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सेनाध्यक्ष ने कहाः सेना का मतलब नौकरी नहीं, यहां जरूरत है समर्पण और देशभक्ति की

Fri, 14 Dec 2018 08:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Updated Fri, 14 Dec 2018 08:31 AM IST
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Bipin Rawat said Indian Army should not be looked upon as a job provider organisation
बिपिन रावत

भारतीय सेना को एक नौकरी प्रदान करने वाले संस्थान के तौर पर नहीं देखना चाहिए। यह बात सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने गुरुवार को पुणे में कहीं। उन्होंने उन जवानों को चेतावनी दी जो बीमारी या अक्षमता का बहाना बनाकर अपनी ड्यूटी से बचते हैं और लाभ प्राप्त करते हैं। उन्होंने उन सेवानिवृत्त और सेवारत जवानों को पूरी मदद देने का आश्वासन दिया जो ड्यूटी के दौरान सच में अक्षमता का शिकार हुए हैं।

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रावत ने कहा, 'अक्सर देखा गया है कि लोग भारतीय सेना को एक रोजगार का जरिया मानते हैं। नौकरी हासिल करने का जरिया। मैं आपको चेतावनी देता हूं कि अपने दिमाग से इस गलतफहमी को निकाल दें। सेना रोजगार का जरिया नहीं है। यदि आप सेना में शामिल होना चाहते हैं तो आपको शारीरिक और मानसिक मजबूती दिखानी होगी। आपके अंदर कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता होनी चाहिए।'
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सेनाध्यक्ष ने कहा, 'कई लोग नौजवान मेरे पास आते हैं और कहते हैं जी मुझे सेना में नौकरी चाहिए। मैं उन्हें कहता हूं कि भारतीय सेना नौकरी का साधन नहीं है। नौकरी लेनी है तो रेलवे में जाएं या अपना बिजनेस खोल लीजिए।' उन्होंने यह बातें एक कार्यक्रम में कहीं जिसमें दक्षिणी कमान, दक्षिण पश्चिमी कमान और केंद्रीय कमान के 600 सेवारत और सेवानिवृत्त विकलांग जवान मौजूद थे।
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सेना ने 2018 को 'ड्यूटी लाइन में अक्षम सैनिकों का वर्ष' के तौर पर घोषित किया हुआ है। जनरल रावत ने कहा कि जो जवान और अधिकारी अक्षमता का बहाना करेंगे उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'मैंने सैनिकों और अधिकारियों का एक वर्ग देखा है जो खुद को इस आधार पर अक्षम बताते हैं कि वह उच्च रक्त चाप, हाइपरटेंशन और मधुमेह से पीड़ित हैं। इस आधार पर वह मुश्किल जगहों पर तैनाती से बच जाते हैं।' 


बिपिन रावत ने कहा, 'ऐसे लोग शारीरिक और मानसिक तौर पर कमजोर होते हैं और तनाव का सामना नहीं कर सकते हैं। उन्हें असल अक्षम व्यक्तियों को देखकर खुद पर शर्म आनी चाहिए जिन्होंने ऐसी हालत में भी अभूतपूर्व परफॉरमेंस दी है।'

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