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Hindi News ›   India News ›   Bipin Rawat Chopper Crash: Who was scared or angry with CDS The story of mid blast or arson is not being embraced the secret will open from the black box 

बिपिन रावत से कौन डरा या नाराज था: गले नहीं उतर रही 'मिड ब्लास्ट' या 'आगजनी' की कहानी, ब्लैक बॉक्स से खुलेंगे राज!  

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 09 Dec 2021 06:11 PM IST
सार

एक प्रत्यक्षदर्शी ने मीडिया को बताया कि उसने आसमान से लोगों को गिरते हुए देखा था। दूसरे लोगों का कहना है कि हेलीकॉप्टर से जो लोग गिरे थे, वे आग की लपटों से जूझ रहे थे। एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) ने बताया, जिस जगह पर जनरल रावत का हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ है, वहां से 10-12 किलोमीटर की दूरी पर वेलिंगटन में हेलीपैड बना था।

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Bipin Rawat Chopper Crash: Who was scared or angry with CDS The story of mid blast or arson is not being embraced the secret will open from the black box 
हेलीकॉप्टर क्रैश - फोटो : ANI

विस्तार

सीडीएस जनरल बिपिन रावत जिस MI-17V5 हेलीकॉप्टर में सवार थे, उसके क्रैश होने के कारणों की जांच शुरु हो गई है। हेलीकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है। इस हादसे में 14 लोगों में से केवल ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ही जीवित बचे हैं। हालांकि वरुण सिंह की हालत बेहद नाजुक है और उन्हें लाइफ स्पोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। 

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एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) का कहना है कि इस मामले की जांच में कई पहलुओं का ध्यान रखना होगा। कई सवाल ऐसे भी हैं जो तकनीकी जांच से परे हैं। जैसे, जनरल बिपिन रावत से कौन डरा हुआ था, कौन नाराज था। अमूमन चीन और पाकिस्तान को लेकर, सीडीएस की नीति व बयान आक्रामक रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि हेलीकॉप्टर कम ऊंचाई पर था। उसके नीचे गिरने के बाद आग नहीं लगी, बल्कि ऊंचाई पर ही लपटें नजर आ रही थी। ब्लैक बॉक्स, एफडीआर और एटीसी के साथ बातचीत में 'मिड ब्लास्ट', आगजनी, डर या नाराजगी जैसे कारणों का पता लग सकेगा। जांच टीम को कम ऊंचाई के बादलों पर गौर करना होगा। 
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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीरवार को लोकसभा में बताया कि हेलीकॉप्टर हादसे की जांच, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (ट्रेनिंग कमांड) एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह करेंगे। जांच टीम, घटना स्थल पर पहुंच चुकी है। जनरल रावत का हेलीकॉप्टर जब क्रैश हुआ तो वहां का मौसम कैसा था, सबसे बड़ा सवाल यही है। कुछ लोगों का कहना है कि मौसम साफ था। 

एक प्रत्यक्षदर्शी ने मीडिया को बताया कि उसने आसमान से लोगों को गिरते हुए देखा था। दूसरे लोगों का कहना है कि हेलीकॉप्टर से जो लोग गिरे थे, वे आग की लपटों से जूझ रहे थे। एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) ने बताया, जिस जगह पर जनरल रावत का हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ है, वहां से 10-12 किलोमीटर की दूरी पर वेलिंगटन में हेलीपैड बना था। ये हेलीपैड बॉल टाइप का है। इसके तीन तरफ पहाड़ी है। वहां मौसम का मिजाज हर पल बदलता रहता है। विंटर मानसून में कहां, किस ओर से कब बादल आ जाए, कुछ नहीं पता होता। कम ऊंचाई पर बादल बहुत तेज गति से आते हैं। कई बार तो तीन-चार मीटर की दूरी पर कुछ नजर नहीं आता। ऐसे में जांच टीम को इस अहम पहलू पर गौर करना होगा। 

इस सवाल के जवाब में कि क्या इस घटना के पीछे कोई 'शरारत' हो सकती है, कमोडोर सिवाच का कहना है, जनरल रावत से खासतौर पर पड़ोसी देश, मसलन चीन और पाकिस्तान डरे हुए थे, नाराज थे। बिपिन रावत ने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जिस तेजी के साथ शुरु की थी, उससे पड़ोसी देशों की सरकारें परेशान थी। 

कुछ लोग कह रहे हैं कि हेलीकॉप्टर कम ऊंचाई पर था और आसमान में ही उससे आग की लपटें निकल रही थी। जांच टीम को ये प्वाइंट देखना पड़ेगा। अगर आसमान में ही हेलीकॉप्टर जला है तो कहानी कुछ और हो सकती है। ये बात उस समय और भी ज्यादा मायने रखती है, जब दूसरे चश्मदीद यह कह रहे हैं कि हादसे से पहले हेलिकॉप्टर बहुत कम ऊंचाई पर उड़ रहा था। एकाएक वह नीचे की तरफ आया और कटहल के पेड़ से टकरा गया। जब हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ तो उस वक्त मौसम पूरी तरह साफ था। साफ मौसम में हादसा होना, इसे बहुत गंभीरता से लिया जाता है। साजिश या शरारत, ये एंगल भी जांचा जाएगा।

ब्लैक बॉक्स से सौ फीसदी जानकारी मिल जाती है, एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) ने कहा, इसमें पायलट की पूरी बातचीत रिकॉर्ड रहती है। एटीसी के साथ हेलीकॉप्टर को लेकर क्या बात हुई, कोई सिग्नल भेजा गया, हेलीपैड पर कोई दिक्कत रही, क्या कम ऊंचाई को लेकर कोई समस्या आई, हेलीकॉप्टर का बैक एंगल, चौपर की स्पीड, ऊंचाई, पावर, आरपीएम, ये सब जानकारी ब्लैक बॉक्स व दूसरे रिकॉर्डिंग उपकरण एफडीआर रिपोर्ट, डेटा रिकॉर्डर व वायस रिकॉर्डर की मदद से मिल सकती हैं। 


अगर कोई पहाड़ी दो हजार फुट ऊंची है और हेलीकॉप्टर 18 सौ फुट की ऊंचाई पर उड़ रहा है तो टकराने के चांस बने रहते हैं। यदि उस स्थिति में तेज गति वाला बादल आ जाए तो हादसे की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि जांच टीम यह देखेगी कि हेलीकॉप्टर में आग कैसे लगी है। क्या कोई भारी वस्तु हेलीकॉप्टर से टकराई थी, लो फ्लाई, मिड ब्लास्ट, आगजनी और किसी दूसरी साजिश की आशंका, इन सब पहलुओं को जांच के दौरान देखा जाएगा। 
हेलीकॉप्टर फुल अथॉरिटी डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल प्रणाली से लैस था। पायलट, अपनी मर्जी से कम ऊंचाई के दौरान यदि इंजन पर अधिक भार डालने की कोशिश करता तो डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल उसे रोक देता है। हालांकि ब्लैक बॉक्स से बहुत कुछ पता चलता है, लेकिन वे बातें सार्वजनिक तौर कभी बाहर नहीं आती।    

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