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BJP: 'कांग्रेस की विदेश नीति नेहरू परिवार पर केंद्रित थी, देश ने इसका खामियाजा भुगता', भाजपा सांसद का पलटवार

Sun, 15 Jun 2025 03:24 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 15 Jun 2025 03:24 PM IST
सार

कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के पिता 1968 से 1984 तक कनाडा के प्रधानमंत्री थे। इंदिरा गांधी ने उन्हें 16 साल तक सात पत्र लिखे, लेकिन वो उनके पत्रों का जवाब नहीं दे रहे थे, उनकी बात नहीं सुन रहे थे और खालिस्तानी आतंकवादियों को पनाह दे रहे थे और आप हमें विदेश नीति सिखा रहे हैं? 

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BJP mp nishikant dubey said congress foreign policy was nehru centric pm modi pakistan
निशिकांत दुबे, सांसद, भाजपा - फोटो : ANI

विस्तार

कांग्रेस बीते कई दिनों से केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रही है। हाल ही में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि अमेरिका ने अपने आर्मी डे परेड में पाकिस्तानी सेना प्रमुख को आमंत्रित किया है। इसे लेकर कांग्रेस ने भारत की विदेश नीति को पूरी तरह से असफल बता दिया था। अब भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में कांग्रेस पर जमकर भड़ास निकाली और पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। 
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'मुस्लिम लीग औऱ जयराम रमेश में क्या फर्क?'
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस ने पढ़ना-लिखना बंद कर दिया है। पिछले 2-3 दिनों से पूरी कांग्रेस पार्टी कहती रही कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर अमेरिका जा रहे हैं। ये पाकिस्तान का एक जाल था। आज पता चला कि व्हाइट हाउस या अमेरिकी सेना ने आसिम मुनीर को कभी नहीं बुलाया। पाकिस्तान मुस्लिम लीग और जयराम रमेश में क्या फर्क है? दूसरी बात, जब 1985 में कनिष्क बम धमाका हुआ, तो कनाडा ने इसकी जांच कब शुरू की? 2006 में शुरू की। कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के पिता 1968 से 1984 तक कनाडा के प्रधानमंत्री थे। इंदिरा गांधी ने उन्हें 16 साल तक सात पत्र लिखे, लेकिन वो उनके पत्रों का जवाब नहीं दे रहे थे, उनकी बात नहीं सुन रहे थे और खालिस्तानी आतंकवादियों को पनाह दे रहे थे और आप हमें विदेश नीति सिखा रहे हैं? 
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फलस्तीन मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी को दिखाया आईना
कांग्रेस पार्टी ने भाजपा सरकार पर फलस्तीन का समर्थन न करने का आरोप लगाया था और भारत की विदेश नीति की तीखी आलोचना की थी। इस पर पलटवार करते हुए भाजपा सांसद ने लिखा कि '1948 में इस्राइल और फलस्तीन दो देश बन गए। 1948 में नेहरू जी ने संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन का समर्थन किया और इस्राइल का विरोध किया, लेकिन 1950 में नेहरू जी ने गुप्त तरीके से मुंबई में इस्राइल का व्यापार कार्यालय मिशन खोल लिया। 1953 में मुंबई में इस्राइल का महावाणिज्य दूतावास खोला गया। 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में हमने इस्राइली हथियारों का इस्तेमाल किया और मोसाद ने तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल जैकब के साथ मिलकर पाकिस्तान पर हमले की योजना भी बनाई थी।'


'नेहरू परिवार की गलतियों का खामियाजा भुगत रहा देश'
भाजपा नेता ने कहा कि '1992 में दिल्ली में पहला इस्राइली दूतावास खोला गया। 1996 में आखिरकार भारत में फलस्तीन का कार्यालय खुला। 1948 से लेकर 2014 तक, जब तक उनकी सरकार सत्ता में रही, 50 से ज़्यादा बार हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस्राइल का समर्थन किया या फिर हम मतदान से दूर रहे। आज जब आप फलस्तीन की बात करते हैं, तो क्या आपको लगता है कि हम हमास का समर्थन करेंगे? भारत फलस्तीन के नागरिकों के साथ है, हमने उन्हें 2020 से अब तक लगभग 20 करोड़ रुपये की सहायता दी है। इस बजट में भी हमने फलस्तीन के लिए 3.9 करोड़ रुखे हैं।' दुबे ने कहा कि 'कांग्रेस की पूरी विदेश नीति केवल नेहरू-परिवार केंद्रित थी, जिसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी लगातार विदेश में भारत की स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यही वजह है कि वह लगातार जी7 और जी20 सम्मेलनों में जा रहे हैं।'

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भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा '2008 में मुंबई में धमाके हुए, 175 लोग मारे गए और 350 से ज़्यादा घायल हुए। इसके बाद भी भारत ने हमला नहीं किया क्योंकि 2009 का चुनाव होने वाला था। शिमला समझौते के बाद पहली बार जुलाई 2009 में अमेरिका, सऊदी अरब और सभी मुस्लिम देशों के दबाव में भारत ने शर्म अल शेख में समझौता किया और पहली बार पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने माना कि भारत में आतंकवाद और पाकिस्तान में आतंकवाद एक ही है। कांग्रेस ने सिर्फ़ वोट बैंक की राजनीति के लिए आतंकवाद का समर्थन किया, पाकिस्तान का समर्थन किया और उसके बाद 2011 में शर्म अल शेख में दिए गए इस बयान के बाद पाकिस्तान ने 2011 में मुंबई में बम धमाका किया जिसमें फिर से 26 लोग मारे गए और लगभग 100 लोग घायल हुए. 300 लोग घायल हुए। कांग्रेस को इतिहास से सीखने की जरूरत है।



 
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