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Bihar Politics: बिहार में बिछ रही बड़ी राजनीतिक बिसात! बड़ा उलटफेर होने के लगाए जा रहे कयास

Thu, 01 Sep 2022 07:01 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Thu, 01 Sep 2022 07:01 PM IST
सार

Bihar Politics: राजनीतिक जानकार बताते हैं कि बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का होना जरूरी है। क्योंकि इस वक्त संख्या बल के हिसाब से सबसे बड़ा दल आरजेडी ही है। आरजेडी और कांग्रेस समेत अन्य वाम दलों के विधायकों की संख्या कद जोड़ें तो बहुमत तक पहुंचने के लिए महज पांच विधायक ही दूर हैं...

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Bihar Politics: speculations about uncertain future of alliance government of JDU and RJD
Bihar Politics: लालू यादव के साथ नीतीश कुमार - फोटो : एएनआई

विस्तार

बिहार की राजनीतिक चौसर में कुछ ऐसी बिसातें बिछाई जा रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में एक बार फिर से बड़े राजनैतिक उलटफेर होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं इस बात की हैं कि जेडीयू और आरजेडी की मिली जुली सरकार बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाली है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि आरजेडी और जेडीयू के साथ सभी राजनीतिक दलों के गठबंधन में अगर जेडीयू को हटा दिया जाए, तो आरजेडी को महज पांच विधायक सरकार बनाने के लिए चाहिए होंगे। और इन पांच विधायकों के लिए सत्ता का संग्राम अंदरूनी तौर पर शुरू हो गया है। हालांकि जेडीयू के नेताओं का कहना है कि सत्ता के लिए भारतीय जनता पार्टी तमाम तरीके की अस्थिरताएं करती रहती है। लेकिन वह इसमें सफल होगी और आरजेडी जेडीयू के गठबंधन वाली सरकार अपना पूरा कार्यकाल करेगी।

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संख्याबल को लेकर हो सकती है उथलपुथल

दरअसल बिहार में जेडीयू और आरजेडी की सरकार बनने के कुछ दिन बाद से ही राजनीतिक गलियारों में सरकार चलने और न चलने को लेकर के तमाम तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। बिहार के प्रमुख राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार तो जेडीयू और आरजेडी समेत तमाम विपक्षी दलों ने मिलकर बना ली। लेकिन जब आप राजनैतिक परिदृश्य में इनकी संख्या का आकलन करते हैं तो आपको बिहार की राजनीति में भविष्य के आने वाले कई मोड़ों का अंदाजा भी हो जाता है। वे कहते हैं कि सरकार का यही संख्या बल सबसे बड़ी ताकत भी है और यही संख्या सबसे बड़ी कमजोरी भी है। जानकारों का कहना है कि जेडीयू के पास जिस तरीके से विधायकों की संख्या कम है और राज्य में सत्ता का सबसे बड़ा पद उसी के पास है, यह राजनीतिक उथल-पुथल का अंदरूनी तौर पर एक बड़ा कारण बन सकता है।

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राजनीतिक जानकार बताते हैं कि बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का होना जरूरी है। क्योंकि इस वक्त संख्या बल के हिसाब से सबसे बड़ा दल आरजेडी ही है। बिहार में राजनीतिक बिसात पर गुणा गणित लगाकर आने वाले दिनों में बड़े घटनाक्रम को देखने वाले राजनैतिक जानकार बताते हैं कि आरजेडी और कांग्रेस समेत अन्य वाम दलों के विधायकों की संख्या मिलाकर बहुमत तक पहुंचने वाली संख्या से महज पांच विधायक ही दूर हैं। ऐसे में ऐसे में चर्चा यही हो रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं आने वाले दिनों में जेडीयू और आरजेडी की मिली-जुली सरकार अलग रास्तों पर आ जाए। राजनीतिक विश्लेषक का सुरेंद्र झा कहते है कि बिहार में जो सरकार बनी है वह किन परिस्थितियों में और कैसे बनी है इसे लेकर सभी को अंदाजा है। वह कहते हैं कि बिहार में सरकार अचानक बदली हुई परिस्थितियों के दौरान बनी है। ऐसे में इस तरीके की राजनीतिक कयासबाजी तो लगती ही रहेगी। सूत्रों का कहना है कि बीते कुछ दिनों पहले भाजपा के नेताओं की आरजेडी के नेताओं से मुलाकात भी हुई है। हालांकि इस मुलाकात को लेकर भाजपा और आरजेडी के नेता आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में मुलाकातों के तमाम मायने निकाले जा रहे हैं।

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विधानसभा भंग करने की हो सकती है सिफारिश

वहीं दूसरी ओर बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि यह महागठबंधन जल्द ही विधानसभा भंग करने की सिफारिश भी कर सकता है। ताकि दोबारा चुनाव हो और जातिगत समीकरणों के आधार पर इस नए गठबंधन को राजनीतिक फायदा मिले। राजनीतिक जानकार भी इस समीकरण को खारिज नहीं कर रहे हैं। एक वरिष्ठ राजनैतिक विश्लेषण बताते हैं कि इसके पीछे की वजह यह है राजनीतिक दलों के गठबंधन और जातीय समीकरण में मिलने वाली बढ़त मानी जा रही है। बिहार के राजनीतिक विश्लेषक अनिरुद्ध कुमार कहते हैं कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। उनका कहना है कि जिस तरीके से बिहार में अभी सब कुछ शांत दिख रहा है दरअसल अंदर बहुत राजनीति खिचड़ी पक रही है। कहते हैं कि यह सिर्फ जेडीयू और आरजेडी की ओर से नहीं बल्कि भाजपा की ओर से भी राजनीतिक पिच तैयार की जा रही है। भाजपा से जुड़े एक नेता का कहना है कि बिहार में जो गठबंधन हुआ है वह अपना पूरा कार्यकाल नहीं कर सकता। इसके पीछे उनका तर्क है कि जेडीयू के साथ मिले हुए जितने भी गठबंधन हैं वे अपनी संख्या बल और सरकार बनाने के लिए जरूरी विधायकों की संख्या से महज पांच विधायक कम हैं। ऐसे में सबसे बड़े संख्या बल वाले आरजेडी के नेता संभव हैं कुछ करें। हालांकि उनका कहना है कि जब से आरजेडी और जेडीयू की सरकार बनी है तब से भी हाल में क्या हालात हैं उसे पूरा देश देख रहा है।



बिहार में सरकार की स्थिरता और अस्थिरता समेत तमाम तरह के हो रहे राजनीतिक कयासों पर जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता राजीव रंजन कहते हैं कि यह महज अफवाहें हैं। उनका कहना है कि भाजपा हमेशा से स्थिर सरकारों को गिराने का प्रयास करती रहती है। राजीव रंजन कहते हैं कि इस तरह का पूरा प्रोपेगेंडा भाजपा की ओर से ही तैयार किया जा रहा है। जबकि हकीकत में जेडीयू और आरजेडी की सरकार अपने घटक दलों के साथ मिलकर पूरा कार्यकाल करेगी।

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