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Bihar Politics: मुफ्त की रेवड़ी या महिलाओं को स्वरोजगार, बिहार में क्या गेम चेंजर बनेगा ये प्लान?

Tue, 02 Sep 2025 03:44 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 02 Sep 2025 03:44 PM IST
सार

कांग्रेस-राजद का महिलाओं को हर महीने मुफ्त पैसे देने का वादा है तो वहीं दूसरी तरफ एनडीए की महिलाओं को आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनाने की योजना। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के हर ब्लॉक में इस योजना से जुड़ी महिलाओं से बात कर इसकी लोकप्रियता को बढ़ाने का काम किया है। साफ है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में सभी दलों के सियासी वादों की अग्निपरीक्षा होगी। जानिए क्या हैं वादे और राज्य के समीकरण

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Bihar Politics freebies or self-employment for women can this plan be game changer for parties know details
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रोचक हैं समीकरण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कांग्रेस ने घोषणा की है कि बिहार में महागठबंधन के चुनाव जीतने पर महिलाओं को 2500 रुपये हर महीने की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पार्टी ने इसे 'माई बहिन मान योजना' का नाम दिया है। वहीं, भाजपा-जदयू ने अब तक महिलाओं को सीधे-सीधे मुफ्त पैसे बांटने की किसी योजना का ऐलान तो नहीं किया है, लेकिन बिहार सरकार ने पहले से चल रही 'जीविका दीदी योजना' के अंतर्गत हर परिवार की एक महिला को 10 हजार रूपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर दी है। इसके लिए महिलाओं को किसी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर काम करना होगा। इस योजना की पहली किस्त इसी महीने में महिलाओं के खाते में आ जाएगी। यदि उनका कामकाज बेहतर रहा तो अगले छः महीने में महिलाओं को 15 हजार से दो लाख रूपये तक का सस्ता कर्ज भी उपलब्ध कराया जाएगा। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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यानी बिहार विधानसभा चुनाव में एक तरफ कांग्रेस-राजद का महिलाओं को हर महीने मुफ्त पैसे देने का वादा है तो वहीं दूसरी तरफ एनडीए की महिलाओं को आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनाने की योजना। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के हर ब्लॉक में इस योजना से जुड़ी महिलाओं से बात कर इसकी लोकप्रियता को बढ़ाने का काम किया है। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए आर्थिक संसाधन भी उपलब्ध कराया है। बड़ा प्रश्न यही है कि बिहार विधानसभा चुनाव में कौन सी योजना गेम चेंजर साबित होगी? महिलाएं महागठबंधन के मुफ्त योजना को पसंद करेंगी, या उन्हें आर्थिक तौर पर सशक्त होना अधिक पसंद आएगा? 
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मुफ्त रेवड़ियों की सीमाएं सामने आईं
महिलाओं के लिए मुफ्त पैसे देने की घोषणा में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही आगे रही हैं। भाजपा ने महिलाओं को मुफ्त आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र जैसे अनेक चुनाव जीते हैं। वहीं, कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक से लेकर तेलंगाना तक की जीत में महिलाओं को मुफ्त पैसे बांटने की योजना का प्रमुख हाथ रहा है। 
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लेकिन समय के साथ इस योजना की सीमाएं सामने आने लगी हैं। महाराष्ट्र में सरकार महिलाओं को मुफ्त पैसा बांटने के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रही है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार वित्तीय संकट से गुजर रही है और उसे अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक में परेशानी हो रही है। कर्नाटक में भी सरकार को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा में आयुष्मान योजना के अंतर्गत किए गए इलाज का पैसा न मिलने पर राज्य के कई  अस्पतालों ने इस योजना के अंतर्गत मरीजों का इलाज करने से इनकार कर दिया है। 

इनमें कुछ राज्यों में भाजपा सत्ता में है तो कुछ राज्यों में कांग्रेस शासन कर रही है। लेकिन दोनों ही प्रमुख दलों के राज्यों में सरकारों को मुफ्त योजनाओं के कारण वित्तीय संकट से गुजरना पड़ रहा है। कई राज्य भारी कर्ज में हैं और अधिक कर्ज लेने की क्षमता खो चुके हैं। ऐसे में यही समझ में आता है कि मुफ्त घोषणाओं की सीमाएं सामने आने लगी हैं।  

लेकिन सहकारी मॉडल सुपरहिट 
एक तरफ मुफ्त योजनाओं की सीमाएं सामने आने लगी हैं, वहीं गुजरात-महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लंबे समय से चल रही सहकारी संस्थाओं का मॉडल अपनी शुरुआत से लेकर आज तक सुपरहिट साबित हुआ है। गुजरात में किसानों और महिलाओं के स्वयं सहायता समूह अमूल डेरी जैसी बड़ी कंपनियों की सफलता के आधार बने हैं। इन सहायता समूहों में काम करके किसान और महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर हो रहे हैं, बल्कि वे राष्ट्र के निर्माण में योगदान भी दे रहे हैं। 

लाडली योजना की तर्ज पर योजना को लेकर भाजपा-जदयू में था मतभेद 
भाजपा सूत्रों के अनुसार, बिहार में भी चुनाव जीतने के लिए लाडली योजना की तर्ज पर कोई योजना पेश करने पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया था। इसका अंतिम स्वरूप तय करने में राज्य के प्रमुख दल जदयू की कुछ अपनी रिजर्वेशन थीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मानना है कि उन्होंने राज्य की महिलाओं के लिए अनेक बेहतर काम किए हैं और महिलाओं का वोट लेने के लिए उन्हें किसी मुफ्त योजना की आवश्यकता नहीं है।

लेकिन राज्य के रणनीतिकारों का मानना है कि चुनाव करीब आने पर कांग्रेस-राजद मुफ्त की योजना का जोर शोर से प्रचार कर सकती हैं जिससे महिलाओं का एक वर्ग प्रभावित हो सकता है। लिहाजा एनडीए को उसकी काट के लिए किसी ऐसी योजना की आवश्यकता थी जो विपक्ष की घोषणा के सामने ज्यादा आकर्षक हो। इससे राज्य का आर्थिक भार न बढ़े, लेकिन महिलाओं की सहायता भी हो जाए। 

सूत्रों के अनुसार, इन दोनों समस्याओं से निपटने के लिए गुजरात का मॉडल अपनाने पर सहमति बनी। इसके अंतर्गत महिलाओं को पहली किस्त में दस हजार रूपये की आर्थिक सहायता देकर उनका आर्थिक स्वावलंबन करने पर सहमति बनी। योजना के सफल रहने पर न केवल महिलाओं का आर्थिक  विकास होगा, बल्कि इससे राज्य और देश को भी लाभ होगा। 

कांग्रेस की घोषणा से नहीं पड़ेगा फर्क- भाजपा
बिहार भाजपा के मीडिया इंचार्ज अशोक भट्ट ने अमर उजाला से कहा कि उनकी पार्टी ने पूरे देश में महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को प्रमुखता दी है। बिहार ही नहीं, गुजरात-महाराष्ट्र से लेकर पूरे देश में एनडीए सरकारों के कामकाज में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की यही सोच दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राजद को सत्ता में नहीं आना है, इसलिए वे दर्जन भर घोषणाएं कर सकते हैं, लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि बिहार की जनता ने केंद्र में मोदी और बिहार में नीतीश सरकार के दौरान जिस तरह के विकास कार्यों की झलक देखी है, उस तरह का विकास इसके पहले कभी नहीं हुआ। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि बिहार अब 'लालटेन के जंगलराज युग' में वापसी नहीं करना चाहता, इसलिए वह कांग्रेस-राजद को कोई अवसर नहीं देगा। 


नीतीश कुमार नकलची सरकार- राजद  
राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि बिहार में 'माई बहिन योजना' के अंतर्गत 2500 रुपये हर महीने की सहायता देकर महिलाओं का आर्थिक विकास करना तेजस्वी यादव का आइडिया है। उनके सहयोगी दल कांग्रेस ने मई महीने में ही इसकी घोषणा कर दी है। राजद नेता ने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार ने तेजस्वी यादव की योजना की नकल पेश की है, इसलिए नीतीश कुमार एक नकलची सरकार है। 

उन्होंने कहा कि केवल इसी योजना में नहीं, बल्कि बिहार सरकार अनेक योजनाओं में तेजस्वी यादव की नकल कर योजनाओं को अपना नाम देकर पेश कर देती है, लेकिन बिहार सरकार अब योजनाओं की असली सोच रखने वाले नेता को सामने लाना चाहती है। उन्होंने कहा कि बिहार अब नीतीश युग के आगे देखने के लिए तैयार हो चुका है और नीतीश कुमार की कोई योजना बदलाव की इस सोच को नहीं रोक पाएगी। 

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