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पंजाब में शिअद के हवाले हुई भाजपा
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 21 Dec 2016 03:52 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : file photo
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पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा ने खुद को पूरी तरह से अपने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के हवाले कर दिया है। कभी महाराष्ट्र की तर्ज पर अकेले चुनाव मैदान में उतरने पर गंभीर मंथन करने वाली पार्टी अब न तो शिअद से सीटों की संख्या बढ़ाने का दबाव डाल रही है और न ही सीटों की अदला बदली पर ही नेतृत्व गंभीर है।
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हालत यह है कि शिअद ने अदला बदली के तहत भाजपा के दावे वाली सीटों पर उम्मीदवारों की भी घोषणा कर दी है। हालांकि सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रहा शिअद विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अधिक से अधिक रैलियां कराने पर जोर डाल रही है। चुनाव प्रभारी बनाए गए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर 15 नवंबर के बाद राज्य के दौरे पर भी नहीं गए हैं।
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दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी में शीर्ष स्तर पर महाराष्टï्र की तर्ज पर राज्य में अकेले दम पर चुनाव लडने पर गंभीर मंथन हुआ था। तब पूर्व क्रिकेटर और पूर्व सांसद नवजोत ङ्क्षसह को चेहरा बना कर मैदान में उतरने की रणनीति पर कई बार चर्चा भी हुई। मगर बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बदली परिस्थितियों में पार्टी नेतृत्व ने भी अपनी रणनीति बदल ली।
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तब भी बदली सियासी परिस्थितियों के बावजूद सीटों की संख्या बढ़ाने और कुछ सीटों की अदला बदली करने के लिए शिअद पर दबाव बनाने पर सहमति बनी थी। हालांकि उसके पार्टी नेतृत्व अचानक उदासीन हो गया। यहां तक कि जब शिअद ने पार्टी के दावे वाली सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए तब कहीं से भी विरोध का स्वर नहीं सुना गया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के सवाल पर भी नेतृत्व का रुख उदासीन है।
नेतृत्व परिवर्तन पर बढ़ी गुटबाजी
पंजाब में केंद्रीय मंत्री विजय सांपला को अध्यक्ष बनाने के बाद गुटबाजी और तेज हो गई है। 75 की उम्र सीमा पार कर चुके राज्य सरकार में मंत्री अपने बेटों को मैदान में उतारने के लिए जोर लगा रहे हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष समेत केंद्रीय संगठन में शामिल नेताओं की निगाहें इन मंत्रियों की सीटों पर है।
सांपला जहां अपने पुत्र आशू सांपला की सियासी पारी शुरू कराने की जुगत में हैं, वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश खन्ना की भी निगाहें इन मंत्रियों की सीटों पर हैं।