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जानिए, आम आदमी पार्टी को किन वजहों से दिल्ली में मिली करारी हार?

Thu, 13 Apr 2017 08:06 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Thu, 13 Apr 2017 08:06 PM IST
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Big reasons behind aam aadmi party defeat on rajouri garden seat
आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा के उपचुनाव में करारा झटका लगा है। पार्टी  2015 के विधानसभा चुनाव में राजौरी की जीती अपनी ही सीट न केवल हार गई है, बल्कि उसके उम्मीदवार हरजीत सिंह की जमानत जब्त हो गई है।
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वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में खाता खोल पाने में असफल रहने वाली कांग्रेस पार्टी दूसरा स्थान पाने में सफल रही। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी चंदीला को भाजपा-अकाली उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा ने 14652 मतों से पराजित किया।
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इससे पहले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी को करारा झटका लगा था। पंजाब में सरकार बनाने का सपना देख रही आम आदमी पार्टी जहां इस दावे से पूरी तरह दूर रही, वहीं गोवा में उसका खाता तक नहीं खुला। माना जा रहा है कि 2013 में कांग्रेस के सहयोग से दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी को 2015 में 70 में से 67 सीटें मिली थी, लेकिन बहुत ही कम समय में पार्टी अपनी चमक खोने लगी है।
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राजौरी सीट पर भाजपा-अकाली उम्मीदवार सिरसा को जहां 40,602 मत मिले, कांग्रेस की मीनाक्षी चंदीला को 25,950 मत मिले, वहीं आप के हरजीत सिंह को केवल 10, 243 मत मिले।

क्या है संकेत
23 अप्रैल को दिल्ली में एमसीडी चुनाव के लिए मतदान होना है। कांग्रेस ने राजौरी में दूसरी नंबर पर मिली सफलता को बदलाव का संकेत माना है। कांग्रेस नेता पीसी चाको इसे अच्छा संकेत बता रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी की जमीन खिसकने का अंदेशा बढऩे लगा है।

क्या है वजह

Big reasons behind aam aadmi party defeat on rajouri garden seat

आम आदमी पार्टी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के आंदोलन और स्वराज अभियान से उपजी है।  पार्टी ने 2013 के विधानसभा चुनाव में स्वराज अभियान के नारे को जोर शोर से उछाला था। वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली में प्रचंड बहुमत पाने के बाद पार्टी ने अपने ही नेताओं, कार्यकर्ताओं से किनारा करना शुरू कर दिया। इस क्रम में सबसे पहले प्रशांत भषण, योगेन्द्र यादव, प्रो. आनंद कुमार समेत अन्य को बाहर का रिश्ता दिखाया। इसके बाद समय-समय पर विधायकों, कार्यकर्ताओं से नाराजगी सतह पर आती रही। स्वराज अभियान भी पीछे छूट गया।

अभी भी है घमासान
आम आदमी पार्टी में घमासान कभी थमा ही नहीं। पार्टी ने अपने संस्थापक नेता कुमार विश्वास को गोवा के विधान सभा चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें प्रचारक के तौर पर प्रयोग ही नहीं किया। विश्वास के साथ यही पंजाब में भी हुआ। कुमार विश्वास के अलावा कई और नेताओं को भी पार्टी ने प्रचार में कोई तवज्जो नहीं दी। माना जा रहा है कि इसके चलते पार्टी कुमार विश्वास ने भी कोई खास
दिलचस्पी नहीं दिखाई। टिकट वितरण से लेकर चुनाव प्रचार तक में संजय सिंह, आशुतोष, दुर्गेश पाठक, दिलीप पांडे की भूमिका रही। एमसीडी चुनाव में भी आम आदमी पार्टी के इन्ही नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

राज्यसभा की सीट है पेंच
सूत्र बताते हैं कि आम आदमी पार्टी का वह हर प्रभावी चेहरा अंदरुनी घमासान  का शिकार हो जा रहा है। इस घमासान की एक वजह दिल्ली की राज्यसभा सीट बताई जा रही है। कुमार विश्वास पार्टी के संस्थापक सदस्यों में है। दिल्ली के पीएसओआई क्लब में अपना आलीशान जन्मदिन मनाने के बाद से ही वह पार्टी नेताओं के निशाने पर हैं। आम आदमी पार्टी में कई नेता हैं जो राज्यसभा सीट पाने का सपना देख रहे हैं, इसलिए अंदरुनी कूटनीति काफी हावी है।

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