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बिहार: 2003 की सूची वाले मतदाताओं को नहीं देना होगा जन्म प्रमाणपत्र, EC ने बताया- 60% वोटर्स को होगी सहूलियत

Sun, 29 Jun 2025 10:22 PM IST
निर्मल कांत एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 29 Jun 2025 10:22 PM IST
सार

चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार में 2003 की मतदाता सूची को फिर से वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा, जिसमें 4.96 करोड़ लोगों के नाम हैं। इनमें शामिल लोगों को जन्मतिथि या जन्मस्थान साबित करने के लिए दस्तावेज नहीं देने होंगे। बाकी 3 करोड़ मतदाताओं को प्रमाण के लिए दस्तावेज देने होंगे। यह प्रक्रिया सूची को सही और पारदर्शी बनाएगी।

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bihar voters in 2003 list will not have submit birth certificate, EC said 60 per cent voters convenience
चुनाव आयोग - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

चुनाव आयोग (ईसी) बिहार में वर्ष 2003 में गहन पुनरीक्षण के बाद तैयार की गई मतदाता सूची को जल्द ही अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर देगा, जिसमें लगभग 4.96 करोड़ मतदाता के नाम शामिल हैं। इसका फायदा यह होगा कि इसमें जिन लोगों के नाम शामिल हैं, वे राज्य में दो दशक के बाद हो रही गहन समीक्षा के लिए नामांकन प्रपत्र के साथ संलग्न करने के लिए प्रासंगिक हिस्से को निकाल सकेंगे।
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आयोग ने बताया है कि बिहार के चुनावी तंत्र को जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक, 2003 की सूची में जिन 4.96 करोड़ मतदाताओं (कुल मतदाताओं में करीब 60 फीसद) के नाम हैं उन्हें अपनी जन्म तिथि या जन्म स्थान साबित करने के लिए समर्थन में कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, इसके लिए उन्हें उस मतदाता सूची का प्रासंगिक हिस्सा संलग्न करना होगा।
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चुनाव आयोग के मुताबिक, शेष तीन करोड़ यानी करीब 40 प्रतिशत मतदाताओं को अपना जन्म स्थान या जन्म तिथि प्रमाणित करने के लिए 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज उपलब्ध कराना होगा। एक अधिकारी ने बताया, मूल प्रक्रिया यह है कि शेष तीन करोड़ मतदाताओं में से प्रत्येक व्यक्ति की पहचान की जाए, उसके बाद ही उनके नाम सूची में शामिल किए जाएं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची का हिस्सा न रहे।

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बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। राज्य में इसी साल अक्तूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगा कि पुनरीक्षण कार्य करते समय कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और कोई भी अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो। ईआरओ मतदाता सूची में नाम दर्ज करने से पहले प्रत्येक व्यक्ति की पात्रता संतुष्ट होने के बाद ही इसे सत्यापित करेंगे।

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