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भाजपा सांसद ने विभाजन की विभीषिका को बच्चों को पढ़ाने की मांग की, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
Fri, 27 Aug 2021 05:29 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 27 Aug 2021 05:29 PM IST
सार
सांसद के अनुसार देश की आजादी के बाद इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। जिन्होंने देश पर आक्रमण किए, उन्हें तो महिमामंडित किया गया, जबकि देश के गौरवान्वित करने वाले इतिहास को भुलाने की कोशिश की गई...
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भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर विभाजन की विभीषिका विषय को पाठ्यक्रम में शामिल कर बच्चों को पढ़ाए जाने की मांग की है। सांसद ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ विभाजन एतिहासिक त्रासदी है जिस दौरान 20 लाख से ज्यादा लोगों को अपने जान-माल से हाथ धोना पड़ा और करोड़ों घर उजड़ गए, अनगिनत महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ। यह भारत के इतिहास की ही नहीं, विश्व के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। उन्होंने कहा है कि अगर छात्रों को विभाजन की विभीषिका के बारे में पढ़ाया जाएगा तो वे राष्ट्रीय एकता के महत्त्व को समझेंगे और देश फिर कभी विभाजन की तरफ नहीं जाएगा।
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राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने अमर उजाला से कहा कि इसी समय अफगानिस्तान में लाखों लोगों को अपना ही देश छोड़कर भागना पड़ रहा है। लोगों की जान जा रही है और करोड़ों की संपत्तियां, जिसे लोगों ने अपना खून-पसीना लगाकर बनाया था, लूटी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस दर्द को महसूस करते हुए ऐसा कठोर कदम उठाने की जरूरत है जिससे भारत में इस तरह की परिस्थिति कभी न पैदा हो सके। इसका सबसे अच्छा तरीका यही होगा कि हम अपनी भावी पीढ़ी को विभाजन के संकटों से परिचित कराएं।
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उन्होंने कहा कि देश के सामने भविष्य में कई कठिन चुनौतियां सामने आ सकती हैं। कई देशविरोधी शक्तियां राष्ट्रीय एकता को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन अगर भावी पीढ़ी विभाजन की त्रासदी से परिचित होगी तो देश के विभाजन का एजेंडा चलाने वालों को कभी सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए आवश्यक है बच्चों को बचपन से ही देश की राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने का पाठ सिखाया जाए।
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सांसद के अनुसार देश की आजादी के बाद इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। जिन्होंने देश पर आक्रमण किए, उन्हें तो महिमामंडित किया गया, जबकि देश के गौरवान्वित करने वाले इतिहास को भुलाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि अब बच्चों को इस इतिहास को पढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे दोबारा करोड़ों लोगों को विभाजन की त्रासदी न झेलनी पड़े।