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चुनावी राज्यों में संगठन की गुत्थी सुलझाने में उलझी भाजपा

Sun, 13 Mar 2016 10:03 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 13 Mar 2016 10:03 PM IST
सार

  • माथापच्ची के बावजूद पार्टी उत्तर प्रदेश और पंजाब में जहां अध्यक्ष पद का फैसला नहीं कर पाई है
  • उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी पेश करने की चुनौती है

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BJP leaders sweating on solving problem within the organisation
अमित शाह - फोटो : PTI

विस्तार

भाजपा नेतृत्व चुनावी राज्यों की संगठन की गुत्थी सुलझाने में खुद उलझ गया है। बीते छह महीने से जारी माथापच्ची के बावजूद पार्टी उत्तर प्रदेश और पंजाब में जहां अध्यक्ष पद का फैसला नहीं कर पाई है, वहीं उत्तराखंड में कड़ी मशक्कत के बाद अध्यक्ष पद का फैसला करने वाला नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष पद की गुत्थी नहीं सुलझा पाया है।

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पार्टी के लिए सियासी रूप से सबसे अहम उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी पेश करने की चुनौती है। इन तीनों ही राज्यों में पार्टी नेतृत्व अलग-अलग तरह की उलझनों का सामना कर रहा है। मसलन उत्तर प्रदेश में पार्टी नेतृत्व यह तय नहीं कर पा रहा है कि संगठन की कमान अगड़ा वर्ग को या पिछड़ा वर्ग को। इसी प्रकार उत्तराखंड में कुमांऊ क्षेत्र से ब्राह्मण बिरादरी के अजय भट्ट को अध्यक्ष बनाने के बाद पार्टी यह तय नहीं कर पा रही कि नेता प्रतिपक्ष का पद गढ़वाल या तराई क्षेत्र के किसी नेता को दे।
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इसके अलावा ब्राह्मण बिरादरी को अध्यक्ष बनाने के कारण नेता प्रतिपक्ष के लिए नेतृत्व को किसी राजपूत बिरादरी के नेता की भी तलाश है। पंजाब में भी पार्टी कमल शर्मा को एक और मौका देने या उनकी जगह अविनाश राय खन्ना या फिर किसी अन्य चेहरे पर दांव लगाने का फैसला नहीं कर पा रही है।

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दर्जनों नामों पर विचार विमर्श के बावजूद अटकी है घोषणा

BJP leaders sweating on solving problem within the organisation
बैठक का एक दृश्य - फोटो : amar ujala

भाजपा नेतृत्व सियासी रूप से सबसे अहम उत्तर प्रदेश में बीते छह महीने से संगठन की कमान की गुत्थी सुलझाने में जुटा है। इस क्रम में अब तक धर्मपाल सिंह, स्वतंत्रदेव सिंह, मनोज सिन्हा, दिनेश शर्मा, महेश शर्मा, संतोष गंगवार के नाम पर विचार विमर्श हुआ। एकबारगी ऐसा लगा कि पार्टी ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी लोध बिरादरी के धर्मपाल का नाम तय कर लिया है।

मगर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अमित शाह को मिले पूर्ण कार्यकाल के बाद अचानक रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा का नाम सामने आया। इन दोनों नामों के सामने आने से पहले अलग-अलग समय में स्वतंत्रदेव, दिनेश शर्मा, महेश शर्मा और गंगवार का नाम भी सामने आया। चूंकि अध्यक्ष का नाम ही तय नहीं हो रहा, इसलिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा तय करने का मामला फिलहाल नेपथ्य में चला गया है। 

पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व सूबे के जातीय समीकरण का हल ढूंढने में लगी है। यह तय नहीं हो पा रहा कि संगठन की कमान अगड़ा वर्ग को दिया जाए या पिछड़ा वर्ग को। सूबे में कोई दमदार चेहरा न होने के कारण मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तय करने में भी गहरा असमंजस है।  

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