फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bihar Policeman waiting his son since six years after kidnapping in Phulwari Sharif

अपहरण के छह साल बाद भी सिपाही को बेटे का इंतजार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में की अपील

Wed, 17 Jul 2019 01:49 PM IST
Priyesh Mishra अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Wed, 17 Jul 2019 01:49 PM IST
विज्ञापन
Bihar Policeman waiting his son since six years after kidnapping in Phulwari Sharif
अपहृत लड़का - फोटो : अमर उजाला

बिहार पुलिस सेवा के एक सिपाही के बेटे का अपहरण आज से छह साल पहले नवंबर 2013 में पटना के फुलवारी शरीफ से कर लिया गया था। आरोप है कि जब इस पूर्व सिपाही ने मामले की शिकायत थाने में की तो पहले तो मामला दबाने की कोशिश की गई, फिर बाद में केस को खत्म करने की कोशिश हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि अपहरण करने वालों में स्थानीय आरजेडी नेता अख्तर मियां के बेटे रिंकू का नाम शामिल था।

विज्ञापन


परिवार की अपील पर जब पटना हाई कोर्ट ने संज्ञान लेकर मामले के जांच का आदेश दिया तब थाने के लोगों ने पीड़ित परिवार के घर में घुसकर उनके साथ ही मारपीट की। पटना हाई कोर्ट की दखल के बाद भी आज तक यह पता नहीं चल सका है कि सिपाही का बेटा आज कहां और किस हालत में है। थक हारकर अब परिवार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इस मामले की जांच कराने की गुहार लगाई है।
विज्ञापन


पीड़ित सिपाही परिवार का कहना है कि अगर इस मामले की जांच नहीं की जाती है तो वह संसद भवन के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होगा। अपहृत हुए बच्चे पवन कुमार पाण्डेय के छोटे भाई अभिमन्यु कुमार पाण्डेय ने अमर उजाला को बताया कि मामला नौ नवंबर 2013 का है।
विज्ञापन
विज्ञापन


घटना वाले दिन पवन कुमार पाण्डेय (तब 14.5 वर्ष) अपने घर पर ही बैठा हुआ था। सुबह 7:30 बजे आरजेडी नेता अख्तर मियां के बेटे रिंकू ने नीरज पाठक और विशाल राम के जरिये उसे बुलवाया। पवन उनके साथ चला गया। लेकिन जब देर शाम तक वह घर वापस नहीं आया तब परिवार के लोगों ने उसकी खोजबीन शुरू की।

परिवार ने रिंकू के घर वालों और आसपास के लोगों से पवन का बारे में पूछताछ की, लेकिन पवन का कोई पता नहीं चला। अंततः परिवार ने फुलवारी शरीफ थाने में जाकर बेटे के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई।

आश्वासन मिला, पर कार्रवाई नहीं

परिवार के मुताबिक़, उन्होंने रिंकू और उसके तीन साथियों नीरज पाठक, विशाल राम और खटूस के खिलाफ अपहरण करने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन पुलिस ने शिकायत से रिंकू और उसके एक साथी खटूस का नाम हटाने की शर्त पर बच्चे के सकुशल वापसी का वायदा किया। परिवार के द्वारा शिकायत वापस लेने के बाद भी उनका बच्चा पवन वापस नहीं आया और उन्हें टाला जाता रहा। 

अंतत: परिवार ने इस मामले की जांच करने के लिए पटना हाई कोर्ट में (वर्ष 2014 में केस नंबर 211) अपील किया। कोर्ट ने लापरवाही बरतने पर थाने को जमकर फटकार लगाई और मामले की पूरी तफ्तीश का आदेश पटना के मशहूर आईपीएस अधिकारी मनु महाराज को दिया था।



आरोप है कि इस आदेश के बाद मामले के जांच अधिकारी फहीम आज़ाद खान और उसके कुछ साथियों ने पीड़ित परिवार के साथ ही मारपीट की थी। उनसे से फोन छीन लिए गए जिनमें अपराधियों से बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग थी। यह मामला तब स्थानीय मीडिया की सुर्ख़ियों में भी आ गया था। लेकिन इस सबके बाद भी आज तक इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई। 

 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत

पीड़ित परिवार ने इस मामले की जांच के लिए मंगलवार 16 जुलाई 2019 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अपील की है। शिकायत पवन कुमार पाण्डेय की मां की तरफ से दाखिल की गई है। दूसरे को न्याय दिलाने के लिए अपनी जिंदगी खपा देने वाले एक सिपाही को आज भी अपने बेटे की वापसी का इंतज़ार है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed