बिहार की तरह यूपी में भी भाजपा गठबंधन का पेंच फंसा
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गठबंधन के सवाल पर बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में भी भाजपा को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल भाजपा की सहयोगी अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) ने 5 दर्जन सीटों पर दावा जता दिया है। बिहार में गठबंधन दलों के बेहद निराशाजनक परिणाम के कारण सियासी झटका झेल चुकी भाजपा इन दोनों ही दलों को एक दर्जन से ज्यादा सीट देने के लिए तैयार नहीं है।
पार्टी के लिए परेशानी का कारण अपना दल के दूसरे धड़े की नेता कृष्णा पटेल के सूबे के मुख्यमंत्री के संपर्क में होने के अलावा जदयू के साथ सपा के गठबंधन की बन रही संभावना भी है। दरअसल पार्टी पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुर्मी और इसकी समकक्ष जातियों को साधने की है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने न सिर्फ इसी बिरादरी के केशव प्रसाद मौर्य को अध्यक्ष बनाया, बल्कि उज्जवला सहित कई योजनाओं की शुरुआत भी पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही की।
उत्तर प्रदेश के रणनीतिकारों की टीम के एक अहम सदस्य के मुताबिक अपना दल ने 50 से अधिक सीटों पर दावा जताया है। जिसे देना संभव नहीं है। बिहार में भी पार्टी के सहयोगियों ने दबाव बना कर अधिक सीटें तो ले ली, मगर बेहद बुरा प्रदर्शन कर पार्टी के अरमानों पर पानी फेर दिया। पार्टी ने तय किया है कि इन दोनों दलों को अधिकतम एक दर्जन सीट दी जाए। हालांकि वर्ष 2007 में सोनेलाल पटेल के रहते भाजपा ने अपना दल को 38 सीटें दी थी, मगर अब स्थिति दूसरी है।
रणनीतिकारों की टीम में भी मतभेद
पार्टी की खुद की योजना कम से कम 360 सीटों पर लड़ने की है। दो-तीन और छोटे-छोटे दलों को भी गठबंधन के तहत सीटें दी जानी है। ऐसे में इन दोनों सहयोगियों के लिए पार्टी के पास देने के लिए बहुत कुछ नहीं है। चूंकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में अंतिम चरणों में वोट डाले जाएंगे। ऐसे में पार्टी सीटें तय करने के मामले में बहुत ज्यादा हड़बड़ी में नहीं है।
पूर्वी यूपी पर भाजपा की निगाहें
विधानसभा चुनावों की बात करें तो बीते कई चुनावों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। लोकसभा चुनाव में जरूर मोदी के करिश्मे से पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को दुहराने के लिए ही पार्टी की निगाहें कुर्मी और इसकी समकक्ष जातियों पर है। इसी रणनीति के तहत पार्टी अध्यक्ष भी इसी क्षेत्र और इसी बिरादरी से दिया गया। कई केंद्रीय योजनाएं इसी क्षेत्र से शुरू की गई।
रणनीतिकारों की टीम में भी मतभेद
इस सूबे में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री के सामने रणनीतिकारों की टीम में संतुलन बैठाने की भी चुनौती होगी। टिकट केसवाल पर इस टीम में बीते कुछ महीने से तीखे मतभेद हैं। खासबात यह है कि टीम के कुछ सदस्य शाह के समर्थक हैं तो कुछ पीएम मोदी के। ऐसे में अगर टिकट वितरण में संतुलन नहीं बैठाया गया तो उम्मीदवारों की घोषणा के बाद विवाद खड़ा हो सकता है।