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Gujarat: भाजपा को क्यों सता रहा भितरघात का डर? मोदी-शाह के लिए मुसीबत बने पुराने सिपहसालार!

Thu, 04 Apr 2024 08:57 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 04 Apr 2024 08:57 PM IST
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सार
भाजपा को 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में सभी 26 सीटों पर जीत मिली थी। लेकिन इस बार पार्टी को अपनों के विरोध के चलते दो उम्मीदवार को बदलने पड़े हैं। इनमें से एक वडोदरा सीट है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के साथ-साथ वडोदरा सीट से भी चुनाव जीते थे।
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BJP in Gujarat is haunted by fear of betrayal by its own leaders
भाजपा को भितरघात का डर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में सब ठीक नहीं चल रहा है। एक तरफ भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता खुलकर अपने ही लोकसभा उम्मीदवारों का विरोध कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के ही दिग्गज नेता पर्दे के पीछे से इसे हवा दे रहे हैं। ये ऐसे दिग्गज नेता हैं जिन्हें पार्टी ने किनारे लगा दिया है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाईकमान टिकट अपने हिसाब से दे रहा है। हम पर पार्टी उम्मीदवारों को रिकॉर्ड मतों से जिताने का दबाव है। इस चुनाव में कई ऐसे नेता भी चुनावी मैदान में हैं, जिनकी जमीनी पकड़ नहीं है। इधर, भाजपा ने भी असंतुष्ट सदस्यों के साथ बैठक कर उन्हें मनाने का प्रयास शुरू कर दिया है।


भाजपा को 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में सभी 26 सीटों पर जीत मिली थी। लेकिन इस बार पार्टी को अपनों के विरोध के चलते दो उम्मीदवार को बदलने पड़े हैं। इनमें से एक वडोदरा सीट है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के साथ-साथ वडोदरा सीट से भी चुनाव जीते थे। जबकि 2019 में भाजपा की प्रत्याशी रंजन भट्ट पांच लाख वोटों से जीती थीं। इस बार कार्यकर्ताओं के विद्रोह के कारण भट्ट को अपनी उम्मीदवारी वापस लेनी पड़ी। इसके बाद भाजपा ने वडोदरा से हिमांग जोशी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। इसी तरह साबरकांठा सीट से भाजपा ने पहले भीकाजी ठाकोर को टिकट दिया, लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी के चलते उन्हें टिकट लौटना पड़ा। इसके बाद भाजपा ने पूर्व कांग्रेस विधायक महेंद्र सिंह बरैया की पत्नी शोभना बरैया को उम्मीदवार बनाया, लेकिन इससे भी कार्यकर्ता खुश नहीं हैं।


इसके अलावा सुरेंद्र नगर लोकसभा सीट, जूनागढ़, पोरबंदर और अमरेली लोकसभा सीट पर भी भाजपा कार्यकर्ता उम्मीदवारों से खुश नहीं हैं। सुरेंद्र नगर सीट से मौजूदा सांसद महेंद्र मुंजपरा की जगह चंदू शिहोरा को टिकट दिया है। इस सीट पर पांच लाख से ज्यादा आबादी वाला तलपदा कोली समाज विरोध में है। जबकि जूनागढ़ से राजेश चुडासमा प्रत्याशी हैं। भाजपा कार्यकर्ता इनका भी विरोध कर रहे हैं। कोली समाज के एक डॉक्टर के सुसाइड नोट में भी चुडासमा का नाम सामने आया था। हाल ही में भरत सुतारिया को अमरेली से टिकट दिए जाने के विरोध में दो गुटों में मारामारी की घटना भी हुई थी। इसी तरह चर्चित पोरबंदर सीट पर भी केंद्रीय मंत्री मनसुख भाई मांडविया के उम्मीदवार बनाए जाने से भी पार्टी कार्यकर्ता नाराज हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि मांडविया बाहरी प्रत्याशी हैं।

रूपाला के बयान पर प्रदेश अध्यक्ष पाटिल तक को मांगनी पड़ी माफी
पार्टी ने राजकोट सीट से केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला को उम्मीदवार बनाया है। रूपाला के एक बयान का इतना विरोध हो रहा है कि उसे थामने के लिए माफी भी मांगी, लेकिन विवाद नहीं रुका। इसे लेकर रूपाला और गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल को दिल्ली भी बुलाया था। रूपाला ने एक बयान में अलग-अलग राजपूत शासकों और अंग्रेजों के बीच सांठगांठ होने का आरोप लगाया है। इसके बाद ही विवाद खड़ा हुआ। नाराज राजपूत समाज उनका विरोध कर रहा है। बढ़ते विरोध के बाद रूपाला ने तीन बार और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने एक बार हाथ जोड़कर माफी भी मांगी, लेकिन समाज मनाने को तैयार नहीं है। राजपूत समाज जगह-जगह पर रूपाला के बॉयकॉट के पोस्टर लगा रहा है।

कार्यकर्ताओं का मान रख बदले टिकट
नाम न छापने के अनुरोध पर गुजरात भाजपा के वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला को बताया कि ये पहली बार दिख रहा है कि भाजपा के लोकसभा उम्मीदवारों का विरोध हो रहा है। आमतौर पर इस तरह का विरोध कांग्रेस पार्टी में होता था। पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह भी यहीं से आते हैं। उन्हें हर सीट का रेगुलर तौर पर फीडबैक दिया जा रहा है। इसलिए कुछ सीटों पर पार्टी ने प्रत्याशी जल्दी बदल दिए। कुछ जगहों पर पार्टी कार्यकर्ताओं में बाहरी व्यक्तियों को उम्मीदवार बनाए जाने से नाराजगी है। सबसे बड़ा विरोध केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला का देखने को मिल रहा है। यह पार्टी के लिए चिंता की बात है। क्योंकि यह भाजपा का न केवल गढ़ है, बल्कि पीएम मोदी ने भी 2002 में पहला विधानसभा उपचुनाव राजकोट से ही लड़ा था।

कांग्रेस ने बताया क्यों हो रहा है विरोध
गुजरात कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी का कहना है कि भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष उम्मीदवारों के चयन के अलावा, दूसरे दलों से नेताओं को लाने और उन्हें उच्च पद देने के लिए अपने समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किए जाने का परिणाम है। कुछ सीटों पर असंतोष स्पष्ट हो गया है, लेकिन कई अन्य सीटों पर यह अभी दिख रहा है और इससे राज्य में सभी 26 सीटों पर जीत दोहराने के भाजपा के प्रयासों पर असर पड़ेगा। गुजरात में सभी 26 लोकसभा सीटों पर पहले चरण में सात मई को मतदान होगा।
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