक्षा के अधिकार से खिलवाड़ बताया।
भाजपा सांसद विनय सहस्रबुद्धे ने पार्टी की रिसर्च विंग लोक नीति शोध केंद्र (Public Policy Research Centre या PPRC) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों से निकले बच्चों का दसवीं कक्षा में औसत अंक प्रतिशत 71.58 फीसदी तक गिर गया है। इसी प्रकार बारहवीं में 0.84 फीसदी बच्चे ही 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त कर पाए। सबसे अच्छे अंक पाने वाले लगभग 13 फीसदी बच्चों का अंक प्रतिशत 75 से 90 फीसदी के बीच रहा है (वर्ष 2018 के अंकों के आधार पर)।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले में कट ऑफ आर्ट्स ग्रुप के लिए भी 91.6 से अधिक का रहा है। इस प्रकार दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़े बच्चे दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रवेश पाने के योग्य नहीं हो पा रहे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को इन परिणामों का अवलोकन कर सच स्वीकार करना चाहिए।
पीपीआरसी के निदेशक सुमीत भसीन ने कहा कि उन्होंने दिल्ली सरकार के स्कूलों की सही स्थिति पता करने के लिए पिछले एक साल में 917 आरटीआई लगाईं। इनके जवाब में जो तथ्य सामने आए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के पास नए स्कूलों के निर्माण के लिए 82 जमीन के प्लॉट्स पड़े हुए हैं, लेकिन 500 नए स्कूलों के निर्माण का दावा करने वाली सरकार ने एक भी नए स्कूलों का निर्माण नहीं कराया है।
भसीन के मुताबिक दिल्ली सरकार के 1030 स्कूलों में केवल 301 में ही इंटरमीडिएट स्तर पर विज्ञान की पढ़ाई कराई जाती है, जबकि इनमें भी केवल 104 स्कूलों में विज्ञान की प्रयोगशालाएं हैं। उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग में दिल्ली सरकार के स्कूलों में विज्ञान की कक्षाओं की कमी देश और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
भाजपा नेता मनोज तिवारी ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने लोगों को दिखाने के लिए अपने एक दर्जन स्कूलों की स्थिति बेहतर कर दी है, जबकि बाकी पूरी दिल्ली को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। मनीष सिसोदिया के द्वारा स्कूलों को दिखाए जाने के चैलेंज पर उन्होंने कहा कि वे शीघ्र ही सभी स्कूलों में जाकर वहां की स्थिति मीडिया और जनता को दिखाएंगे।
आप का दावा
वहीं आम आदमी पार्टी ने अपने पिछले पांच साल के कामकाज के दौरान दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का दावा किया है। आप का दावा है कि उसने दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में गरीब वर्ग के बच्चों का प्रवेश दिलाने के लिए बेहतरीन काम किया है और उसके कारण दिल्ली के बड़े प्राइवेट स्कूलों में गरीब छात्र पढ़ पा रहे हैं। इसके अलावा पार्टी का दावा है कि उसने दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर भी रोक लगाई है।
इसी साल अनेक स्कूलों को अपनी बढ़ाई गई फीस अभिभावकों को वापस लौटानी पड़ी है। इसके अलावा दिल्ली के अनेक स्कूलों को उसने स्मार्ट क्लासेज में तब्दील करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करवाने का दावा किया है।