Seat Ka Samikaran: कोढ़ा से जीतकर बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री बने थे भोला पासवान, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
सीट का समीकरण सीरीज में आज कोढ़ा विधानसभा सीट की बात। कोढ़ा विधानसभा सीट से जीत कर भोला पासवान शास्त्री बिहार के 8वें मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री के रूप में 1968 में शपथ ली थी।
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विस्तार
कटिहार जिलें में आती है कोढ़ा सीट
बिहार के 38 जिलें में से एक जिला कटिहार भी है। यह जिला 3 अनुमंडल और 16 ब्लॉक में विभाजित है। इस जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें कटिहार, कदवा, बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी, बैरी, कोढ़ा शामिल हैं। आज बात कोढ़ा विधानसभा सीट की। 1967 के विधानसभा चुनाव में यह सीट अस्तित्व में आई।
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1967: कोढ़ा के पहले विधायक बने भोला पासवान
कोढ़ा विधानसभा सीट से पहली जीत भोला पासवान शास्त्री को मिली। शास्त्री लगातार तीन बार यहां से जीते। 1967 के चुनाव में उन्हें 12,042 वोट से जीत मिली। इस चुनाव में वह कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़े थे। शास्त्री को 1967 के चुनाव में कुल 16,247 वोट मिले थे। वहीं, दूसरे नंबर पर संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के एच पासवान थे। उन्हें 4,205 वोट मिले थे।
1969 में भोला पासवान लोक तांत्रिक कांग्रेस के टिकट पर जीते। इस चुनाव में उन्हें 25,241 वोट मिले थे। वहीं, दूसरे नंबर पर कांंग्रेस के सीता राम दास रहे। सीता राम को 9,508 वोट मिले थे।
1972 के विधानसभा चुनाव में भोला पासवान की जीत के आंकड़ बढ़कर 33,481 हो गया। इस चुनाव में उन्होंने भारतीय जनसंघ के चौधरी कुरेल को हराया। कांग्रेस के टिकट पर उतरे भोला पासवान को कुल 39,845 वोट मिले। वहीं चौधरी कुरेल को 6,364 वोट से संतोष करना पड़ा।
कोढ़ा से जीतकर बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री बने भोला पासवान
भोला पासवान कोढ़ा सीट से विधायक रहते ही तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। भोला पासवान बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री के रूप में 1968 में शपथ ली। हालांकि पहले कार्यकाल में वह मात्र 99 दिन का रहा। इसके बाद शास्त्री 1969 में फिर मुख्यमंत्री बने। इस बार वह सिर्फ 12 दिन के लिए ही कुर्सी पर रह सके। तीसरी बार 1971 में उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। इस बार वे 221 दिन तक मुख्यमंत्री के पद पर रहे।
1977: जनता पार्टी से विधायक बने सीता राम
आपातकाल के बाद हुए विधानसभा चुनाव में कोढ़ा सीट से जनता पार्टी के सीता राम दास ने जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के विस्वनाथ ऋषि को 10,916 वोट से हराया था।
1980: तीन साल बाद कांग्रेस की वापसी
1977 में कोढ़ा सीट से हारे विस्वनाथ ऋषि को 1980 के चुनाव में जीत मिली। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के उम्मीदवार भूप लाल पासवान को 9,969 वोट से मात दी। इस चुनाव में बिस्वनाथ को 24,282 और पासवान को 14,313 वोट मिले।
1985 के चुनाव में विस्वनाथ ऋषि को एक बार फिर से जीत मिली। इस चुनाव में ऋषि ने 13, 686 वोट से जीत दर्ज की।
1990: सीता राम को जनता दल से मिली जीत
1990 के विधानसभा चुनाव में दो बार के विधायक विस्वनाथ को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में जनता दल के सीता राम दास को 30,257 वोट से जीत मिली। उन्हें 46,241 वोट मिले थे। वहीं, बिस्वनाथ को मात्र 15,984 वोट ही मिले थे।
1995 के विधानसभा चुनाव में भी सीता राम कोढ़ा के विधायक बने। उन्हें 28,518 वोट मिले थे। वहीं, कांग्रेस की सुनीता देवी को 22,221 वोट से संतोष करना पड़ा।
2000: भाजपा को मिली पहली जीत
2000 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के महेश पासवान ने कांग्रेस की सुनीता देवी को 14,136 वोट से हराया। उन्हें 45,513 वोट मिले थे। वहीं सुनीता देवी को 31,377 वोट मिल थे। यह कोढ़ा सीट पर भाजपा की पहली जीत थी।

2005: बीस साल बाद जीती कांग्रेस
2005 में बिहार में दो बार विधानसभा चुनाव हुए। पहली बार फरवरी में और दूसरी बार अक्तूबर में। दोनों चुनाव में कोढ़ा सीट से कांग्रेस की सुनीता देवी ने जीत हासिल की। फरवरी में हुए चुनाव में सुनीता देवी ने तत्कालीन विधायक महेश पासवान को 25,445 वोट से शिकस्त दी। सुनीता को 52,930 वोट मिले थे। वहीं, पासवान को 27,485 वोट मिले थे।
अक्तूबर के चुनाव में सुनीत की जीत के आंकड़े में कमी आई। उन्हें 49,632 वोट मिले थे। वहीं, पासवान को 37,483 वोट मिले थे। 2017 में सुनीता देवी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं। हालांकि, 2023 में उन्होंने फिर से कांग्रेस पार्टी में वापसी कर ली।
2010: भाजपा को मिली बड़ी जीत
दो बार के चुनाव में हार का सामना करने वाले महेश पासवान ने 2010 में जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने सुनीता देवी को 52,444 वोट से मात दी। उन्हें 71,020 वोट मिले थे। वहीं सुनीता को मात्र 18,576 वोट ही मिले थे। महेश पासवान को छोड़कर अन्य सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
2015: कांग्रेस ने की वापसी
2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की पूनम कुमारी उर्फ पूनम पासवान को 5,426 वोट से जीत मिली। उन्हें 78,409 वोट मिले। वहीं, महेश पासवान को 72,983 वोट मिले थे। महेश पासवान 2010 के चुनाव से भी ज्यादा वोट पाने के बाद भी हार गए। कांग्रेस उम्मीदवार को राजद-जदयू के साथ गठबंधन का फायदा मिला।
2020 के विधानसभा चुनाव में कोढ़ा से सीट से भाजपा को जीत मिली। भाजपा के टिकट पर महेश पासवान की पत्नी कविता देवी मैदान में थीं। उन्होंने कांग्रेस की पूनम पासवान को हराया। कविता देवी को कुल 1,04,625 वोट मिले। वहीं, पूनम को 75,687 वोट से संतोष करना पड़ा।
कोढ़ा विधानसभा सीट पर 14 बार चुनाव हुए। इस सीट से कांग्रेस को 7 बार जीत मिली है। वहीं भाजपा के उम्मीदवारों ने तीन बार जीत हासिल की है।
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