भाजपा नेता हत्याकांड: उम्रकैद की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे कांग्रेस MLA विनय कुलकर्णी, जानें पूरा मामला
भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में बंगलूरू की विशेष अदालत ने कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 17 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ कुलकर्णी ने अब कर्नाटक हाईकोर्ट में अपील दायर की है। वहीं, धारवाड़ में उनके समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए मौन मार्च निकाला।
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कर्नाटक की राजनीति में भूचाल लाने वाले भाजपा नेता योगेश गौड़ा हत्याकांड में एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस नेता और विधायक विनय कुलकर्णी ने अब अपनी कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने अपनी सजा के खिलाफ बंगलूरू स्थित कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस बीच, धारवाड़ में उनके सैकड़ों समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर मौन मार्च निकाला है और इस पूरी कार्रवाई को एक राजनीतिक साजिश बताया है।
दरअसल, हाल ही में बंगलूरू की एक विशेष अदालत ने भाजपा नेता की हत्या के जुर्म में विनय कुलकर्णी सहित कुल 17 लोगों को दोषी ठहराया था। अदालत ने इन सभी दोषियों को उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई थी और हर एक पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इस बड़े फैसले के बाद शनिवार को कांग्रेस विधायक ने अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
कैसे हुई थी भाजपा नेता की हत्या?
यह दिल दहला देने वाली घटना 15 जून 2016 की है। धारवाड़ शहर के एक जिम में भाजपा नेता योगेश गौड़ा पर हथियारों से लैस हमलावरों के एक समूह ने जानलेवा हमला कर दिया था। इस हमले में धारदार हथियारों से उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि योगेश गौड़ा ने राजनीतिक रूप से विनय कुलकर्णी को कड़ी चुनौती दी थी, जिसके बाद यह पूरा विवाद शुरू हुआ था।
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मामले में विनय कुलकर्णी की क्या भूमिका थी?
वर्ष 2016 के इस हत्याकांड में विनय कुलकर्णी को आरोपी नंबर 15 बनाया गया था। जब उन पर ये गंभीर आरोप लगे थे, उस समय वह राज्य में मंत्री थे और जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी थी, जिसके बाद इस पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुई थीं।
गिरफ्तारी और जमानत का क्या है पूरा घटनाक्रम?
इस हत्याकांड के सिलसिले में विनय कुलकर्णी को पहली बार साल 2020 में गिरफ्तार किया गया था और 2021 में उन्हें जमानत मिल गई थी। लेकिन, इसके बाद उन पर गवाहों को प्रभावित करने के आरोप लगे। तब सीबीआई की मांग पर अदालत ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद कुलकर्णी ने आत्मसमर्पण किया और बाद में उन्हें फिर से जमानत मिल गई। वर्तमान में वह कर्नाटक अर्बन वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
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