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प्रधानमंत्री मोदी का एक दशक: डिजिटल क्रांति से सीधे खाते में पैसे पहुंचने तक...आम जिंदगी को मिली नई रफ्तार

Wed, 17 Sep 2025 05:28 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 17 Sep 2025 05:28 AM IST
सार

एक दशक से नवाचारों के प्रहरी बने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 75 वर्ष के होने जा  रहे हैं। पीएम मोदी ने अपने अभिनव संकल्प व प्रयोगों से न सिर्फ लोगों की सोच को बदला है, बल्कि आम जिंदगी को नई रफ्तार दे दी है। इससे इतर, शासन और विदेश नीति को देखें तो हर जगह बुनियादी बदलाव से उन्होंने देश की तस्वीर ही बदल दी है।

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Birthday Special: Common man got new momentum in one decade of PM Modi's tenure
पीएम मोदी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिल चुकाने से लेकर मेट्रो और वंदे भारत में सफर तक, दवाइयां खरीदने से लेकर सरकारी लाभ लेने तक...भारत में रोजमर्रा की जिंदगी की परिभाषा ही बदल गई है। अब सम्मान, तेजी और पारदर्शिता को लोग विशेष सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के अधिकार के रूप में चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दशक के कार्यकाल में व्यवस्था बदली तो लोगों की सोच भी बदल गई। देश में कभी जो नामुमकिन लगता था, वह अब आदत बन गई है।

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एक दशक पहले के हालात से तुलना करें, तो जिंदगी के ये बदलाव क्रांतिकारी लगते हैं। तब रेलवे काउंटर पर लंबी लाइनें, दुकानों पर छुट्टे के लिए मिन्नतें, गैस कनेक्शन के लिए रिश्वत देना या दवाइयों के लिए पैसे न होने की वजह से इलाज छोड़ देना...यह सब सामान्य स्थिति थी। हम इसे स्वीकार कर लेते थे, क्योंकि और कोई रास्ता नहीं दिखाई देता था। मगर आज आप सब्जीवाले को फोन से पेमेंट करते हैं, टोल प्लाजा पर बिना रुके निकल जाते हैं, सस्ते डाटा पर कभी भी मूवी स्ट्रीम करते हैं, और गैस सब्सिडी सीधे आपके खाते में आती है। पीएम मोदी के कार्यकाल में रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजें चुपके से जिंदगी में दाखिल हो गई हैं। जानते हैं ऐसे ही 10 बदलावों को जिसने रोजमर्रा की जिदंगी पूरी तरह बदल दी है...
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समृद्ध महिलाएं, सशक्त देश
महिलाओं को सक्षम व आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएम मोदी ने लखपति दीदी योजना शुरू की। इसमें महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के साथ व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन भी दिया जाता है। इसी के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए नमो ड्रोन दीदी योजना शुरू की। इसका लक्ष्य उन्हें ड्रोन तकनीक से लैस करना है। इसके तहत महिलाओं को ड्रोन के जरिये खेतों में उर्वरकों और कीटनाशकों के छिड़काव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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फास्टैग व ट्रांसपोर्ट की सुविधा
अब टोल पर लंबी लाइनें नहीं लगतीं। ईंधन बचता है, सफर तेज होता है और सामान की ढुलाई आसान हुई है। इससे न सिर्फ व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, बल्कि अगले दिन डिलीवरी वाली ई-कॉमर्स संस्कृति भी मजबूत हुई है।
 
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सस्ता डाटा और इंटरनेट
सस्ते इंटरनेट ने छोटे शहरों और गांवों की तस्वीर बदल दी है। किसान अब फोन पर मंडी के दाम देखते हैं, बच्चे ऑनलाइन क्लास लेते हैं और गांव के युवा कोडिंग सीख रहे हैं। इस डिजिटल लहर ने ओटीटी प्लेटफॉर्म से लेकर एआई स्टार्टअप तक नई अर्थव्यवस्था बनाई है और भारत की प्रतिभा को निखारा है।

यूपीआई व डिजिटल पेमेंट
अब सड़क किनारे ठेले लगाने वाला भी हर बिक्री को फोन के एक टैप से ट्रैक करता है। कर्ज लेना आसान हो गई है। पेमेंट में पारदर्शिता आई है और भारत रियल-टाइम पेमेंट में दुनिया का लीडर बन गया है। यूपीआई से अब विदेश में भी पैसे भेजे जा सकते हैं, जिससे प्रवासी परिवारों को बड़ी बचत हो रही है।

मेट्रो के विस्तार से सफर आसान
दिल्ली से बंगलूरू तक, मेट्रो ने ट्रैफिक में बर्बाद होने वाला समय और प्रदूषण कम किया है। मेट्रो कॉरिडोर के आसपास रियल एस्टेट फल-फूल रहा है और शहरों का विकास नया रूप लेने लगा। मेट्रो ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को आकर्षक बनाया, जहां हर वर्ग साथ यात्रा करता है, जिससे टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं, वंदेभारत जैसी ट्रेनों   ने सफर का समय कम कर बड़ी राहत दी है।

जन औषधि केंद्र
अब मेडिकल बिल की चिंता कम हो गई है और चिकित्सीय खर्च के बोझ से परिवार तबाह नहीं होते। सस्ती जेनेरिक दवाइयों ने इलाज को सबकी पहुंच में ला दिया है, जिससे लोग स्वस्थ और ज्यादा उत्पादक बन रहे हैं। जेनेरिक दवाइयों की मांग ने भारतीय फार्मा को विश्व की फार्मेसी के रूप में और मजबूत किया है।

जन-धन खाते
लाखों लोगों, खासकर महिलाओं ने पहली बार वित्तीय आजादी महसूस की है। मजदूरी और सब्सिडी सीधे खाते में आने लगी है। परिवारों ने इस बचत को बैंकिंग सिस्टम में डाला। इससे बैंक मजबूत हुए और पूरे देश में ऋण की उपलब्धता बढ़ गई।

क्यूआर कोड से व्यापार में क्रांति
चाय की दुकान से लेकर मॉल तक, क्यूआर कोड ने छोटे दुकानदारों को वित्तीय पहचान दी है, जिससे ऋण, बीमा और बिजनेस बढ़ाने के नए रास्ते खुले हैं। बिना दबाव के टैक्स अनुपालन बढ़ गया है। भारत अब अफ्रीका और एशिया के देशों के लिए सस्ती वित्तीय समावेशन का मॉडल बन गया है।

 गिग इकॉनमी का उभार : गिग इकॉनमी ने जिंदगी बदल दी है और 10 मिनट में किराना डिलीवरी, एप-आधारित टैक्सी, और फूड ऑर्डर अब आम बात हो गई है। इससे शहरों की लॉजिस्टिक्स, खाने की आदतें, और खपत के पैटर्न बदल गए हैं। लाखों लोगों छात्रों, महिलाओं, और अर्ध-कुशल कामगारों-के लिए फ्लेक्सिबल कामकाज आजीविका का साधन बन गया है।

डिजिलॉकर व ई-गवर्नेंस
कागज की फोटोकॉपी और लंबी लाइनों का जमाना बीते दिनों की बात हो चुका है। डिजिटल वेरिफिकेशन तुरंत होता है। उद्यमी तेजी से कारोबार के लिए कर्ज ले सकते हैं, लोग भी अब सरकार से ज्यादा आत्मविश्वास से जुड़ते हैं। पेपर रहित संस्कृति स्कूलों व निजी कंपनियों को डिजिटल बनने के लिए प्रेरित कर रही है।


 

सार्वजनिक सेवाएं व व्यवहार में बदलाव
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) ने बिचौलियों को हटाकर सरकारी योजनाओं के पैसे को बिना रिश्वत या देरी के लोगों तक पहुंचाया है। स्वच्छ भारत ने महिलाओं को शौचालय के जरिये सम्मान और सुरक्षा दी है, साथ ही साफ-सफाई के प्रति नागरिकों में गर्व की भावना भी पैदा हुई है। आज लोग डीबीटी, क्यूआर कोड और डिजिटल पारदर्शिता को सुधार नहीं, बल्कि सरकार का बुनियादी हिस्सा मानते हैं।


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