पीएम राहत कोष का पैसा राजीव गांधी फाउंडेशन को देकर कांग्रेस ने किया धोखा: नड्डा
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भारतीय जनता पार्टी का कांग्रेस पर हमला लगातार जारी है। आज भाजपा ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) को लेकर कांग्रेस पर हमला किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने आरोप लगाया कि भारत के लोगों ने अपने जरूरतमंद साथी नागरिकों की मदद के लिए इसमें दान किया था लेकिन इसके पैसे को एक परिवार के संगठन में हस्तांतरण किया गया।
जेपी नड्डा ने कहा, 'पीएमएनआरएफ संकट में लोगों की मदद करने के लिए बनाया गया था लेकिन यूपीए कार्यकाल में राजीव गांधी फाउंडेशन (आरजीएफ) को पैसे दान किए जा रहे थे। पीएमएनआरएफ के बोर्ड में कौन बैठा था? सोनिया गांधी। आरजीएफ का अध्यक्ष कौन है? सोनिया गांधी। पूरी तरह से निंदनीय, नैतिकता की उपेक्षा, प्रक्रियाओं और पारदर्शिता को लेकर किसी को फिक्र नहीं थी।'
भाजपा अध्यक्ष ने कहा, 'भारत के लोगों ने अपने साथी नागरिकों को जरूरतमंदों के समय मदद करने के लिए अपनी मेहनत की कमाई को पीएमएनआरएफ में दान किया था। इस सार्वजनिक धन को परिवार चलाने द्वारा संचालित एक फाउंडेशन में हस्तांतरित करना न केवल एक संगीन धोखाधड़ी है बल्कि भारत के लोगों के लिए एक बड़ा धोखा भी है।'
People of India donated their hard-earned money to PMNRF to help their fellow citizens in need. To divert this public money into a family run foundation is not only a brazen fraud but also a big betrayal of the people of India: BJP National President Jagat Prakash Nadda
— ANI (@ANI) June 26, 2020
इससे पहले शुक्रवार को मध्यप्रदेश की वर्चुअल जनसंवाद रैली को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा था कि 2017 में दोकलम गतिरोध के दौरान राहुल गांधी गुप्त रूप से भारत में चीन के राजदूत के साथ दिल्ली में वार्ता कर रहे थे। आज गलवां घाटी को लेकर भी कांग्रेस देश को गुमराह कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि चीन से राजीव गांधी फाउंडेशन को मोटी रकम मिली है।
उन्होंने कहा कि गलवां घाटी में हुई घटना पर भी कांग्रेस ने राजनीति की है। ये वही कांग्रेस है, जब 2017 के अगस्त में चीन और भारत का विवाद चल रहा था, उस समय राहुल गांधी चीन के राजदूत के साथ गुपचुप मुलाकात कर रहे थे। गलवां घाटी के विषय को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने कहा कि मोदी जी देश के लिए हम सब एक साथ खड़े हैं, आप आगे बढ़ें हम सभी साथ हैं। सिर्फ एक परिवार ने उनकी नीयत और नीति पर प्रश्न खड़े करने शुरू किए।