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Bihar Politics: नीतीश-तेजस्वी की काट खोजने जुटेंगे शीर्ष BJP नेता, पुराने सहयोगियों को साधने की हो रही तैयारी

Tue, 13 Jun 2023 02:55 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 13 Jun 2023 02:55 PM IST
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सार
बिहार भाजपा के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि बदलते समय में नीतीश और तेजस्वी यादव की जातीय पकड़ कमजोर हुई है। तेजस्वी यादव की यादव जाति भी अब आरजेडी के पीछे एकजुट नहीं है। भाजपा ने इन जातियों के नित्यानंद राय और रामकृपाल यादव जैसे नेताओं को आगे बढ़ाने की जो मुहिम शुरू की थी, उससे यह जातीय गठबंधन टूटा है...
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Bihar Politics: Top BJP leaders from bihar will on 14 June in delhi to counter Nitish kumar and Tejashwi yadav
Bihar News: Nitish Kumar - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt

विस्तार

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव भाजपा के लिए केवल बिहार में ही अबूझ पहेली नहीं बन गए हैं, बल्कि अब वे राष्ट्रीय राजनीति में भी उसके सामने बड़ी चुनौती पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। नीतीश का जातीय जनगणना का दांव चला तो भाजपा को केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों से लेकर दक्षिण तक में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए भाजपा ने बिहार कोर कमेटी के दिग्गज नेताओं की शीर्ष बैठक 14 जून को पार्टी के दिल्ली स्थित मुख्यालय में बुलाई है। इसमें 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को तैयार करने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, जिस तरह नीतीश कुमार 23 जून को विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक कर भाजपा को घेरने की रणनीति बना रहे हैं, उसके काट में भाजपा उन्हें उन्हीं के घर में घेरने की रणनीति बना रही है। उनके सहयोगी आरसीपी सिंह उसी समुदाय से आते हैं, जिससे स्वयं नीतीश कुमार आते हैं। लेकिन अब वे भाजपा के साथ आ चुके हैं और चर्चा है कि भाजपा उन्हें नीतीश कुमार के सामने चुनावी मैदान में उतारकर उनके घर में ही उन्हें घेरने की कोशिश कर सकती है।

यह भी पढ़ें: Bihar : महागठबंधन मंत्रिमंडल से संतोष मांझी ने दिया इस्तीफा; जीतन राम ने कहा था- नहीं छोड़ेंगे CM नीतीश का साथ

नीतीश कुमार के बेहद भरोसेमंद साथी रहे जीतनराम मांझी के बेटे संतोष मांझी ने भी नीतीश मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया है। चर्चा है कि वे भी एनडीए का दामन थाम सकते हैं। इसी प्रकार नीतीश के कुछ अन्य सहयोगी भी आने वाले समय में उनकी मुश्किलें बढ़ाते हुए दिखाई पड़ सकते हैं।

नहीं काम आता हिंदुत्व का मुद्दा

भाजपा ने राष्ट्रीय राजनीति में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के मुद्दे के सहारे दूसरे दलों को पीछे छोड़ने में सफलता पाई है। उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में उसकी यह कोशिश सफल साबित हुई है, लेकिन बिहार में उसकी यह कोशिश अभी तक कामयाब नहीं हुई है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जो बढ़त हासिल की थी, वह भी उनके 'पिछड़ी जाति के गरीब घर का बेटा' होने के दावे का परिणाम ज्यादा थी। ऐसे में अब जबकि भाजपा 2014 वाले राजनीतिक उफान पर नहीं है, वह किसी दूसरे मुद्दे के सहारे नीतीश-तेजस्वी गठबंधन को मात देने की बात नहीं सोच सकती।     

'दरक रहा नीतीश का जातीय गणित'

बिहार भाजपा के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि बदलते समय में नीतीश और तेजस्वी यादव की जातीय पकड़ कमजोर हुई है। तेजस्वी यादव की यादव जाति भी अब आरजेडी के पीछे एकजुट नहीं है। भाजपा ने इन जातियों के नित्यानंद राय और रामकृपाल यादव जैसे नेताओं को आगे बढ़ाने की जो मुहिम शुरू की थी, उससे यह जातीय गठबंधन टूटा है। इसी प्रकार आरसीपी सिंह और सम्राट चौधरी के आने से कुर्मी-कोइरी और कुर्मी जातियों के वोट बैंक में भी सेंध लगी है। यदि पार्टी महादलितों और अतिपिछड़ी जातियों के तिलस्म को तोड़ने में सफल रही, तो उसका समर्थन आधार बढ़ सकता है और बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।  

जानकारी के मुताबिक, पार्टी अलग-अलग जातीय समूहों को ध्यान में रखते हुए उनके युवा नेताओं को आगे बढ़ाकर युवाओं पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है, तो पार्टी के दिग्गज नेताओं को विभिन्न भूमिका देकर उनके अनुभव का लाभ उठाने की कोशिश कर सकती है।

कौन-कौन लोग लेंगे हिस्सा

बिहार कोर कमेटी की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी, प्रभारी विनोद तावड़े, सह प्रभारी सतीश द्विवेदी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री नागेंद्र सिंह सहित अन्य शीर्ष नेताओं को बुलाया गया है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन मंत्री बीएल संतोष और गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में होने वाली इस बैठक में बिहार के सभी समीकरणों पर विचार करते हुए जीत की राह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न उपायों पर चर्चा होगी।

भाजपा को करना होगा यह काम

राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि बिहार की राजनीति जातीय समीकरणों पर आधारित है। इस जातीय ध्रुवीकरण की राजनीति में फिलहाल महागठबंधन का पलड़ा मजबूत दिखाई पड़ रहा है। यादव, मुस्लिम, कोइरी-कुशवाहा सहित अन्य पिछड़ी-दलित जातियां मोटे तौर पर महागठबंधन के साथ जुड़ी हुई हैं। लेकिन भाजपा ने जिस तरह सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पिछड़ों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है और एनडीए के अपने पुराने सहयोगियों को साथ लेने की कोशिश करती दिख रही है, वह लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के सामने मजबूत लड़ाई की स्थिति में आ सकती है। बिहार में भाजपा को मजबूत होने के लिए उसे उच्च जातियों के अपने कोर वोट बैंक को अपने साथ जोड़कर रखते हुए नए समीकरणों के साथ दूसरी जातियों को अपने साथ जोड़ना होगा।

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