केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की नाराजगी बन सकती है दिल्ली में भाजपा की परेशानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चुनावों के बीच कोई सरकार किसी भी मतदाता वर्ग को नाराज करने का खतरा नहीं मोल लेना चाहती। लेकिन दिल्ली में मतदान के ठीक पहले एक ऐसा मुद्दा गरमा गया है जो चुनाव में भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है। केंद्रीय संगठनों के कई विभागों के सरकारी कर्मचारी अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर सरकार से नाराज हैं। इनमें किसी वर्ग के कर्मचारियों को उनके मनमुताबिक वेतन में बढ़ोतरी न हो पाना है तो किसी विभाग के कर्मचारियों को वीआरएस के पेशकश उनकी नाराजगी की वजह बना हुआ है। दिल्ली जैसे क्षेत्र में यह कई सीटों पर भाजपा को परेशानी में डालने वाला मुद्दा है क्योंकि यहां भारी संख्या में सरकारी कर्मचारी रहते हैं जो विभिन्न वजहों से सरकार से नाराज बताए जाते हैं।
नई दिल्ली क्षेत्र में रहने वाले केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के कर्मचारियों को उन्हें मिले सरकारी आवासों को यथाशीघ्र खाली करने के लिए विभाग की तरफ से नोटिस थमाया जा रहा है। विभाग का कहना है कि इन आवासों की जगह नए मॉडल के आवास विकसित किये जाएंगे और उसके बाद कर्मचारियों को वहां पर स्थान दिया जाएगा। लेकिन बच्चों की परीक्षाओं के बीच बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए कर्मचारियों को हटाने का निर्देश देने पर सरकारी कर्मचारियों ने इसके विरोध में अपनी आवाज बुलंद करनी शुरु कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, इन फ्लैटों में 810 सरकारी कर्मचारियों के परिवार इनमें रहते हैं जिसमें कुल पांच हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। अगर विभागीय आदेश वापस नहीं लिया जाता है तो इससे इन परिवारों पर असर पड़ना तय है।
नई दिल्ली सीट के लिए बना बड़ा मुद्दा
राजधानी की नई दिल्ली सीट पर सबसे ज्यादा वोट बैंक सरकारी कर्मचारियों का ही है। विभिन्न विभागों के कर्मचारी यहां पर बने सरकारी फ्लैटों में रहते हैं। ज्यादातर कर्मचारी यहां पर वोटर भी बन गए हैं। यही कारण है कि अब नई दिल्ली सीट पर यह एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है। सीपीडब्ल्यूडी और एआईआर कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने इस मुद्दे पर कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन से मुलाकात की और उनसे इस मुद्दे पर उनका समर्थन मांगा। अजय माकन ने कर्मचारियों को इस बात का वायदा किया है कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो वे कर्मचारिय़ों की नौकरी और आवास की रक्षा करेंगे।
बीएसएनएल कर्मचारियों की छंटनी भी बना अहम मुद्दा
नई दिल्ली सीट पर बीएसएनएल के कर्मचारी भी बड़ी संख्या में रहते हैं। इन कर्मचारियों को बीएसएनएल के घाटे में होने का हवाला देकर उनसे वीआरएस लेने को कहा जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस मामले में उनकी वीआरएस लेने की उम्र भी पचास तक कम कर दी गई है। इसके अलावा रिटायरमेंट की उम्र 60 साल से घटाकर 58 कर दी गई है। इससे उन लोगों के ऊपर संकट खड़ा हो गया है। एक कर्मचारियों के संगठन के एक प्रतिनिधि राकेश श्रीवास्तव के मुताबिक उन्हें चार महीने बाद अब एक महीने का वेतन दिया गया है। ऐसे में परिवारों का रहना मुश्किल हो गया है जबकि सरकार किसी भी कीमत पर इन विभागों का प्राइवेटाइजेशन करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी कर्मचारी इस चुनाव में सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे।
वहीं, कांग्रेस प्रतिनिधि अजय माकन ने बीएसएनएल के प्राइवेट हाथों में जाने से रोकने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर पीएसयू को बचाने की कोशिश की जाएगी जो अभी तक हमारी अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देते आए हैं।