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बिहार आश्रयगृह मामला: सीबीआई ने दोषी लोक सेवकों के खिलाफ की कार्रवाई की सिफारिश
Sat, 27 Jun 2020 03:11 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 27 Jun 2020 03:11 PM IST
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supreme court
- फोटो : ANI
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सीबीआई ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि केवल दो मामलों को छोड़कर बिहार के 17 आश्रयगृहों में यौन एवं शारीरिक उत्पीड़न के आरोपों के मामले में उसकी जांच पूरी हो गई है और उसने कुछ मामलों में जिलाधिकारियों समेत ‘दोषी’ लोकसेवकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
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सीबीआई ने कहा कि कई मामलों में आश्रयगृह संचालित कर रहे एनजीओ और लोकसेवकों की ‘घोर लापरवाही’ का पता चला है और दोषी सरकारी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने तथा एनजीओ का पंजीकरण रद्द करने और उन्हें एवं उनके पदाधिकारियों को काली सूची में डालने की सिफारिश संबंधी रिपोर्ट बिहार सरकार को सौंपी गई है।
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सीबीआई ने न्यायालय में दायर याचिका में कहा है कि मुजफ्फरपुर एवं मोतिहारी में आश्रय गृहों के मामले में जांच अभी जारी है और 13 मामलों में सक्षम अदालतों में अंतिम रिपोर्ट जमा की जा चुकी हैं। ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस’ (टीआईएसएस) की रिपोर्ट में बिहार के इन आश्रयगृहों में शारीरिक एवं यौन उत्पीड़न किए जाने के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने नवंबर 2018 में सीबीआई से इन आरोपों की जांच करने को कहा था।
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यह मामला शीर्ष अदालत के सामने उस समय आया था, जब वह मुजफ्फरपुर के आश्रयगृह के मामले की सुनवाई कर रही थी, जहां कई लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया गया था। बाद में, एक निचली अदालत ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले में 19 लोगों को दोषी ठहराया था।
सीबीआई ने न्यायालय से कहा कि नवंबर 2018 के आदेश के बाद उसने शेष 16 आश्रय गृहों के मामलों की जांच भी अपने हाथ में ले ली थी और बिहार के 10 विभिन्न जिलों में 12 नियमित मामले एवं चार प्रारंभिक जांच दर्ज की गईं। उसने बताया कि दो मामलों में जांच जारी है। इसके अलावा शेष मामलों में जांच पूरी हो गई है।