Seat Ka Samikaran: यहां से कांग्रेस आठ, भाजपा चार तो राजद को एक बार मिली जीत, ऐसा है औरंगाबाद का चुनावी इतिहास
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात औरंगाबाद सीट की करेंगे। इस सीट पर मौजूदा समय में कांग्रेस के आंनद शंकर विधायक हैं।
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विस्तार
बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनावी तारीखों के एलान से पहले ही सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सीट बंटवारे को लेकर दोनों बड़े गठबंधनों में खींचतान जारी है। इस सियासी हलचल के बीच अमर उजाला की खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज औरंगाबाद जिले की औरंगाबाद विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट से मौजूदा समय में कांग्रेस के आंनद शंकर विधायक हैं।
बिहार के 38 जिलें में से एक जिला औरंगाबाद भी है। औरंगाबाद जिला दो अनुमंडल और 11 ब्लॉक में बंटा है। जिले में छह विधानसभा सीट हैं। इनमें गोह, ओबरा, नबीनगर, कुटुम्बा (एससी), औरंगाबाद, रफीगंज शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में औरंगाबाद सीट की बात करेंगे। यह सीट पहली बार 1952 में अस्तित्व में आई।
1952: कांग्रेस को मिली जीत
- 1952 के चुनाव में औरंगाबाद सीट से कांग्रेस के प्रियब्रत नारायण सिन्हा को जीत मिली। उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के बद्री नाथ शास्त्री को 2,173 वोट से हराया। प्रियब्रत नारायण को कुल 7,669 वोट मिले। वहीं, बद्री नाथ को 5,496 वोट मिले।
- 1957 के चुनाव में औरंगाबाद सीट से प्रियब्रत नारायण सिन्हा दोबार विधायक बने। इस चुनाव में उन्होंने सरजू सिंह को 1,102 वोट से हराया। प्रियब्रत नारायण को कुल 9,459 वोट मिले। वहीं, सरजू सिंह को 8,357 वोट मिले।
1962: स्वतंत्र पार्टी को मिली जीत
दो बार के विधायक रहे प्रियब्रत नारायण सिन्हा को 1962 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में स्वतंत्र पार्टी के ब्रजमोहन सिंह को 2,892 वोट से जीत मिली। वहीं, कांग्रेस के प्रियब्रत दूसरे नंबर पर रहे। ब्रजमोहन सिंह को कुल 10,421 और प्रियब्रत को 7,529 वोट मिले।
1967: प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को मिली जीत
- 1967 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के एस सिंह को 1,763 वोट से जीत मिली। वहीं तात्कालीन विधायक ब्रजमोहन सिंह दूसरे नंबर पर रहे। एस सिंह को 12, 824 वोट मिले और ब्रजमोहन को 11,061 वोट मिले।
- 1969 के चुनाव में भी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के एस सिंह ने जीत हासिल की। इस चुनाव में भी उन्होंने ब्रजमोहन सिंह को 9,812 वोट से हराया। एस सिंह को कुल 18,722 वोट मिले। वहीं, ब्रजमोहन सिंह को 8,910 वोट से संतोष करना पड़ा।
1972: कांग्रेस को मिली जीत
1972 के चुनाव में ब्रजमोहन सिंह ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने संसोपा के अरजू सिंह को 4,075 वोट से हराया। ब्रज मोहन को कुल 14,959 वोट मिले। वहीं, अरजू सिंह को 10,884 वोट मिले।

1977 : कांग्रेस को मिली जीत
- 1977 के चुनाव में कांग्रेस के राम नरेश सिंह को जीत मिली। इस चुनाव में उन्होंने जनता पार्टी के ब्रज मोहन सिंह को 1,134 वोट से हराया। राम नरेश सिंह को कुल 16,443 वोट मिले। वहीं, ब्रज मोहन सिंह को 15,309 वोट मिले।
- 1980 के चुनाव में राम नरेश सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने शोषित समाज दल के सूरजदेव सिंह को 6,793 वोट से हराया। राम नरेश को कुल 21,149 वोट मिले। वहीं, सूरज देव को 14,356 वोट मिले।
1985 : ब्रजमोहन सिंह को मिली जीत
- 1985 के चुनाव में कांग्रेस के ब्रजमोहन सिंह ने वापसी की। उन्होंने दो बार के विधायक राम नरेश सिंह को 4,194 वोट से मात दी। ब्रजमोहन सिंह को कुल 26,550 वोट मिले। वहीं, राम नरेश सिंह को 22,356 वोट मिले।
- 1990 के चुनाव में कांग्रेस के ब्रजमोहन सिंह को जीत मिली। उन्होंने भाकपा के त्रिभुवन सिंह के 11,547 वोट से हराया। ब्रजमोहन सिंह को कुल 27,134 वोट मिले। वहीं, त्रिभुवन सिंह को 15,587 वोट से संतोष करना पड़ा।
1995 : भाजपा को मिली पहली जीत
1995 के चुनाव में औरंगाबाद सीट से भाजपा के रामधर सिंह को 3,853 वोट से जीत हासिल की। वहीं, भाकपा के त्रिभुवन सिंह दूसरे नंबर पर रहे। रामधर सिंह को 25,640 वोट मिले। वहीं, त्रिभुवन सिंह को 21,787 वोट मिले।
2000: राजद का खाता खुला
2000 के चुनाव में औरंगाबाद सीट से राजद को पहली जीत मिली। राजद के सुरेश मेहता ने तात्कालीन विधायक रामधर सिंह को 8,573 वोट से हराया। सुरेश मेहता को कुल 41,176 वोट मिले। वहीं, रामधर सिंह ने 32,603 वोट मिले।

फरवरी 2005: रामधर सिंह की वापसी
- फरवरी 2005 के चुनाव में भाजपा के रामधर सिंह को जीत मिली। रामधर सिंह ने राजद के बैजनाथ मेहता को 23,725 वोट से हराया। इस चुनाव में रामधक सिंह को 68,726 वोट मिले। वहीं, बैजनाथ को 45,001 वोट से संतोष करना पड़ा।
- अक्तूबर 2005 के चुनाव में भाजपा के रामधर सिंह ने 19,880 वोट से जीत दर्ज की। इस चुनाव में राजद को सुरेश मेहता दूसरे नंबर पर रहे। रामधर सिंह को कुल 55,813 वोट मिले। वहीं, सुरेश मेहता को 35,953 वोट मिले।
- 2010 के चुनाव में भाजपा के रामधर सिंह ने औरंगाबाद सीट से फिर से जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने राजद के सुशील कुमार सिंह को 6,242 वोट से हराया। रामधर सिंह को कुल 41,176 वोट मिले। वहीं, सुशील कुमार सिंह को 34,934 वोट मिले। बता दे कि रामधर सिंह बिहार सरकार में सहकारिता मंत्री रह चुके हैं। इस चुनावी साल में उन्होंने भाजपा पार्टी से बगावत कर “मगध विकास मोर्चा” नामक नया राजनीतिक संगठन बनाने का एलान किया है।
2015: कांग्रेस की वापसी
2015 के चुनाव में कांग्रेस के आंनद शंकर सिंह को जीत मिली। उन्होंने लगातार तीन बार से जीत रहे रामधर सिंह को 18,398 वोट से हराया। आंनद शंकर सिंह को कुल 63,637 वोट मिले। वहीं रामधर सिंह को 45,236 वोट मिले।
2020 के चुनाव में कांग्रेस के आंनद शंकर सिंह औरंगाबाद के दूसरी बार विधायक बने। इस चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के रामधर सिंह को 2,243 वोट से हराया। आंनद सिंह को कुल 70,018 वोट मिले। वहीं, रामधर सिंह को कुल 67,775 वोट मिले।
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