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BJP List: हिमाचल की तरह कर्नाटक में भी भारी पड़ सकते हैं भाजपा के बागी, शेट्टार को मिलेगा टिकट!
सार
बागियों की नाराजगी का असर भी दिखाई देने लगा है। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शेट्टार की नाराजगी को देखते हुए उन्हें मनाने का फैसला कर लिया गया है। उन्हें कर्नाटक विधानसभा चुनाव में टिकट थमाया जा सकता है।
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नवंबर 2022 में हुए हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भाजपा को बागी उम्मीदवारों की भारी नाराजगी का सामना करना पड़ा था। विधानसभा की 21 सीटों पर बागी उम्मीदवारों ने पार्टी को चुनौती दी और उसे नौ सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। कुछ इसी तरह की तस्वीर कर्नाटक में भी बनती हुई दिखाई पड़ रही है जहां पार्टी की पहली सूची में नाम न आने से बागी उम्मीदवारों ने पार्टी के खिलाफ ताल ठोकने की घोषणा कर दी है।
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ऐसे नेताओं में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार से लेकर लक्ष्मण तक आधा दर्जन से ज्यादा लोग शामिल हैं जो अपनी सीटों पर पूर्व में मजबूती से चुनाव लड़ते रहे हैं। जगदीश शेट्टार जैसे नेता केवल अपनी ही सीट पर नहीं, बल्कि दूसरी सीटों पर भी बड़ा प्रभाव रखते हैं और वहां के चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में यदि पार्टी ने समय रहते बागियों की नाराजगी न थामी तो उसे कर्नाटक में भी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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बागियों की नाराजगी का असर भी दिखाई देने लगा है। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शेट्टार की नाराजगी को देखते हुए उन्हें मनाने का फैसला कर लिया गया है। उन्हें कर्नाटक विधानसभा चुनाव में टिकट थमाया जा सकता है। पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया है। भाजपा की दूसरी सूची आज देर शाम सामने आ सकती है जिसमें उनके नाम की घोषणा की जा सकती है।
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भाजपा शीर्ष नेताओं ने कहा है कि वे जगदीश शेट्टार सहित सभी बागियों के संपर्क में हैं। उन्हें मना लिया जाएगा। शेट्टार बुधवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं जहां उनकी मुलाकात पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से होनी है। माना जा रहा है कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात के बाद उन्हें बेहतर भूमिका के नाम पर संतुष्ट कर लिया जाएगा। इससे पार्टी के बड़े नुकसान की आशंका टल सकती है। हालांकि, अन्य बागी उम्मीदवार अभी भी पार्टी के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
पहली लिस्ट में ये रहा विशेष
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भाजपा महासचिव अरुण सिंह ने 11 अप्रैल को कर्नाटक की पहली लिस्ट जारी की। इसमें 189 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की गई। पार्टी ने पहली सूची में 32 ओबीसी, 30 अनुसूचित जाति, 16 अनुसूचित जनजाति और आठ महिलाओं को टिकट दिया।इसमें 52 उम्मीदवार नए थे। सूची में नौ डॉक्टर, पांच एडवोकेट, तीन शिक्षाविद, एक पूर्व आईएएस, एक पूर्व आईपीएस, आठ सामाजिक कार्यकर्ता और तीन रिटायर्ड कर्मचारी हैं।
सामने आई भाजपा की परेशानी
उम्मीदवारों के नामों को लेकर 9 अप्रैल को पार्टी मुख्यालय पर बैठक हुई थी जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित केंद्रीय चुनाव समिति के सभी सदस्य उपस्थित थे। पार्टी ने नई सूची जारी करते समय नए उम्मीदवारों को अवसर देने को अपनी विशेषता बताया है। साथ ही सूची में पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोगों को जगह देने की कोशिश की है।
लेकिन इसमें सेक्स कांड के आरोपी पूर्व मंत्री को दुबारा स्थान देने से जिताऊ उम्मीदवारों को लेकर पार्टी की असली परेशानी भी सामने आ गई। भाजपा के 80 वर्षीय बूढ़े शेर बीएस येदियुरप्पा की नाराजगी को थामने के लिए न चाहते हुए भी उनके बेटे विजयेंद्र को शिकारीपुरा सीट से मैदान में उतारना पड़ा है। पार्टी के कई दिग्गज नेता परिवारवाद के आरोपों से बचने के लिए विजयेंद्र को इस सीट से उतारने के खिलाफ थे। लेकिन सूची बताती है कि आखिरकार भाजपा के बड़े नेताओं को येदियुरप्पा की बात मानने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
भाजपा ने 52 नए चेहरों को मैदान में उतारकर सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को कमजोर करने का काम किया है। नए चेहरों को उतारकर सरकार विरोधी रुझान को कमजोर करने का उसका दांव गुजरात-उत्तराखंड सहित कई राज्यों में कारगर साबित हुआ है। लेकिन इसके बाद भी कई दागदार चेहरों का सूची में स्थान पाना भ्रष्टाचार पर 'जिताऊ उम्मीदवारों' के भारी पड़ने का संकेत माना जा रहा है।