बिहार चुनाव से पहले सियासी तपिश: मतदाता सूची से हटाए गए 23 लाख नाम? कांग्रेस के सख्त तेवर; फिर लगाए गंभीर आरोप
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तपिश सातवें आसमान पर पहुंच गई है। कारण है कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ और वोट चोरी को लेकर कांग्रेस ने फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। इस बार कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर 23 लाख महिलाओं के वोट काटने का गंभीर आरोप लगाया। साथ ही और भी कई बड़े दावे भी किए हैं।
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बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कुछ ही दिनों में तारिखों का एलान होने वाला है। राज्यभर की सियासत में गर्माहट सातवें आसमान पर पहुंच गई है। आरोप-प्रत्यारोप का बाजर भी गर्म है। विपक्षी कांग्रेस अभी भी वोट चोरी के आरोपों पर अडिग दिख रही है और भाजपा व चुनाव आयोग पर लगातार खूब सारे आरोप भी लगा रही है। इसी क्रम में मामले में गर्माहट और तेज तब हो गई जब कांग्रेस पार्टी ने रविवार को एक बार फिर चुनाव आयोग व केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। कांग्रेस ने दावा किया कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर लगभग 23 लाख महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।
इतना ही नहीं पार्टी ने ये भी दावा कि ये नाम मुख्य रूप से उन 59 विधानसभा सीटों से हटाए गए हैं जहां 2020 के चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा कि यह काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर चुनाव आयोग कर रहा है। उन्होंने इसे संवैधानिक अधिकारों पर हमला और बड़ी चुनावी धोखाधड़ी बताया।
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कांग्रेस ने केंद्र और चुनाव आयोग पर क्या-क्या आरोप लगाए?
प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी ने दावा किया कि बिहार में कुल 3.5 करोड़ महिला वोटर हैं, जिनमें से करीब 23 लाख के नाम लिस्ट से हटाए गए। यह कार्य चुनावी धोखाधड़ी के तहत किया गया है ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में महिलाओं को वोट डालने से रोका जा सके। कांग्रेस नेता ने कहा कि जिन जिलों में सबसे ज्यादा महिलाओं के नाम हटाए गए हैं, उनमें गोपालगंज, सारण, बेगूसराय, समस्तीपुर, भोजपुर और पूर्णिया शामिल हैं। ये जिले करीब 60 विधानसभा सीटों को कवर करते हैं, जहां 2020 में इंडिया गठबंधन को 25 और एनडीए को 34 सीटें मिली थीं।
लांबा ने केंद्र व आयोग से पूछे तीखे सवाल
इन आरोपों को लगाते हुए अलका लांबा ने सवाल उठाया कि अगर ये महिलाएं फर्जी वोटर थीं, तो फिर 2024 लोकसभा चुनाव में जब उन्होंने वोट डाला, क्या वो वोट भी फर्जी थे? उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी स्थिति में चुने गए सांसदों ने मिलकर सरकार बनाई? कांग्रेस इस मुद्दे पर देशभर में हस्ताक्षर अभियान चला रही है और पांच करोड़ लोगों के सिग्नेचर इकट्ठा कर विरोध जताएगी। अलका लाम्बा ने आरोप लगाया कि एक ओर मोदी सरकार महिलाओं के खातों में पैसे भेज रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं महिलाओं के वोट काट रही है।
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बिहार एसआईआर पर क्या है चुनाव आयोग का पक्ष?
गौरतलब है कि बिहार एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पटना में एक प्रेस वार्ता में बताया कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद वोटर लिस्ट को शुद्ध किया गया है। कुल वोटर की संख्या 7.89 करोड़ से घटकर 7.42 करोड़ हो गई है यानी करीब 47 लाख नाम हटाए गए। इनमें से 65 लाख नाम डुप्लीकेट, मृत या माइग्रेटेड होने के आधार पर हटाए गए। 21.53 लाख नए वोटरों को जोड़ा गया है और 3.66 लाख और नाम हटे हैं। आयोग ने कहा है कि कोई भी पात्र नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर नहीं रहेगा, और कोई भी अपात्र शामिल नहीं होगा।