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LAMA2-CMD: ये कौन सी दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है, जिसके उपचार के लिए भाजपा सांसद ने पीएम मोदी से मांगा समर्थन
Tue, 04 Nov 2025 04:15 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 04 Nov 2025 04:15 PM IST
सार
जेनेटिक बीमारी से जूझ रहे बच्चों के जीवन को बचाने के संकल्प एवं गहरी संवेदना से प्रेरित होकर, दिल्ली के चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।
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भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल
- फोटो : एएनआई
विस्तार
दुर्लभ और जीवन के लिए खतरा बनी एक जेनेटिक बीमारी से जूझ रहे बच्चों के जीवन को बचाने के संकल्प एवं गहरी संवेदना से प्रेरित होकर, दिल्ली के चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने LAMA2 संबंधित congenital muscular dystrophy (LAMA2-CMD) के उपचार के लिए विशेष नीति हस्तक्षेप और त्वरित अनुमोदन की मांग की है। खंडेलवाल ने कहा, यह वह निर्णायक क्षण है जब भारत एक बार फिर चिकित्सा नवाचार में विश्व का नेतृत्व कर सकता है, जैसे कोविड-19 वैक्सीन के समय किया था।
LAMA2-CMD दुनिया की सबसे दुर्लभ और भयावह जेनेटिक बीमारियों में से एक है, जो नवजात और छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। धीरे-धीरे उनकी चलने, हिलने–डुलने और यहाँ तक कि साँस लेने की क्षमता को भी छीन लेती है। खंडेलवाल की यह अपील एक अत्यंत भावनात्मक अनुभव से उत्पन्न हुई है। उनके संसदीय क्षेत्र की एक 20 महीने की बच्ची इस भयंकर बीमारी से जूझ रही है, जिसका इस समय दुनिया में कहीं भी कोई उपचार नहीं है। यह कहानी अकेली नहीं है। इस साहसी परिवार ने अब तक देश भर में लगभग 60 बच्चों की पहचान की है, जो इसी बीमारी से लड़ रहे हैं। सभी जीवन और आशा के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
अपने पत्र में खंडेलवाल ने लिखा कि भारत आज फिर एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहां वह स्वास्थ्य नवाचार के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व कर सकता है। ठीक वैसे ही जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और अटूट संकल्प से भारत ने अपनी वैक्सीन बनाकर पूरी मानवता को आशा दी थी। उन्होंने जापान की Modalis Therapeutics नामक बायोटेक कंपनी की हालिया खोज का उल्लेख किया, जिसने CRISPR आधारित जीन एडिटिंग थेरेपी विकसित की है जो LAMA2-CMD के लिए अत्यंत आशाजनक मानी जा रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इस तकनीक को पहले ही लो-रिस्क (कम जोखिम) श्रेणी में रखा है, जिससे भारत के लिए इसे क्लीनिकल ट्रायल में लागू करने का अवसर बनता है। खंडेलवाल ने ज़ोर देते हुए कहा कि यदि सरकार शीघ्र और निर्णायक कदम उठाती है, तो भारत दुनिया का पहला देश बन सकता है जो इस थेरेपी के मानव परीक्षण शुरू करेगा। इससे भारत के 60 से अधिक परिवारों को जीवन की नई उम्मीद मिलेगी और दुनिया भर के हज़ारों बच्चों के लिए नई दिशा बनेगी।
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उन्होंने प्रधानमंत्री से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है:
1. न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स रूल्स, 2019 के तहत मानव परीक्षण (clinical trial) के लिए त्वरित स्वीकृति प्रदान की जाए।
2. DCGI और ICMR को मिलकर त्वरित मूल्यांकन और अनुमोदन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया जाए।
3. LAMA2-CMD को राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति, 2021 में अलग श्रेणी के रूप में शामिल कर वित्तीय सहायता सीमा ₹50 लाख से अधिक बढ़ाई जाए।
4. भारतीय और अंतरराष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए ताकि जीन थैरेपी अनुसंधान को गति मिल सके।
खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह पहल भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह न केवल भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करेगी बल्कि मानवता और संवेदना में उसकी अग्रणी भूमिका को भी सशक्त बनाएगी।
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LAMA2-CMD दुनिया की सबसे दुर्लभ और भयावह जेनेटिक बीमारियों में से एक है, जो नवजात और छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। धीरे-धीरे उनकी चलने, हिलने–डुलने और यहाँ तक कि साँस लेने की क्षमता को भी छीन लेती है। खंडेलवाल की यह अपील एक अत्यंत भावनात्मक अनुभव से उत्पन्न हुई है। उनके संसदीय क्षेत्र की एक 20 महीने की बच्ची इस भयंकर बीमारी से जूझ रही है, जिसका इस समय दुनिया में कहीं भी कोई उपचार नहीं है। यह कहानी अकेली नहीं है। इस साहसी परिवार ने अब तक देश भर में लगभग 60 बच्चों की पहचान की है, जो इसी बीमारी से लड़ रहे हैं। सभी जीवन और आशा के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
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अपने पत्र में खंडेलवाल ने लिखा कि भारत आज फिर एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहां वह स्वास्थ्य नवाचार के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व कर सकता है। ठीक वैसे ही जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और अटूट संकल्प से भारत ने अपनी वैक्सीन बनाकर पूरी मानवता को आशा दी थी। उन्होंने जापान की Modalis Therapeutics नामक बायोटेक कंपनी की हालिया खोज का उल्लेख किया, जिसने CRISPR आधारित जीन एडिटिंग थेरेपी विकसित की है जो LAMA2-CMD के लिए अत्यंत आशाजनक मानी जा रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इस तकनीक को पहले ही लो-रिस्क (कम जोखिम) श्रेणी में रखा है, जिससे भारत के लिए इसे क्लीनिकल ट्रायल में लागू करने का अवसर बनता है। खंडेलवाल ने ज़ोर देते हुए कहा कि यदि सरकार शीघ्र और निर्णायक कदम उठाती है, तो भारत दुनिया का पहला देश बन सकता है जो इस थेरेपी के मानव परीक्षण शुरू करेगा। इससे भारत के 60 से अधिक परिवारों को जीवन की नई उम्मीद मिलेगी और दुनिया भर के हज़ारों बच्चों के लिए नई दिशा बनेगी।
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उन्होंने प्रधानमंत्री से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है:
1. न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स रूल्स, 2019 के तहत मानव परीक्षण (clinical trial) के लिए त्वरित स्वीकृति प्रदान की जाए।
2. DCGI और ICMR को मिलकर त्वरित मूल्यांकन और अनुमोदन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया जाए।
3. LAMA2-CMD को राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति, 2021 में अलग श्रेणी के रूप में शामिल कर वित्तीय सहायता सीमा ₹50 लाख से अधिक बढ़ाई जाए।
4. भारतीय और अंतरराष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए ताकि जीन थैरेपी अनुसंधान को गति मिल सके।
खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह पहल भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह न केवल भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करेगी बल्कि मानवता और संवेदना में उसकी अग्रणी भूमिका को भी सशक्त बनाएगी।