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उन्नाव मामले के आरोपी कुलदीप सेंगर के साथ पार्टी की कोई हमदर्दी नहीं : सिद्धार्थनाथ सिंह

Fri, 02 Aug 2019 07:00 PM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Fri, 02 Aug 2019 07:00 PM IST
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BJP Party has no sympathy with Unnao case accused Kuldeep Singh Sengar says Sidharth Singh
विधायक कुलदीप सिंह सेंगर - फोटो : PTI

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की हालत इस समय भी नाजुक बनी हुई है। वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। विपक्ष ने यूपी सरकार पर घटना के आरोपियों का बचाव करने का आरोप लगाया है। इस मामले के पर हमारे संवाददाता ने योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह से मुलाकात की और सरकार का पक्ष समझने की कोशिश की। पेश हैं वार्ता के प्रमुख अंश।

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सिद्धार्थ जी, विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इस मामले में कड़े कदम उठाने में देरी की, आरोपियों का बचाव किया जिसकी वजह से यह मामला इस हद तक पहुंचा। क्या कहेंगे?
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कोई भी आरोप लगाने के पहले इस तथ्य को ध्यान में रखना चाहिए कि घटना के बारह घंटे के अंदर मामले की जांच करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया था। एसटीएफ ने 48 घंटे के अंदर अपनी पहली रिपोर्ट फाइल कर दी थी। बाद में जब परिवार ने इस मामले को सीबीआई को सौंपने की बात कही, सरकार ने तत्काल इस मांग को भी स्वीकार कर लिया। सीबीआई ने भी एसटीएफ की रिपोर्ट का अध्ययन किया था और उसी के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उसी रात आरोपियों की गिरफ्तारी भी कर ली थी। ऐसे में सरकार पर देरी करने या किसी का बचाव करने का आरोप लगाना सही नहीं है।
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दुष्कर्म पीड़िता की गाड़ी का एक्सीडेंट होना इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक साजिश बताया जा रहा है। सरकार क्या कहेगी?

यह बेहद तकलीफदेह है। किसी भी बेटी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। हमारे मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) बेहद संवेदनशील व्यक्ति हैं। उन्होंने इस मामले में सभी जरूरी कदम उठाए हैं। मैं इतना ही कहूंगा कि इस विषय पर जांच चल रही है। जांच एजेंसी की रिपोर्ट जल्दी ही सामने आने वाली है। कोई भी बात होगी तो उसकी सच्चाई भी सामने आ जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव मामले पर जिस तरह सक्रियता दिखाई है, क्या यह इस बात का संकेत नहीं है कि इससे यूपी सरकार की कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है। सरकार का एक अंग होने के नाते आप क्या कहेंगे?

मैंने आपसे पहले ही कहा, सरकार ने इस मामले पर तत्काल जो भी कार्रवाई करनी थी हमने की। लेकिन इसके बाद भी अगर परिवार अपनी संतुष्टि के लिए सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट की राह तलाशना चाहता है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है। सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट हमारे देश की संवैधानिक प्रक्रिया के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। परिवार को इनके पास जाने का हक है।

लेकिन भाजपा ने उन्हें बाहर का दरवाजा दिखाने में इतनी देरी क्यों की? आपकी पार्टी के ही नेता आरोपी से जाकर मिलते हैं। क्या आपको इसमें कुछ भी गलत नहीं दिखता?

किसी का मिलना व्यक्तिगत स्तर पर हुआ हो तो इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन फिलहाल पार्टी ने उन्हें बाहर कर दिया है।

प्रधानमंत्री की स्पष्ट सीख के बाद भी आकाश विजयवर्गीय, प्रज्ञा ठाकुर जैसे कई भाजपा नेताओं ने अपनी हरकतों से पार्टी को नीचा दिखाने का काम किया है। लेकिन किसी भी मामले में पार्टी ने कड़ी कार्रवाई करने का उदाहरण पेश नहीं किया है। इससे गलत संदेश जा रहा है। क्या कहेंगे?


जब हमारे परिवार के मुखिया प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं ने ऐसी किसी भी हरकत को स्वीकार न करने की बात कह दी है तो कहने को शेष क्या रह जाता है। ऐसी किसी भी हरकत को पार्टी स्वीकार नहीं करेगी।

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