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Bihar Election: बिहार में होगा महा घमासान, सत्ता के लिए हर दांव चलेगा एनडीए और महागठबंधन

Tue, 08 Apr 2025 10:28 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 08 Apr 2025 10:28 PM IST
सार

-कांग्रेस: हर दल अपनी तैयारी करें और बाद में एकजुट होकर लड़ें चुनाव
-भाजपा: एनडीए के हाथ से सत्ता छिटकने का सवाल ही नहीं
-बड़ा सवाल: क्या नीतीश कुमार होंगे मुख्यमंत्री का चेहरा

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big fight in Bihar Election NDA and Mahagathbandhan will play every trick for power
राहुल गांधी, अमित शाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राहुल गांधी बिहार के दौरे के बाद अहमदाबाद में पार्टी की भावी रणनीति में व्यस्त हैं। बिहार में तीन महीने के दौरान अपनी तीसरी यात्रा में भी उन्होंने जमकर ओबीसी, ईबीसी, दलित, अल्पसंख्यक का कार्ड खेला। बिना लालू परिवार से मिले बिहार से चले आए। उधर वक्फ संशोधन अधिनियम 2024 के कानून बनने के बाद से केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह भाजपा के कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र देने में जुटे हैं। दोनों राष्ट्रीय पार्टियां साल के अंत में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में बड़े घमासान की तैयारी कर रही हैं।
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राजद के संस्थापक सदस्य शिवानंद तिवारी का कहना है कि इस बार का चुनाव हर बार से अलग होगा। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम दलित चेहरा हैं। राजेश राम किसी भ्रम में नहीं हैं। उन्हें पता है कि बिहार में बिना सहयोगियों के नैय्या पार नहीं होगी। वह राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्षधर हैं। हालांकि चुनाव पूर्व तालमेल का फैसला कांग्रेस मुख्यालय करेगा। विधायक शकील कांग्रेस के जमीनी नेता हैं। उनकी राय भी अपने अध्यक्ष से जुदा नहीं है। इन नेताओं का मानना है कि वक्फ अधिनियम-2024 के बाद अल्पसंख्यक समुदाय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। इसलिए अब जद(यू), लोकजनशक्ति(राम विलास पासवान), जीतन राम माझी की पार्टी(हम) से मुसलमानों का भरोसा उठ गया है।  
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राहुल गांधी ने खेला है स्मार्ट गेम
बिहार में राहुल गांधी ने इस बार कृष्णा अल्लावरु को उतारा है। कृष्णा नए प्रयोग कर रहे हैं। सुनील कानूगोलू चुनाव पूर्व सर्वे, जमीनी तैयारी और मुद्दे पर बड़ी मशक्कत कर रहे हैं। कर्नाटक विधानसभा से ही सुनील कानूगोलू ने कांग्रेस का भरोसा जीत रखा है। अखिलेश सिंह को अहम जिम्मेदारी देकर उनके स्थान पर राजेश राम को अध्यक्ष भी विशेष रणनीति के तहत बनाया है। इन सबके बीच में भूमिहार कन्हैया कुमार ने युवाओं और समाज में राजनीति का तड़का लगा रखा है। कांग्रेस के नेता संजीव सिंह कहते हैं कि अभी जमीन पर जो आपको नहीं दिखाई दे रहा है, वह जून के बाद दिखने लगेगा। कांग्रेस के नेता कहना चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव के बाबत राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का मुख्य फोकस अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर तबके, दलित समाज और अल्पसंख्यक की तरफ है। संविधान बचाओं और उ.प्र. में पीडीए की मुहिम भी इसमें कारगर साबित होगी।
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आसान नहीं होगा अमित शाह की रणनीति को काट पाना
वक्फ संशोधन अधिनियम 2024 ऐसे ही नहीं अस्तित्व में आया। कांग्रेस और राजद के नेता नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क हैं और राजनीतिक लाभ लेने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन अमित शाह के मंत्र ने भाजपा और एनडीए के खेमे में हलचल पैदा कर दी है। चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, उपेन्द्र कुशवाहा समेत एनडीए के घटक दल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पिछली बार से अलग समीकरण लेकर चल रहे हैं। भाजपा के दोनों उप मुख्यमंत्री और नेता भी भावी चुनाव का चेहरा नीतीश कुमार को ही बताते हैं या फिर इस सवाल को टाल जाते हैं। बिहार भाजपा में उन नेताओं को पीछे रखा गया है, जो नीतीश कुमार से थोड़ा नाखुशी रखते हैं। दरअसल इसके बहाने भाजपा एनडीए में एकता का संदेश देकर आगे बढ़ रही है। हालांकि सम्राट चौधरी जैसे नेता मानते हैं कि आगामी चुनाव में भाजपा के सीटों की संख्या में काफी इजाफा होगा। भाजपा राज्य में नीतीश कुमार के चेहरे और अपनी रणनीति पर खेल रही है। भाजपा के चुनाव मैदान में उतरने का तरीका भी बहुत सधा हुआ और आक्रामक होता है। बिहार की राजनीति को गहराई से समझने वाले पवन कुमार कहते हैं कि विपक्ष के लिए भाजपा की इस रणनीति को चुनौती दे पाना आसान नहीं है।  

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क्या नीतीश कुमार होंगे मुख्यमंत्री का चेहरा?
भाजपा में कोई रणनीतिकार केन्द्रीय नेता इसका स्पष्ट उत्तर नहीं दे रहा है। उप मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय नेता नीतीश कुमार के चेहरे को खारिज नहीं करते, लेकिन नीतीश कुमार का स्वास्थ्य और समय समय पर असहज व्यवहार पर पार्टी के नेताओं की नजर रहती है। विपक्षी दल कांग्रेस और राजद के नेता कहते हैं कि भाजपा नीतीश कुमार के चेहरे का इस्तेमाल वोट पाने के लिए करेंगे, लेकिन चुनाव बाद इस बार निर्णय नतीजे के आधार पर होगा। उनके रणनीतिकारों को पता है कि नीतीश कुमार का स्वास्थ्य नई परिस्थितियां खड़ी करेगा। इसलिए नीतीस कुमार चेहरा हैं भी और नहीं भी। इसलिए विपक्ष की रणनीति यह शामिल है कि नीतीश कुमार का कमजोर स्वास्थ्य अब उन्हें सत्ता से दूर रखेगा। ताकि विपक्ष को भी इस संदेश को प्रसारित करने का फायदा मिल जाए।

राहुल गांधी चाहते हैं कि बिहार में मिलकर भाजपा और एनडीए का मुकाबला करें
कांग्रेस की रणनीति उसके पूर्व सांसद राहुल गांधी की पहल पर टिकी है। राहुल गांधी फिलहाल कांग्रेस को मजबूत बनाने में लगे हैं। वह संसद से लेकर सड़क तक लगातार एंग्री यंग मैन की भूमिका को बनाए रख रहे हैं। बेगुसराय में उनकी जनसभा में उमड़ी भीड़ भी काफी कह रही थी। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि अभी कांग्रेस बिहार में अपनी पार्टी में जान डाल रही है। यह पूछने पर कि क्या कांग्रेस दिल्ली और हरियाणा की तरह बिहार में एकला चलेगी तो वरिष्ठ नेता अभी इसका खुलकर उत्तर नहीं देते। लेकिन संकेत करते हैं कि पिछले चुनाव तक मिलकर लड़े हैं। इस बार भी ऐसा होने की संभावना है। यादव, अल्पसंख्यक, दलित, आर्थिक रूप से पिछड़े सब हमारे साथ हैं और हम सब मिलकर साथ चुनाव लड़ेंगे।

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