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BJP: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया भाजपा की सबसे बड़ी 'समस्या' का समाधान, हर स्तर पर दिख रहा ये बदलाव

Thu, 14 Mar 2024 05:42 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 14 Mar 2024 05:42 PM IST
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सार
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की अब तक की सबसे बड़ी शिकायत यही होती थी कि पार्टी के लिए धरना-प्रदर्शन करने और झंडा-बैनर उठाने का काम करते हैं, लेकिन जब लोकसभा या विधानसभा चुनाव में टिकट पाने की बात होती है तो कई बार बाहरी उम्मीदवारों को या टॉप नेताओं के दबाव में दूसरे लोगों को ज्यादा प्रमुखता दे दी जाती है...
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BJP giving preference to party workers for candidates of MP-MLA elections at every level
BJP: PM Modi - फोटो : Amar Ujala/ Rahul Bisht

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकसर अपने भाषणों में यह बात कहते हैं कि दस साल के कार्यकाल में वे 70 साल के उन गड्ढों को भरने का काम कर रहे हैं, जिन्हें अब तक खोदा गया था और जिनके कारण देश अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाया। ऐसा कहते हुए उनका संकेत देश की राजनीति में व्याप्त परिवारवाद और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों की ओर होता है। वे कहते हैं कि अब आने वाले तीसरे कार्यकाल में वे देश को तेज गति से आगे बढ़ाने का काम करेंगे, जिससे देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बनेगा। वे 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने की बात भी करते हैं।  

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह बात केवल देश के संदर्भ में ही लागू नहीं होती। भाजपा नेताओं के साथ-साथ राजनीतिक पंडित भी मानते हैं कि उन्होंने स्वयं भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी बड़ा बदलाव किया है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की अब तक की सबसे बड़ी शिकायत यही होती थी कि पूरे पांच साल वे परिश्रम करते हैं, पार्टी के लिए धरना-प्रदर्शन करने और झंडा-बैनर उठाने का काम करते हैं, लेकिन जब लोकसभा या विधानसभा चुनाव में टिकट पाने की बात होती है तो कई बार बाहरी उम्मीदवारों को या टॉप नेताओं के दबाव में दूसरे लोगों को ज्यादा प्रमुखता दे दी जाती है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में बड़ी निराशा होती थी। कई बार इसका चुनाव परिणाम पर नकारात्मक असर भी पड़ता था।



इसी कारण हार गई थी भाजपा

इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखा गया था, जब दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 के दौरान पार्टी नेतृत्व ने किरण बेदी को लाकर उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा पैदा हुई। वे एक बाहरी व्यक्ति को अपने नेता के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह भाजपा नेतृत्व का उठाया गया बेहद गलत कदम था। इसके कारण पार्टी कार्यकर्ताओं ने पार्टी का साथ नहीं दिया जिससे भाजपा एक जीता हुआ चुनाव हार गई। उसी चुनाव में यदि भाजपा बिना चेहरे के या डॉक्टर हर्षवर्धन जैसे स्थानीय कद्दावर नेता को सामने रखकर चुनाव में उतरी होती तो संभवतः उस चुनाव का परिणाम कुछ और होता।

पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में 2014 में महेश गिरी और 2019 में क्रिकेटर गौतम गंभीर को इसी तरह बाहर से लाकर चुनाव लड़ाया गया था। 2014 में उदित राज और 2019 में गायक हंसराज हंस को उत्तर-पश्चिम दिल्ली की सुरक्षित सीट से बाहर से लाकर चुनाव लड़ाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर हुए इन सभी चुनावों में भाजपा को जीत हासिल हुई थी। लेकिन अपने परिश्रम पर दूसरे लोगों को फलता-फूलता देख भाजपा कार्यकर्ताओं को नेतृत्व के इस निर्णय से निराशा हुई थी। इन सीटों पर पार्टी के जुझारू कार्यकर्ताओं को लग रहा था कि जब पूरा चुनाव मोदी की छवि पर ही होना है, तो बाहरी उम्मीदवारों की जगह अपने कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारना चाहिए था, जो बाद में भी पार्टी के लिए एक असेट का काम करते।

दिल्ली भाजपा के एक पदाधिकारी ने अमर उजाला से कहा कि इस तरह के बाहरी उम्मीदवार पार्टी के लिए वफादार भी नहीं होते। आज कोई नहीं जानता है कि महेश गिरी कहां हैं, उदित राज ने टिकट न मिलने पर कांग्रेस का दामन थाम लिया, तो गौतम गंभीर को कभी क्रिकेट से समय ही नहीं मिला। नेता का प्रश्न था कि ऐसे में पार्टी को इस तरह के लोगों को टिकट क्यों देना चाहिए, जो पार्टी की विचारधारा और जनता की सेवा करने के लिए हमेशा तत्पर न रहते हों। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी जनता की सेवा के लिए प्रतिदिन 18 घंटे काम करते हैं, तो हमें ऐसे उम्मीदवार क्यों देने चाहिए जो राजनीति को 'पार्ट टाइम जॉब' या छवि बनाने का साधन समझते हैं।

दिल्ली की ही तरह कई दूसरे राज्यों में भी इसी तरह का बदलाव देखा गया था। कर्नाटक में पार्टी नेताओं पर बाहरी उम्मीदवारों को ज्यादा प्रमुखता देने से ही हार का सामना करना पड़ा था। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बाहरी उम्मीदवारों को प्रमुखता देने और अपने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप भाजपा पर लगता रहा है। रीता बहुगुणा जोशी जैसे नेताओं को भाजपा का आम कार्यकर्ता आज भी अपना नेता स्वीकार नहीं कर पाया है। स्वामीप्रसाद मौर्य जैसे नेता पार्टी में आये, लाभ लिया और चलते बने। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे लोगों को भाजपा के राजनीतिक मंच का लाभ उठाने देने से बचना चाहिए।

लेकिन अब दिख रहा ये बदलाव

पार्टी कार्यकर्ता मानते हैं कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की तिकड़ी ने कामकाज संभाला है, पार्टी की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। धीरे-धीरे मुख्यमंत्री और मंत्री पद हो या सांसद-विधायक चुनाव के लिए उम्मीदवार, अब पार्टी कार्यकर्ताओं को हर स्तर पर प्रमुखता दी जा रही है। इस समय जारी लोकसभा चुनावों के लिए योग्य उम्मीदवारों के चयन में पार्टी ने अपने कर्मठ कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया है। दिल्ली के सभी सात उम्मीदवार पार्टी से लंबे समय से जुड़े योग्य कार्यकर्ता रहे हैं। इस बार भी पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से एक बॉलीवुड स्टार को चुनाव लड़ाने की बात कही जा रही थी, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने अपने लंबे अरसे से कार्यकर्ता हर्ष मल्होत्रा पर भरोसा जताया।

हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद जब मुख्यमंत्रियों के चयन की बात सामने आई, प्रधानमंत्री ने उन्हीं लोगों पर भरोसा जताया, जो पार्टी के लिए चुपचाप लगातार लंबे समय से काम करते रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ऐसे ही कार्यकर्ताओं में से एक थे। इसके पहले मनोहरलाल खट्टर, पुष्कर सिंह धामी, विप्लव देब और भूपेंद्र पटेल ऐसे ही सामान्य कार्यकर्ता थे, जिन्हें भाजपा नेतृत्व ने बड़ा अवसर उपलब्ध कराया।

ये सभी पार्टी संगठन के कार्यकर्ता थे और चुपचाप मिली हुई जिम्मेदारियों को निभा रहे थे। मुख्यमंत्री बनने के पहले कोई उन्हें जानता तक नहीं था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि ऐसे कार्यकर्ताओं पर थी और सही समय आते ही उन्होंने उन्हें अवसर देने का काम किया। ये नेता अपनी क्षमता सिद्ध भी कर रहे हैं।

यह संदेश दिलाएगा भाजपा को 400 सीटें

भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बार-बार यह संकेत दिया है कि भाजपा में बूथ स्तर पर काम करने वाला एक सामान्य परिवार का कार्यकर्ता भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष बनने का सपना देख सकता है। वे स्वयं पार्टी के एक सामान्य कार्यकर्ता से सर्वोच्च पद पर पहुंचने में सफल रहे हैं। उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सामान्य कार्यकर्ता का सर्वोच्च पद पर पहुंचने का सपना भाजपा में ही पूरा हो सकता है। जबकि दूसरे राजनीतिक दलों में ऊपर के सभी पद एक परिवार विशेष के लोगों के लिए आरक्षित रहते हैं। उन दलों का कोई सामान्य कार्यकर्ता उन पदों तक पहुंचने की बात ही नहीं सोचता, क्योंकि उसे मालूम होता है कि वह पद उनके लिए नहीं है। भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के बीच का यह अंतर अब आम भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा और उत्साह का कारण बन गया है।

नेता के अनुसार, इस सोच का ही परिणाम है कि भाजपा कार्यकर्ता पूरे जोश के साथ काम करता है। और इसी का परिणाम है कि भाजपा दो बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आ चुकी है। उन्होंने कहा कि इस सकारात्मक सोच से भरा कार्यकर्ता ही पार्टी को 400 से अधिक सीटें दिलाने का काम करेगा।

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